जजों के काम पर नज़र रखने की तैयारी में मोदी सरकार

जजों के काम पर नज़र रखने की तैयारी में मोदी सरकार

नई दिल्ली (भाषा)। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार न्यायधीशों के काम का आंकलन करने के लिए न्यायाधीशों की जवाबदेही संबंधी विधेयक पर दोबारा काम कर रही है। इसमें कामकाग के आंकलन संबंधी नियम जोड़े जा रहे हैं। बदलावों को शामिल करने के बाद विधेयक को जल्द ही फिर से लाया जा सकता है। देश के कई मामलों में न्यायपालिका के दखल देने के बाद सरकार और न्यायपालिका में कई बार टकराव की खबरें सामने आती रही हैं।

नए विधेयक की रुपरेखा इसी साल फरवरी में न्याय प्रदान करने और विधि सुधार करने के राष्ट्रीय मिशन की सलाहकार परिषद की बैठक में चर्चा के लिए लाई गई थी।

अधिकारियों ने इस बैठक में कहा कि यह महसूस किया गया है कि देश में न्यायिक जवाबदेही की जरुरत को न्यायिक आचार और न्यायिका कदाचार से संबंधित मुद्दों तक सीमित किया जा रहा है। अगर भारत अदालती उत्कृष्टता की रुपरेखा का पालन करता है तो इसका दायरा और बढ़ सकता है तथा देश की कानूनी प्रक्रियाओं में ‘प्रभावशीलता और पारदर्शिता' के मुद्दों को लाया जा सकता है।

अप्रैल 2016 में राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों की एक बैठक में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा न्यायधीशों के कामकाज पर सवाल उठाए जाने पर देश के मुख्य न्यायाधीश भावुक हो गए थे। मुख्य न्यायाधीश ने धीमी न्याय प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा जजों की नियुक्ति को प्रमुख बताया था।

इस विधेयक की बात कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के समय भी उठी थी। संप्रग सरकार के समय इस विधेयक में न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक व्यवस्था बनाने की पैरवी की गई थी।

सरकार के सूत्रों ने कहा कि जब विधेयक को व्यापक चर्चा के लिए लाया जाएगा तो उच्च न्यायपालिका में ‘कामकाज के सूचकांक' के मुद्दे पर चर्चा के अलावा थिंकटैंक की रिपोर्ट का इस्तेमाल किया जाएगा।

इस बैठक के लिए तैयार विधि मंत्रालय के एक नोट में कहा गया, ‘‘न्यायाधीशों के बीच स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही को समाहित करने के लिए एक व्यवस्था पर बिना विलंब के विचार होना चाहिए। इसे न्यायिक मानदंड एवं जवाबदेही विधेयक के संशोधित रुप को फिर से लाकर किया जा सकता है।''

इस विधेयक को मार्च, 2012 में लोकसभा ने पारित कर दिया था, लेकिन न्यायपालिका और न्यायविदों की ओर से विरोध जताए जाने के बाद राज्यसभा में इसमें बदलाव किये गये।  

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