इस ग्रामीण स्कूल में LKG की बच्ची पढ़ाती है अंग्रेजी में पहाड़ा

इस ग्रामीण स्कूल में LKG की बच्ची पढ़ाती है अंग्रेजी में पहाड़ाgaonconnection

महमूदाबाद। जिस उम्र में बच्चे एबीसीडी सीखते हैं, उस उम्र में हिमांशी वर्मा (चार वर्ष) पांच का पहाड़ा वो भी अंग्रेजी में अपनी ही क्लास के बच्चों को सिखाती है। इतनी कम उम्र में हिमांशी की इस प्रतिभा के पीछे उसके स्कूल प्रबंधन की मेहनत है।

सीतापुर जिले की महमूदाबाद तहसील के पोखरा कलां ग्रामीण क्षेत्र में बना आरएस एजुकेशनल एकेडमी विद्यालय किसी भी शहरी कॉन्वेंट स्कूल को बराबरी देता है। यहां पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को अच्छी सी अच्छी सुविधाएं दी जाती हैं। विद्यालय के बारे में प्रधानाचार्या सीमा सिंह बताती हैं, “आज गाँवों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए कोई भी नहीं सोचता। गाँवों में शिक्षा को नए स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से यह स्कूल खोला गया है। अभी इस विद्यालय में 180 बच्चे पढ़ रहे हैं। यहां ज़्यादातर किसानों के बच्चे आते हैं इसलिए सभी कक्षाओं (प्ले ग्रुप से पांच) के लिए एक ही फीस 350 रुपए रखी गई है।”

एक तरफ जहां पोखरा कलां ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी के चलते छात्रों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम हो रही है, वहीं दूसरी ओर गाँव का यह स्कूल अपने आप में दूसरे विद्यालयों के लिए एक मिसाल बन रहा है।

स्कूल में पढ़ाने वाले अध्यापक भी बहुत उम्रदराज नहीं हैं बल्कि स्कूल में शिक्षा देने वाले अधिकांश शिक्षक स्नातक में पढ़ाई करने वाले छात्र हैं। कक्षा एक में पढ़ा रही संगीता बीए की छात्रा हैं। वो बताती हैं, “कभी-कभी इन बच्चों को इतनी कम उम्र में इतना होशियार देखकर ऐसा लगता है कि अगर ऐसा ही विद्यालय हमें बचपन में मिला होता तो आगे की कक्षाओं में होने वाली पढ़ाई कितनी आसान हो जाती।”

स्कूल में बढ़ने वाले बच्चों की उम्र छह वर्ष से भी कम है पर अनुशासन के मामले में स्कूली बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दी गई है। अगर स्कूल के किसी भी क्लास में आप प्रवेश करें, तो वहां के बच्चे खुद उठकर अपको गुड मॉर्निंग विश करेंगे और पूछने पर बकायदा अापको अंग्रेज़ी में अपना परिचय भी देंगे।

प्रधानाचार्या सीमा सिंह आगे बताती हैं, “स्कूली बच्चों को घर जैसा माहौल दिया जाए इसके लिए विद्यालय में बच्चों के खेलने-कूदने के लिए अलग प्ले कक्ष और खुला मैदान है और इसके अलावा अगर किसी भी बच्चे की अचानक तबियत खराब हो जाए,तो हमारे पास स्कूल में अच्छी मेडिकल सुविधाएं भी दी गई हैं।”

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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