इतिहास को जानने के लिए जाएं संग्रहालय

इतिहास को जानने के लिए जाएं संग्रहालयगाँव कनेक्शन

यानी 18 मई को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जाता है। संग्रहालयों की विशेषता और उनके महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 1983 में ‘18 मई’ को ‘अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय किया था।

इसका उद्देश्य आम जनता में संग्रहालयों के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें संग्रहालयों में जाकर अपने इतिहास को जानने के प्रति जागरूक बनाना है। भले ही इतिहास की किताबें पढ़ने में बच्चों को बोरियत महसूस हो लेकिन संग्रहालयों में इतिहास की चीजों को करीब से देखकर बौद्धिक मनोरंजन होता है। भारत में भी कई संग्रहालय हैं जिनमें भारत के इतिहास से लेकर भारतीय रेलवे, गुड़िया और भारतीय कृषि के इतिहास से रू-ब-रू होने का मौका मिलता है। इस पर एक रिपोर्ट-

राष्ट्रीय संग्रहालय

इस संग्रहालय में लगभग 2,00,000 भारतीय और विदेशी मूल के संग्रह हैं, जो भारत के पिछले 5,000 वर्षों के इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर पर प्रकाश डालते हैं। यह भारत के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक है। इसे 1949 में दिल्ली में जनपथ के करीब बनवाया गया था। यहां पर पुराने समय की रेलगाड़ियों के लग़्जरी कोचों के बारे में जानने को मिलेगा जिनका इस्तेमाल भारत के महान राजाओं द्वारा होता था। इसके अलावा यहां राजा-महाराजाओं के गहने, जेवरात, चित्र और असलहे रखे गए हैं। यहां पर महात्मा बुद्ध का एक सेक्शन भी है जहां उनकी प्रतिमाएं और बुद्ध स्तूप रखे हुए हैं।

कैलिको संग्रहालय

अहमदाबाद स्थित कैलिको संग्रहालय पर्यटकों का मुख्य आकर्षण हैं। इसे गौतम साराभाई और उनकी बहन गीरा साराभाई ने 1949 में शुरू किया था। इस संग्रहालय में एक से बढ़कर कपड़ों के कलेक्शन हैं। यह कपड़े व वेशभूषा मुगलकालीन समय से लेकर आधुनिक भारत तक की हैं। 

नैपियर संग्रहालय

19वीं शताब्दी में बना नैपियर संग्रहालय भारत के पुराने संग्रहालयों में से एक है। यह केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम में स्थित है। यह लॉर्ड नैपियर के नाम से प्रभावित है जो मद्रास के गवर्नर थे। यहां कथकली कठपुतली मॉडल, संगीत वाद्ययंत्र, कांस्य के बने देवी और देवताओं की मूर्ति और भी बहुत कुछ यहां पर प्रदर्शित किया गया है।

कानपुर संग्रहालय

कानपुर संग्रहालय में बड़ी संख्या में कलाकृतियां और स्मृति चिन्ह रखे गए हैं जो शहर के उन लोगों का इतिहास बताते हैं जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अंगेजों से संघर्ष किया। यहां का प्रमुख आकर्षण ऐतिहासिक तोप है जो ब्रिटिश लोगों के समय की है। वर्ष 1999 में स्थापित यह संग्रहालय मॉल रोड पर फूलबाग़ में स्थित है।

राष्ट्रीय कृषि विज्ञान म्यूजियम

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान म्यूजियम है। वहां भावी कल्पनाओं के साथ हमारे देश में कृषि में प्रागैतिहासिक काल और वर्तमान समय की स्टेट ऑफ द आर्ट कृषि प्रौद्योगिकियों से संबंधित कृषि प्रगति को दर्शाया गया है। इस म्यूजियम में पंचवर्षीय योजना और हरित क्रांति की गाथा को लोकप्रिय प्रारूप में सहेजा गया है। म्यूजियम में 150 प्रदर्शनियां हैं, जिनका प्रदर्शन 10 प्रमुख खंड़ों में किया गया है। जैसे कृषि के छह स्तंभ, प्रागैतिहासिक काल में कृषि, सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक एवं वैदिक पश्चात युग, सल्तनत और मुगलकालीन युग वगैरह।

राष्ट्रीय रेलवे संग्रहालय

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रेलवे संग्रहालय देश का एकमात्र ऐसा संग्रहालय है, जो भारतीय रेलवे की 161 वर्षो की कहानी को दर्शाता है। इसकी स्थापना फरवरी, 1977 में की गयी थी। इस संग्रहालय में भारतीय रेलवे से संबंधित 100 से अधिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। इसमें स्थिर एवं चालित मॉडल, सिगनल उपकरण, पुरातन फर्नीचर, ऐतिहासिक चित्र व इससे संबंधित साहित्य आदि मौजूद हैं। यह संग्रहालय, यहां प्रदर्शित रेल के डिब्बों जिसमें वेल्स के राजकुमार का सैलून और मैसूर के महाराजा का सैलून शामिल है, के लिए भी जाना जाता है। इस संग्रहालय के अन्य मुख्य आकर्षण हैं फेयरी क्वीन, पटियाला राज्य के मोनो रेल ट्रेनवेज, अग्निशामक इंजन, क्रेन टैंक, कालका-शिमला रेल बस, अग्निरहित वाष्प लोकोमोटिव वगैरह। खिलौना ट्रेन आप को संग्रहालय के चारों ओर सवारी कराती है। 

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