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जलवायू परिवर्तन से निपटने के लिए किसानों की मदद करेगा विश्व बैंक

जलवायू परिवर्तन से निपटने के लिए किसानों की मदद करेगा विश्व बैंकGaon Connection

लखनऊ। प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि पर भी पड़ा है, जिसे बढ़ाया जा सकता है। कृषि क्षेत्र में कृषि यंत्रीकरण बढ़ा कर कटाई-मड़ाई और उचित भण्डारण से किसानों की आमदनी बढ़ायी जा सकती है। प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीर कुमार ने कहा।

कृषि उत्पादन आयुक्त विश्व बैंक के सहयोग से चलाई जाने वाली दो विशेष परियोजनाओं के लिए आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम में विश्व बैंक के साउथ एशिया के प्रबंधक मार्टिन वान न्यूकूप और विश्व बैंक द्वारा प्रदेश में चलायी जा रही सोडिक तृतीय परियोजना के टीम टास्क लीडर रंजन सामंत्रे भी मौजूद थे।

प्रस्तावित पहली परियोजना यूपी डास्प द्वारा तैयार की गयी यूपी कृषि प्रतिस्पर्धा परियोजना है। यह परियोजना 2616 करोड़ रूपये की होगी जो प्रदेश में बुन्देलखण्ड सहित 42 जि़लों में संचालित किया जाना है। प्रस्तावित परियोजना के अन्तर्गत प्रदेश के 42 जनपदों में बाजार आधारित उत्पादकता एवं वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए विपणन सम्बन्धी ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने का कार्य किया जायेगा।

दूसरी परियोजना उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम द्वारा तैयार की गयी बंजर भूमि प्रबंधन और सतत कृषि परियोजना है। यह परियोजना 1406 करोड़ रूपये की होगी जिसे 25 जि़लों में संचालित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम द्वारा प्रस्तावित परियोजना में मृदा स्वास्थ्य सुधार, समस्याग्रस्त भूमि का उपचार कर कृषि क्षेत्र में उत्पादकता वृद्वि और विपणन की उन्नत प्रणालियां लागू कर किसान उत्पादन समूहों के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रयास किया जायेगा। साथ ही जलवायु परिवर्तन से हो रही क्षति से फसलों को बचाने के लिए क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर को बढ़ावा दिया जायेगा।

कृषि उत्पादन आयुक्त महोदय द्वारा विश्व बैंक के अधिकारियों से अपील की गयी कि प्रदेश के लिए उपर्युक्त दोनो परियोजनाएं प्रदेश के लघु एवं सीमान्त कृषकों की आमदनी बढ़ाने, कृषि के स्थायित्व व आर्थिक विकास के लिए आवश्यक हैं, जिसके दृष्टिगत विश्व बैंक को इन दोनों परियोजनाओं की 

स्वीकृति पर विचार करना चाहिए। विश्व बैंक के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तावित उपरोक्त दोनों परियोजनाओं की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया गया कि उक्त प्रस्तावित परियोजनाओं को विश्व बैंक से स्वीकृत कराने के लिये पूर्ण प्रयास किया जायेगा।

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