जल संकट की दस्तक, संभल जाएं

जल संकट की दस्तक, संभल जाएंgaoconnection

अभिषेक वाघमारेकेंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के नवीनतम साप्ताहिक बुलेटिन के अनुसार, देशभर के 91 प्रमुख जलाशयों में केवल 29 फीसदी पानी बचा है। इस दशक में यह अब तक का सबसे कम पानी का स्तर दर्ज किया गया है।

सीडब्ल्यूसी के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जलाशयों में पानी का स्तर, पिछले साल का 71 फीसदी और पिछले एक दशक में औसत भंडारण का 74 फीसदी है। जुलाई 2015 में लोकसभा में सरकार को दिए गए जवाब के अनुसार, 91 प्रमुख जलाशयों में 157.8 बिलियन घन मीटर (बीसीएम) पानी है। इन जलाशयों की क्षमता 250 बीसीएम है। 400 बीसीएम पानी भूजल के माध्यम से भारत में सिंचाई के लिए उपलब्ध है।पानी की यह कमी इस दशक की सबसे खराब स्थिति है। मानसून आने में भी अभी तीन महीने का समय है जो जुलाई के पहले हफ्ते में पहुंचेगा। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में हज़ारों गाँव, जो रिकॉर्ड तोड़ सूखे का सामना कर रहे हैं, पानी के लिए पूरी तरह से राज्य आपूर्ति टैंकरों पर निर्भर हैं। वहीं लातूर में सप्ताह में केवल तीन दिन ही पानी बांटा जाता है। पिछले हफ्ते, लातूर जिला प्रशासन ने हिंसा के डर से, लोगों का टैंकरों के पास जमा होने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सूखे ग्रामीण महाराष्ट्र में चारा शिविर न केवल मवेशियों को शरण देते हैं बल्कि हज़ारों परिवार भी वहां रहते हैं। सरकार ने अब शहरों और कस्बों को स्विमिंग पूल में पानी की आपूर्ति रोकने की सिफारिश की है।मध्यप्रदेश में भी सूखा संकट की दस्तक दे रहा है। सरकार अब वहां गाँवों में टैंकर भेजने की तैयारी में है। बुंदेलखंड में सर्दियों की फसल बोने के लिए पानी नहीं है, कृषि उत्पादकता आधी हो गई है और वहां लोगों के लिए नमक खरीदना भी मुश्किल हो गया है। ओडिसा में भी किसानों ने फसलों की रक्षा के लिए सार्वजनिक झीलों के तटबंधों को तोड़ दिया है। कुछ दिनों पहले पानी की मांग करते हुए किसानों ने बेंगलुरू में घेराबंदी की है। कर्नाटक में जल संकट, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पानी की कमी का परिणाम है। इस वर्ष गर्मी में आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में सबसे अधिक पानी की कमी होने की संभावना है।44 फीसदी और 36 फीसदी स्तर की क्षमता के साथ, भारत के पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में जलाशयों में पानी सबसे अधिक है जबकि, सीडब्ल्यूसी आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर में पानी का स्तर 20 फीसदी, 26 फीसदी और 27 फीसदी है। प्रायद्वीपीय भारत में कृष्णा नदी बेसिन में विशेषकर पानी की कमी है जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को प्रभावित करती है। वर्तमान के आंकड़ों से पता चलता है कि सिंधु, तापी, माही, कावेरी और गोदावरी की घाटियों में पानी की कमी है, जिससे आने वाले समय में महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले के जायकवाड़ा में (मराठवाड़ा में) जहां के कुछ हिस्सों में इस सदी का सबसे बद्तर सूखा पड़ा है, वहां अपने (2.17 बीसीएम) क्षमता का केवल 1 फीसदी पानी बचा है। 1.5 बीएमसी की क्षमता के साथ महाराष्ट्र में भीमा उज्जैनी जलाशयों एवं 6.8 बीएमसी भंडारण क्षमता के साथ आंध्र प्रदेश में नागार्जुनसागर खाली है।केंद्रीय जल आयोग की रिएसेसमेंट ऑफ वॉटर रिसोर्सेस पोटेशियल ऑफ इंडिया 1993 की रिपोर्ट कहती है, “जनसंख्या में तेजी से वृद्धि व आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि से उपलब्ध जल संसाधनों पर जबरदस्त दबाव पड़ रहा है।” पहले भी रिपोर्ट्स में बताया है कि किस तरह विश्व में भूजल संकट गहरा रहा है व भारत में आधे से अधिक भूजल, जो चीन की तुलना में 37 फीसदी अधिक ताजा पानी का उपयोग करता है, दूषित है। ग्रामीण भारत गाँव सहित करीब 17 लाख बस्तियों में रहता है, जिसमें से तीन-तिहाई को सभी उपयोगों के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी का 40 लीटर पानी मिलता है। इसमें पीने का पानी व अन्य उपयोग जैसे कि स्नान, कपड़े धोने, बर्तन और स्वच्छता शामिल है।भारत में 66,093 ग्रामीण बस्तियां हैं, जहां पीने के पानी के स्रोत में आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट, लोहा और लवणता जैसे रसायनों से दूषित है हालांकि, पिछले दो वर्षों में यह 84,292 से नीचे है। कृषि और उद्योग दोनों पानी के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। वहीं गन्ने के खेतों में ज्यादा जल का प्रयोग भारतीयों को अन्य तरीकों से प्रभावित करता है जैसे की बिजली उत्पादन इत्यादि में। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में कम पानी के स्तर के कारण नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशनस फरक्का कोयला आधारित संयंत्र को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसका प्रभाव झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कटौती के रूप में हुआ है। महाराष्ट्र में परली व कर्नाटक में रायचूर और शारावती में भी बिजली उत्पादन को इस प्रकार के बंद का सामना करना पड़ रहा है। जल संकट के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक में सक्षम शक्ति से आधा बिजली उत्पादन हो रहा है।(वाघमारे इंडियास्पेंड के साथ विश्लेषक हैं। ये उनके अपने विचार हैं।)

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