लोकमंथन में देशभर के बुद्धजीवियों ने रखे विचार, लोक संस्कृति की झलक देख सभी हुए मंत्रमुग्ध

झारखंड की धरोहर का यहां अनूठा संग्रह था। यहां पर मिट्टी के मकान बनाकर उनपर कलाकृतियां उकेरकर झारखंड की आदिवासी संस्कृति का अनूठा संग्रह था।

लोकमंथन में देशभर के बुद्धजीवियों ने रखे विचार, लोक संस्कृति की झलक देख सभी हुए मंत्रमुग्ध

रांची। झारखंड में चल रहे तीन दिवसीय लोक मंथन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आये बुद्धजीवियों ने देश की स्थिति पर चर्चा की। खेलगांव के आडोटोरियम में जहां एक तरफ बुद्धजीवी देश के बारे में मंथन कर रहे थे वहीं दूसरी तरफ झारखंड की लोककला और लोक संस्कृति की प्रदर्शनी लगी हुई थी।


झारखंड की धरोहर का यहां अनूठा संग्रह था। यहां पर मिट्टी के मकान बनाकर उनपर कलाकृतियां उकेरकर झारखंड की आदिवासी संस्कृति की झलक दिख रही थी। लोकमन्थन द्वार के अंदर जाते ही एक कोने पर बैलगाड़ी थी वहीं किसान देसी कृषि यंत्र बना रहे थे।

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एक तरफ लाह की चूड़ियां बनाकर कारीगर दिखा रहे थे तो दूसरी तरफ कुम्हार मिट्टी के बर्तन बना रहे थे। मुख्य द्वार से लेकर अंदर तक कई जगहों पर यहां की पारंपरिक रंगोली बहुत ही खूबसूरत बनी हुई थी। यहां के स्थानीय कलाकार लोकनृत्य और नुक्कड़ नाटक कर यहां की लोकसंस्कृति को बता रहे थे।

लोकमन्थन का आयोजन 27-30 सितंबर तक प्रज्ञा प्रवाह द्वारा चार दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रज्ञा द्वारा आयोजित यह दूसरा कार्यक्रम है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत के बोध पर चर्चा करना था। पहले दिन समाज का अवलोकन दूसरे दिन सेवा का भाव कैसा हो और तीसरे दिन विश्व अवलोकन पर चर्चा की गयी।


इस चर्चा में दुनिया का नजरिया भारत को देखने में और भारत दुनिया के प्रति क्या सोच रखता है इस पर बुद्धजीवियों ने अपने विचार रखे। लोकमन्थन का उद्धघाटन उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने 27 सितंबर को किया।

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