ज़ख्मों पर मरहम लगाने में जुटीं सरकारें

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बागपत। पहली बार किसानों पर केन्द्र व प्रदेश सरकार ने थोड़ा रहम करते हुए उनके जख्मों पर मरहम लगाने में जुटी है। सिकुड़े गेहूं को खरीदने पर विचार कर रही है और समर्थन मूल्य भी किसानों को दिया जाएगा। इतना ही नहीं किसानों के लिए तौल का खर्च माफ करने की भी पूरी तरह से तैयारी हो चुकी है। पूर्व में सरकारें काला व सिकुड़े गेहूं को नहीं खरीदती थी, जिससे किसानों को कम दामों पर अपना गेहूं बेचना पड़ता था। केन्द्र व प्रदेश सरकार ने पहली बार ऐसा किया, जिससे किसानों को हुए नुकसान में थोड़ी मदद मिलेगी।

बेमौसम बरसात व ओलावृष्टि से तबाह किसानों के जख्मों पर केंद्र सरकार ने मरहम लगाने की तैयारी कर ली है। सरकार पहली बार सिकुड़े गेहूं को भी खरीदने पर विचार कर रही है, इसका मूल्य भी समर्थन मूल्य के बराबर ही दिया जाएगा। गेहूं तौलने में होने वाले खर्च को राज्य सरकार वहन करेगी। किसान फरवरी तक गेहूं की बेहतर फसल होने को लेकर आशान्वित था। एकाएक मौसम के करवट बदलने से बरसात हुई और ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीद पर तुषारापात कर दिया।

कृषि विभाग के सर्वे के मुताबिक 15 प्रतिशत तक गेहूं पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। बाकी 85 प्रतिशत गेहूं में 25 प्रतिशत गेहूं काला व सिकुड़ा होगा। केवल 60 प्रतिशत गेहूं बढि़या होगा, जो समर्थन मूल्य पर बिक पाएगा। सरकार सिकुड़ा व काला गेहूं नहीं खरीदती है।  फसल के नुकसान से आहत किसान आत्महत्या भी करने लगे हैं। किसानों को आत्महत्या से रोकने के लिए केंद्र सरकार के खाद्य व कृषि मंत्रालय ने विचार शुरू कर दिया है। गेहूं खरीदने वाली कंपनियों से भी इस बारे में वार्ता की जा रही है।

सरकार सिकुड़े गेहूं को समर्थन मूल्य पर ही खरीदने पर विचार कर रही है। लिहाजा किसानों को 25 फीसद के बजाए 40 फीसद गेहूं का समर्थन मूल्य मिल सकेगा। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने सभी डीएम से कहा है कि खरीद केंद्रों व मंडी समिति में गेहूं बेचने आने वाले किसानों से गेहूं तौलने का खर्च नहीं लिया जाएगा, बल्कि गेहूं तौलने वाले मजदूरों को सरकार अपने खजाने से मजदूरी देगी।

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