जायद मूंगफली का सही समय

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लखनऊ। मूंगफली खरीफ और जायद दोनों मौसम की फसल होती है। खरीफ की आपेक्षा जायद में कीट और बीमारियों का प्रकोप कम होता है। प्रदेश में यह झांसी, हरदोई, सीतापुर, खीरी, उन्नाव, बरेली, बदायूं, एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, मुरादाबाद व सहारनपुर के अधिक क्षेत्रफल में उगाई जाती है। ग्रीष्मकालीन मूंगफली से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को खास बातें ध्यान रखनी चाहिए।

जलवायु और जमीन

इसके लिए शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है, मूंगफली की खेती के लिए दोमट बलुअर, बलुअर दोमट या हल्की दोमट भूमि अच्छी रहती है। जायद में मूंगफली की फसल के लिए भरी दोमट भूमि का चुनाव नहीं करना चाहिए। यह आलू, मटर, सब्जी मटर, एवं राई की कटाई के बाद खाली भूमि में की जा सकती है।

प्रजातियां

जायद के लिए जो प्रजातियां है- डीएच-86, आईसीजीएस-44,आईसीजीएस-1, आर-9251, टीजी37, आर-8808 

खेत की तैयारी

जायद में मूंगफली की खेती के िलए खेत की तैयारी अच्छी तरह करनी चाहिए। खेत की एक गहरी जुताई के बाद दो-तीन जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करके भुरभुरा बना लेना चाहिए। जायद में आखिरी जुताई के बाद पाटा लगा कर खेत को समतल बना लेना चाहिए, जिससे की पानी लगाने में सुविधा रहे और सभी जगह पानी सफलता से लगाया जा सके।

बीज बुवाई और शोधन

जायद में बुवाई मार्च से अप्रैल तक की जा सकती है, जिससे की फसल अच्छी पैदावार दे सके। बुवाई लाइनों में करना चाहिए, लाइन से लाइन की दूरी 25 से 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 सेमी रखनी चाहिए। जायद की फसल में 95-100 किग्रा प्रति हेक्टेयर बीज बुवाई में लगता हैं, बोने से पहले बीज (गिरी) को थीरम दो ग्राम और एक ग्राम 50 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम के मिश्रण को दो ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से शोधित करना चाहिए। इस शोधन के पांच-छह घण्टे बाद बोने से पहले बीज को मूंगफली के राइजोबियम कल्चर से उपचारित कर लेना चाहिए।

पैदावार

मूंगफली की उपज मौसम के आधार पर अलग अलग पाई जाती है, इसी प्रकार से जायद की फसल में उपज 28 से 30 कुन्तल प्रति हेक्टेयर  प्राप्त होती है। 

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