झारखंड के गांवों में कोरोना की चेन तोड़ने के लिए होगा डोर-टू-डोर सर्वे

उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद अब झारखंड ने भी कोरोना से राज्य की ग्रामीण आबादी को बचाने के लिए पहल की है। इसके लिए 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 मई को शुरू हुआ है।

झारखंड के गांवों में कोरोना की चेन तोड़ने के लिए होगा डोर-टू-डोर सर्वे

ग्रामीण इलाकों में बढ़ते कोरोना के केस को देखते हुए हेमंत सोरेन सरकार ने लिया डोर टू डोर सर्वे का फैसला। फोटो-अरेंजमेंट

रांची (झारखंड)। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। राज्य में ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमण के मरीज शहरों के अस्पतालों में आ रहे हैं। ऐसे में झारखंड सरकार ने ग्रामीण इलाकों में डोर-टू-डोर सर्वे करने का फैसला किया है, जिसके तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 मई से शुरू हो चुका है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित कोविड के मामलों की पहचान करने के लिए डोर-टु-डोर अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने इस संबंध में सभी उपायुक्तों को पत्र जारी किया है। एनआरएचएम झारखंड को रैपिड एंटीजन टेस्ट (आरएटी) परीक्षण और लक्षणों के आधार पर संभावित कोविड रोगियों की पहचान के लिए फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है।

रैपिड एंटीजन टेस्ट (आरएटी) परीक्षण और लक्षणों के आधार पर संभावित कोविड रोगियों की पहचान के लिए फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है।

एएनएम, सीएचओ आदि को दिया गया प्रशिक्षण

ग्रामीण झारखंड के तीन करोड़ लोगों की कोरोना से सुरक्षा के लिए सखी मंडल की दीदी सहित हजारों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और अन्य हितधारकों को डोर-टु-डोर सर्वे के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 मई को शुरू हुआ, जो राज्य के हर ब्लॉक में आयोजित किया गया। इसके तहत ब्लॉक प्रशिक्षण दल की ओर से एएनएम, सीएचओ, एमपीडब्ल्यू और सहिया दीदी को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

इसके अलावा फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को ऑक्सीमीटर चेक करने, तापमान देखने और अन्य संबंधित लक्षणों को समझने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण संभावित संक्रमित रोगी की पहचान करने में मदद करेगा, जिसके बाद उसे कोरोना टेस्ट के लिए टेस्ट सेंटरों पर भेजा जा सकेगा। सभी एमओआईसी और एएनएम के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम वर्चुअल सत्रों के साथ शुरू हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को डोर-टु-डोर अभियान कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गई।

हर पंचायत में एक क्वारंटाइन सेंटर भी संचालित होगा

डोर-टु-डोर सर्वे के दौरान फ्रंटलाइन वर्कर्स की टीम संबंधित पंचायत के हर घर का दौरा करेगी। इस दौरान किसी घर में कोई भी सकारात्मक मामला, पिछले दो महीनों में किसी की भी मौत या कोविड लक्षणों वाले व्यक्ति की पहचान की जाएगी। यदि किसी परिवार का कोई सदस्य संक्रमित पाया जाता है, तो टीम यह सुनिश्चित करेगी कि परिवार के अन्य सदस्यों का भी परीक्षण हो। इसके लिए एक परीक्षण केंद्र भी काम करेगा। अगर किसी में कोविड के लक्षण पाए जाते हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द परीक्षण के लिए ले जाया जाएगा।

प्रत्येक पंचायत में एक क्वारंटाइन सेंटर भी संचालित होगा, ताकि पॉजिटिव व्यक्ति अपने परिवार के अन्य लोगों से दूर रहे। प्रत्येक रोगी की स्वास्थ्य स्थिति की जांच के लिए प्रत्येक जांच केंद्र पर एक सहिया के साथ एक सीएचओ को नियुक्त किया जाएगा। व्यक्ति के गंभीर होने पर उसे तुरंत नजदीकी कोविड देखभाल केंद्र में भेजा जाएगा। कोई भी संक्रमित रोगी, जिसमें हल्के लक्षण हैं और घर पर अलग रहने की व्यवस्था है, उसे सभी आवश्यक जानकारी और दवा के साथ कोविड देखभाल चिकित्सा किट प्रदान की जाएगी।

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