जोड़-तोड़ से जमीन बनाने में जुटे प्रत्याशी

जोड़-तोड़ से जमीन बनाने में जुटे प्रत्याशीगाँव कनेक्शन

इटवा (सिद्धार्थनगर)। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में बीडीसी व जिला पंचायत के बाद अब ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्यों का चुनाव शेष बचा है। ग्राम प्रधानी चुनाव जीतने के लिये प्रत्याशियों ने जोड़-तोड़ से अपनी जमीन बनानी शुरू कर दी है। 

इस बार ग्राम पंचायतों की संख्या बढऩे के साथ-साथ ग्राम प्रधान पद के उम्मीदवारों की संख्या भी बढ़ी है। इटवा विकास खण्ड में 101, खुनियांव विकास खण्ड में 117 ग्राम प्रधान बनेंगे। इस प्रकार पूरे जिले में 1199 नये ग्राम प्रधान चुन कर आयेंगे। एक आंकड़े के मुताबिक प्रत्येक ग्राम पंचायतों में कम से कम पांच प्रत्याशी ग्राम प्रधान के लिये अपनी किस्मत आजमायेंगे। इस प्रकार अब की बार पूरे जिले में कम से कम 6000 ग्राम प्रधान पद के प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की सम्भावना है। कुछ प्रत्याशी निर्विरोध भी चुने जा सकते हैं। वैसे प्रत्येक ग्राम पंचायत से वर्तमान ग्राम प्रधान के अलावा नये-नये चेहरे प्रधान पद के दावेदार दिखाई पड़ रहे हैं। जहां आरक्षण की वजह से कुछ दावेदारों का पत्ता साफ  हुआ है। वह अब अपने समर्थकों को उम्मीदवार बना कर ग्राम प्रधानी चुनाव जीतना चाहते हैं। ग्राम प्रधान पद के नये दावेदारों का चुनाव जीतने का हथकंडा भी एकदम नया है।

'अर्जक संघ' के पूर्व जिला संयोजक (35 वर्ष) रवि प्रताप चौधरी का कहना है, ''प्रत्याशी चुनाव में अंधा-धुंध पैसा खर्च करेंगे तो जीतने के बाद सबसे पहले वह अपने खर्च को निकालेंगे। गांव का विकास नहीं होगा। बड़े-बड़े घोटाले जरूर होंगे। लोगों को प्रत्याशियों से विकास और सिर्फ विकास की लालसा रखनी चाहिये। हम सब की यही मांगें होनी चाहिये कि कौन सा प्रत्याशी गांव का अधिक से अधिक विकास करेगा। यदि हम वोट के बदले पैसा लेने की दलदल में फंस गये तो 21वीं सदी के आधुनिक भारत का सपना साकार होने के बजाये और पीछे चले जायेंगे।"

इस तरह करते हैं आवभगत

इस समय लोग अपने वोटरों की जमकर आवभगत करते दिखाई पड़ते हैं। होटलों पर चाय पिलाने की बात तो आम हो चुकी है। हर प्रत्याशी लोगों को होटलों पर चाय-पान खिला-पिला कर उनसे नजदीकी बढ़ाने का प्रयास करता है। चर्चाएं तो  यहां तक हैं कि कुछ प्रत्याशी लोगों को मोटर साइकिल देने तक की बातें सोच रहे हैं। वोट पाने के लिये कुछ प्रत्याशी लोगों को आने-जाने के लिये अपनी चार पहिया वाहन प्रयोग करने की सुविधा दे रहे हैं। कुछ अपनी ट्रक्टर ट्राली दे कर सेवा करते हैं। लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिये प्रत्याशी लोग जरूरतमंदों को दवा या अन्य जरूरत के लिये नकदी भी देकर सेवा करते हैं। इन सब सेवाओं के अलावा दारूबाजों के लिये दारू भी देते हैं। सभी जागरूक वोटर प्रत्याशियों के मतदाता वात्सल्य को देख कर दंग हैं। वोटरों की मानें तो अभी चुनाव प्रक्रिया का खर्च, प्रचार का खर्च सब कुछ बाकी है। प्रत्याशी अपने प्रतिद्वन्द्वी को पछाडऩे के लिये कितना कितना पैसा ख़र्च करेंगे इसका अनुमान लगा पाना कठिन है। 

रिपोर्टर- निसार अहमद खां/कृष्णलाल यादव

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