इस साल आम की बंपर पैदावार तोड़ेगी सारे रिकॉर्ड

इस साल आम की बंपर पैदावार तोड़ेगी सारे रिकॉर्डगाँवकनेक्शन

लखनऊ। आम की पैदावार करने वालों लिए अच्छी ख़बर है। बीते साल के मुक़ाबले इस साल आम की पैदावार दोगुनी होने की उम्मीद है। बंपर फसल होने की उम्मीद से कारोबारी और बागवान खुश हैं। आम की बंपर पैदावार की उम्मीद के चलते आम कारोबारियों ने आम के लिए नए बाज़ारों की तलाश करनी शुरु कर दी है।

राजधानी की चार मैंगो बेल्ट मलिहाबाद, माल, काकोरी और बीकेटी में दशहरी, चौसा, लंगड़ा, सफेदा के अलावा दूसरे किस्मों के आमों की पैदावार बढ़ने की उम्मीद है। पिछले साल चारों मैंगो बेल्ट में 5.63 लाख टन आम की पैदावारी हुई थी।

ज़िला उद्यान अधिकारी डी के वर्मा ने बताया, 'पिछले साल 28,067 हेक्टेयर बाग में 5.67 लाख टन आम की पैदावार हुई थी। इस बार बागों में आम के दानों को देखते हुए पैदावार आठ लाख टन होने की उम्मीद की जा रही है।'' पिछले साल मलिहाबाद इलाके में कम पैदावार हुई थी, जबकि माल और पड़ोस के जिले हरदोई की रहिमाबाद, हसनगंज मैंगो बेल्ट में औसत पैदावार हुई थी।

पद्मश्री और मलिहाबाद के नर्सरी संचालक कलीमुल्ला खां (76 साल) बताते हैं, ''इस बार आम के पेड़ों में जो बौर और दाने दिखाई पड़ रहे हैं, ऐसी फसल जिंदगी में पहली बार देखी है।'' उन्होंने बताया, ''इस बार डेढ़ गुनी फसल होने की उम्मीद है।''

पश्चिम उत्तर प्रदेश में भी होगी अच्छी पैदावार

मलिहाबाद के साथ सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी, गोण्डा, उतरौला में भी आम की फसल काफी अच्छी होगी। इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर जिलों में दशहरी और चौसा की फसल होने की उम्मीद है।

ब्रांड प्रमोशन राशि में हो इज़ाफ़ा 

मलिहाबादी दशहरी अपने स्वाद में बेजोड़ है, लेकिन प्रदेश से इसका और अन्य किस्म के आमों का निर्यात दक्षिण भारतीय किस्मों से कम है। आम निर्यातक और मैंगो ग्रोवर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंसराम अली ने बताया, ''दूसरे राज्यों में आम की ब्रांड प्रमोशन राशि 15 रुपए किलो तक दी जाती है। वहीं उत्तर प्रदेश मंडी परिषद की ओर से मात्र 5 रुपए प्रति किलो दी जाती है।'' उन्होंने बताया, ''दक्षिण राज्यों में एयर ट्रांसपोर्ट की मद 80 फीसद दी जाती है। प्रदेश में करीब 40 फीसद है। उन्होंने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मंडी परिषद से इन राशि को बढ़ाने की मांग की है।''

मलिहाबाद से फल ट्रेन चलाने की मांग 

मलिहाबाद फलपट्टी क्षेत्र के पास कई मलिहाबाद, काकोरी, रहिमाबाद जैसे रेलवे स्टेशन हैं। ये स्टेशन अमृतसर और नार्थईस्ट रूट से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा दक्षिण भारत जाने वाली ट्रेनें भी इस रूट से होकर गुजरती हैं। माल ब्लॉक के मसीढ़ा गाँव के आम उत्पादक और कारोबारी हसीमुद्दीन सिद्दीकी (55 साल) ने बताया, ''अगर इन रेलवे स्टेशनों पर आम के सीजन में आम की लोडिंग की सुविधा हो जाए तो बड़ी मात्रा में आम का निर्यात होगा।''

आम निर्यातक इंसराम अली ने बताया, ''करीब पांच साल पहले तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार से मलिहाबाद स्टेशन से फल ट्रेन चलाने की मांग की थी। ताकि ट्रेन और पार्सल वैन से पंजाब, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल और नार्थईस्ट में दशहरी और अन्य स्थानीय किस्म का आम भेजा जा सके।'' उन्होंने आगे बताया, ''इस सुविधा से आम उत्पादकों को चारबाग जाना नहीं पड़ेगा।''

पैक हाउस में तैयारी शुरू

प्रदेश से आम के निर्यात की तैयारियों में मंडी परिषद जुट गया है। परिषद के अधिकारी निर्यातकों से सम्पर्क करने में लग गए है। उपनिदेशक प्रशासन/विपणन डॉ हिमांशु शेखर त्रिपाठी ने बताया, ''निर्यातकों से सम्पर्क करने के साथ रहमानखेड़ा और सहारनपुर पैक हाउस में आम की धुलाई, ग्रेटिंग और अन्य उपकरणों को जांचा जा रहा है। इसके साथ ही नवाब ब्रांड आम की पैकिंग के डिब्बों की भी व्यवस्था की जा रही है।''

बारदाना का ऑर्डर शुरू

आम की फसल के करीब आते देख कारोबारी उनकी पैकिंग के समानों का भी ऑर्डर देने में जुट गए हैं। कई बड़े कारोबारियों ने नासिक जिले में प्लास्टिक की क्रेट्स का ऑर्डर अभी से कर दिया है। कुछ कारोबारी अंगूर में इस्तेमाल हो चुकी प्लास्टिक क्रेट्स के लिए दूसरे आढ़तियों को बयाना भी दे चुके हैं। दुबग्गा मंडी के आम कारोबारी मोहम्मद सिद्दीक (42 साल) ने बताया, ''वजन के मुताबिक आम की पैकिंग के बॉक्स और प्लास्टिक की क्रेट्स का ऑर्डर अभी से कर दिया है।''

पाकिस्तानी आम से मिलती है चुनौती

खाड़ी देशों में भारतीय आमों को पाकिस्तानी आमों से कड़ी चुनौती मिलती है। उत्तर प्रदेश से जाने वाली दशहरी और चौसा को पाकिस्तान के सिंगड़ी और चौसा किस्म से सामना करना पड़ता है। ''पाकिस्तान की ये दोनों किस्में खाड़ी देशों में पहुंचने पर काफी सस्ती पड़ती हैं। सरकार को वहां पर भारतीय आम को प्रमोट करने के लिए निर्यातकों को कई सहूलियत देनी होगी'' निर्यातक इंसराम ने कहा।

रिपोर्टर - जसवंत सोनकर

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