जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अंशुल की ताजपोशी लगभग तय

जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अंशुल की ताजपोशी लगभग तयगाँव कनेक्शन

इटावा। जनपद की छोटी पंचायत का गठन तय होना शेष रह गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्णय के अनुसार आगामी 27 नवंबर से ग्राम पंचायत के चुनावों का आगाज हो जाएगा। जनपद में जिला पंचायत के लिए हुए निर्वाचन में यह स्पष्ट माना जा रहा है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के भतीजे अंशुल यादव की जनपद के प्रथम नागरिक के रूप में ताजपोशी तय है। इससे पूर्व अंशुल की मां प्रेमलता यादव इस पद पर काबिज थीं और मां से मिल रही इस धरोहर को ही उनका बेटा निर्वाहन करेगा।

जिला पंचायत के नतीजे बेशक सपा के लिए चिंताजनक साबित हो रहे हों, परंतु समाजवादी कुनबे के लिए यह सीट वर्चस्व को बचाने के लिए कामयाब साबित हो रही है। यही वजह है कि अंशुल यादव को जिला पंचायत में दो तिहाई बहुमत मिलना तय माना जा रहा है। विगत वर्ष में हुए जनपद की छोटी संसद के तय किए गए परसीमन में जनपद की ग्राम पंचायतों के आकार को 420 से बढ़ाकर 471 तक बढ़ा दिया गया। इसी लिहाज से जिला पंचायत के आकार को भी बढ़ाकर 21 से 24 कर दिया गया। हालिया चुनावों में जिला पंचायत सदस्य के चुनावों को विभिन्न राजनीतिक दलों ने जोर-शोर से लड़ा। जिला पंचायत सदस्य के इस निर्वाचन में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी को रसूख का सवाल माना गया। इसके बावजूद पार्टी 24 सीटों में से महज 13 सीटें ही हासिल करने में कामयाब हो सकी। 

समाजवादी पार्टी ने बेशक 13 सीटों पर ही अपनी जीत सुनिश्चित की हो, परंतु जनपद के सैफई विकास खंड से निर्विरोध निर्वाचित हुए अंशुल यादव को जनपद के प्रथम नागरिक का रुतबा मिलना तय माना जा रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों के मुताबिक यह रुतबा इसलिए भी साफ है कि पिछले दो दशक से अधिक समय से यहां समाजवादियों का ही रुतबा रहा है। इससे पूर्व अंशुल की मां प्रेमलता यादव जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज रहीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में ही जिला पंचायत अध्यक्ष आवास को एक अत्याधुनिक फॉर्म हाउस के रूप में स्थापित कर दिया, ताकि उनके पुत्र एवं उनके पुत्र अंशुल यादव को मिलने वाले संभावित जिला पंचायत अध्यक्ष को यह आवास मुहैया हो सके।

मिनी विधायक के रूप में देखे जाते हैं जिला पंचायत सदस्य

जिला पंचायत सदस्य को अमूमन वह महत्व नहीं मिलता है जो एक विधायक के तौर पर देखा जाता है। इसके बावजूद राजनीति के गलियारों में जिला पंचायत सदस्य का रुतबा एक मिनी विधायक के रूप में आंका जाता है। इसकी वजह है कि निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य तकरीबन 25-30 हजार मतदाताओं का प्रतिनिधित्व हासिल करता है। एक विधायक दो से ढाई लाख मतदाताओं की आवाज बनता है। इससे स्थित साफ है कि एक जिला पंचायत अध्यक्ष का ओहदा छोटे विधायक की तरह है।

मिलता नहीं है कोई वेतन

यह देश के  संविधान की खामी ही है कि निर्वाचन आयोग जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में खर्च सीमा में बढ़ोत्तरी तो करती है परंतु उनकी आय में कोई वृद्धि करने के बार में विचार नहीं करती है। प्रत्येक जिला पंचायत सदस्य को महज आधिकारिक जिला पंचायत की बैठक में शिरकत करने के लिए तो एक हजार रुपये का मानदेय निर्धारित है, परंतु इसके अलावा कोई अन्य मानदेय या भत्ता देय नहीं हैं। 

मां के बाद अब बेटा बनेगा जिले का प्रथम नागरिक

वर्तमान में जिला पंचायत की कमान सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की अनुजवधु प्रेमलता यादव के हाथ में है। अब मुलायम परिवार ने इस विरासत को उनके पुत्र अंशुल यादव को सौंपने का निर्णय लिया है। परास्नातक की योग्यता रखने वाले अंशुल यादव की ताजपोशी से पूर्व ही जिला पंचायत अध्यक्ष के आवास को भव्यता से पूर्ण कराते हुए निर्माण कार्य कराया गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष का आवास किसी फॉर्म हाउस से कम नहीं है। अंशुल की ताजपोशी को लेकर समाजवादी पार्टी के युवाओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। यही वजह है कि ताजपोशी से पूर्व ही अंशुल के दरबार में बड़े-बड़े नेता हाजिरी लगाते हुए देखे जा सकते हैं। राजनीति में जिला पंचायत सदस्य से अपनी पारी आरंभ करने वाले अंशुल वर्तमान में किसी कुशल राजनेता से कम नजर नहीं आ रहे हैं।

रिपोर्टर - मसूद तैमरी 

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