Top

इस वर्ष होगा सबसे ज्यादा यूरिया का उत्पादन: अनंत कुमार

इस वर्ष होगा सबसे ज्यादा यूरिया का उत्पादन: अनंत कुमारgaonconnection

नई दिल्ली (भाषा)। देश में इस वर्ष 224 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ है, आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। देश की यूरिया आयात पर निर्भरता धीमे धीमे कम हो रही है।  

रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने पूरक प्रश्नों के उत्तर में राज्यसभा को बताया कि सरकार ने यूरिया में जो नीम कोटिंग करने की पहल शुरु की है, इससे यूरिया की खपत में 10 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में किसानों से यह शिकायत मिल रही है कि उन्हें घटे हुए दामों पर उर्वरक नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे उर्वरक डीलरों के यहां तलाशी एवं छापा मारकर यह सुनिश्चित करें कि किसानों को नई दरों पर उर्वरक मिले।

कुमार ने बताया कि केंद्र ने पांच जुलाई को डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) के खुदरा मूल्य को 2500 रुपए घटाकर 22 हजार रुपए प्रति टन, म्यूरेट आफ पोटाश (एमओपी) पर पांच हजार रुपए हटाकर 11 हजार रुपए प्रति टन तथा एनपीके पर एक हजार रुपए घटाने की घोषणा की थी। कुमार ने कहा, ‘‘हमने डीएपी, एमओपी एवं एनपीके के दाम घटाए। अंतत: राज्यों को आवश्यक वस्तु कानून लागू करना होता है। मैंने राज्यों को यह कानून लागू करने के लिए पत्र भेजा है। उन्हें तलाशी एवं छापे मारने चाहिए ताकि उर्वरक कारोबारी नई दरों का पालन कर सकें।''

उर्वरक मंत्री ने कहा कि न केवल दो सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड एवं नेशनल केमिकल्स फर्टीलाइजर बल्कि सभी निजी उर्वरक कंपनियों ने सरकार को यह शपथपत्र दिया है कि वे गैर यूरिया उर्वरकों की कीमतों को नीचे लाएंगे। उन्होंने कहा कि गैर यूरिया उर्वरकों की कीमतें पिछले 15 सालों में पहली बार कम हुई हैं जो वैश्विक कीमतों के अनुरुप हैं।

कुमार ने एक अन्य प्रश्न के जवाब में बताया कि सरकार उर्वरक क्षेत्र में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण एक पायलट परियोजना के नतीजों के अध्ययन के बाद शुरु करेगी। यह परियोजना अगले दो वर्ष में देश भर के 16 जिलों में चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को उर्वरक क्षेत्र में लागू करने में कई कठिनाइयां हैं क्योंकि देश भर में 16 करोड़ छोटी बड़ी कृषि जोत हैं। इसके अलावा यह तय करना है कि भूमि का असली मालिक कौन है और कौन पट्टे पर खेती कर रहा है।

     

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.