इस लिए दूसरे देशों नहीं लुभा पा रहा भारत का आलू

इस लिए दूसरे देशों नहीं लुभा पा रहा भारत का आलूgaonconnection

नई दिल्ली (भाषा)। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक देश है। लेकिन कीट संबंधित मुद्दों के कारण देश का आलू निर्यात अपेक्षाकृत कम होता है।

सरकार आलू के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे उत्पादक राज्यों के आलू की अच्छी खेती वाले इलाकों में कीट मुक्त आलू क्षेत्र चिन्हित करने पर विचार कर रही है।

वर्ष 2014-15 में आलू का उत्पादन 4.8 करोड़ टन और निर्यात इसके एक प्रतिशत से भी कम था। अगर कीट संबंधित मुद्दों का समाधान कर लिया जाए और मानक प्रक्रियाओं का पालन किया जाए तो कई देशों को आलू का निर्यात किया जा सकता है।

वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने पिछले सप्ताह हुई बैठक में आलू के निर्यात बढ़ाने के उपायों और अन्य संबंधित मुद्दों पर केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के साथ चर्चा की। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘बैठक में वाणिज्य मंत्री ने उत्पादन संकुलों में आलू के निर्यात के लिये कीट मुक्त क्षेत्रों की पहचान किये जाने की ज़रुरत पर बल दिया। दोनों मंत्रियों ने इस मामले में आगे कदम उठाने का फैसला किया है।''

वाणिज्य मंत्रालय ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआई), केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय वनस्पति संरक्षण संगठन (एनपीपीओ) और राज्य बागवानी विभाग जैसे संबद्धपक्षों को आलू के लिये कीट मुक्त क्षेत्रों की पहचान को लेकर बातचीत करने तथा कार्य योजना तैयार करने का सुझाव दिया है। 

अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा मंत्रालय ने विभिन्न देशों को आलू के निर्यात के लिये मानक परिचालन प्रक्रिया तैयार करने पर बल दिया है ताकि क्वरैनटाइन से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जा सके। भारतीय आलू की रुस में काफी मांग है लेकिन कीट संबंधित मुद्दों के कारण भारत इसका निर्यात नहीं कर पा रहा है।

अधिकारी ने कहा कि उत्पादक क्षेत्रों में कीट मुक्त क्षेत्रों की पहचान से भारत से गुणवत्तापूर्ण उत्पाद के निर्यात में मदद मिलेगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत ने वित्त वर्ष 2014-15 में 1.80 लाख टन आलू का निर्यात किया जो इससे पिछले साल 4.85 लाख टन था।

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