हृदय रोगियों के लिए वरदान अर्जुन की छाल

हृदय रोगियों के लिए वरदान अर्जुन की छालgaonconnection

मध्यप्रदेश के सुदूर वनवासी अंचलों में बसे आदिवासी आज भी प्राकृतिक जड़ी-बूटियों की मदद से तमाम छोटे-बड़े रोगों का इलाज करते हैं। पातालकोट घाटी और आसपास के इलाकों में भुमका (स्थानीय पारंपरिक वैद्य) हर्बल जड़ी-बूटियों के जानकार हैं और सैकड़ों सालों से इस परंपरागत ज्ञान को पीढ़ी दर पीढ़ी अपनाए हुए हैं। करीब डेढ़ दशक से इन आदिवासियों की परंपरागत चिकित्सा पद्धति को संकलित करने के बाद अपने अनुभवों के आधार पर दावे के साथ कह सकता हूं कि इस ज्ञान में दम है।

ब्लड प्रेशर रखे नियंत्रितहृदय की सुचारु गतिविधि और हमारे शरीर का रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) एक दूसरे पर आधारित होते हैं। किसी वजह से उच्च या निम्न रक्तचाप का होना या शरीर में रक्त परिवहन तंत्र में तेजी या घटाव आना हृदय रोगों को आमंत्रित करता है। चुनिंदा हर्बल नुस्खों का इस्तेमाल कर काफी हद तक रक्तचाप पर सामान्य किया जा सकता है। उच्च या निम्न रक्तचाप का होना कई मायनों में हृदय के लिए भी घातक है। अर्जुन की छाल और फलों को दिल के रोगियों के लिए वरदान के रूप में देखा जाता है। साथ ही इसे ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं के लिए उपयोग में लाते हैं। शहद या दूध के साथ लें अर्जुन की छाल और जंगली प्याज के कंदों का चूर्ण समान मात्रा में तैयार कर प्रतिदिन आधा चम्मच दूध के साथ लेने से हृदय रोगों में हितकर होता है। हृदय रोगियों के लिए पुर्ननवा का पांचांग (समस्त पौधा) का रस और अर्जुन छाल की समान मात्रा बड़ी फायदेमंद होती है। आदिवासियों के अनुसार अर्जुन की छाल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम गुड़, शहद या दूध के साथ दिन में 2 या 3 बार लेने से दिल के मरीजों को काफी फायदा होता है।चाय संग लें छाल का चूर्ण अर्जुन की छाल के चूर्ण को चाय के साथ उबालकर पीने से हृदय और उच्च रक्तचाप की समस्याओं में तेजी से आराम मिलता है। चाय बनाते समय एक चम्मच इस चूर्ण को डाल दें, इससे उच्च-रक्तचाप सामान्य हो जाता है। अर्जुन की चाय हृदय विकारों से ग्रस्त रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होती है। इसका चूर्ण (1 ग्राम) एक कप पानी में खौलाया जाए, फिर उसमें दूध व चीनी आवश्यकतानुसार मिलाकर पियें, तो फायदा होता है।चूर्ण खाते ही फायदाहृदय की सामान्य धड़कन जब 72 से बढ़कर 150 तक रहने लगे तो एक गिलास टमाटर के रस में एक चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर नियमित सेवन करने से शीघ्र ही धड़कन सामान्य हो जाती है। कहा जाता है कि यदि हृदयघात जैसा महसूस होने पर अर्जुन का चूर्ण जुबान पर रख लिया जाए तो तेजी से फायदा करता है!

  • मेथी की ताजी हरी पत्तियों की सब्जी जिसमें स्वादानुसार अदरक और लहसुन भी मिलाया गया हो, निम्न रक्तचाप में काफी कारगर साबित होती है। रोगी को अधिक से अधिक इस सब्जी का सेवन करना चाहिए, फायदा होता है।
  • आदिवासी हर्बल जानकार जटामांसी की जड़ों का काढ़ा निम्न रक्तचाप (लो- ब्लड प्रेशर) को रोगियों को देने की सलाह देते हैं। इनके अनुसार प्रतिदिन दिन में 2 बार इस काढ़े का 3 मिली सेवन से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • लेंडी पीपर के फल (2 ग्राम) और अश्वगंधा की जड़ों का चूर्ण (3 ग्राम) दिन में एक बार सवेरे गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से रक्तचाप नियंत्रित होता है, साधारणतया आदिवासी हर्बल जानकार निम्न रक्तचाप के रोगियों को इस फॉर्मूले के सेवन की सलाह देते हैं।
  • उच्च उच्च रक्तचाप को रोगियों को कटहल की सब्जी, पके कटहल के फल और कटहल की पत्तियों का रस पीने की सलाह देते हैं।
  • उच्च पत्थरचूर की जड़ों का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर लेने से उच्च रक्तचाप में फायदा होता है, इस फॉर्मूले का लगातार 2 माह तक सेवन करने से तेजी से फायदा होता है।

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