कानपुर में हर महीने सामने आ रहे हैं एड्स के 50 मामले

कानपुर में हर महीने सामने आ रहे हैं एड्स के 50 मामलेगाँव कनेक्शन

कानपुर। एचआईवी किस कदर अपने पैर तेजी से पसार रहा है इसकी बानगी उस समय सामने आई जब कानपुर के एआरटी सेंटर में हर महीने पचास से अधिक मरीज एचआईवी पीड़ितों के आने का मामला आने आया।

सरकार और कई सारी प्रइवेट संस्था समय-समय पर लोगों को एचआईवी के लिए जागरूक करती रहती है। फिर भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। 

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एआरटी सेंटर में एचआईवी के दस गंभीर मरीज मिले हैं जिन पर एचआईवी की फस्ट लाइन दवाएं बेअसर हो गई हैं। ऐसे मरीजों का डॉक्टरों का पैनल चेकअप करेगा। संक्रमण के स्तर का पता लगाने को बीएचयू में वायरल लोड टेस्ट कराने के बाद ही सेकेंड लाइन ट्रीटमेंट शुरू होगा। 

हैलट के संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) के एंटी रिट्रोवायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर को यूपी स्टेट एड्स नियंत्रण सोसाइटी (यूपी सेक) ने एआरटी प्लस सेंटर बनाया है। अब यहां एचआईवी संक्रमित गंभीर मरीजों का सेकेंड लाइन ट्रीटमेंट होगा। 

अभी तक गंभीर मरीज इलाज को लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) भेजे जाते थे। एआरटी प्लस सेंटर बनने के बाद से यहां एचआईवी के दस गंभीर मरीज चिह्न्ति हुए हैं। उन पर फस्ट लाइन की दवा बेअसर है। उनका सीडी-4 काउंट 300 से नीचे आ गया था। छह-छह माह के अंतराल में हुई जांच में इसका पता चला है।

इससे पूर्व मार्च माह में एचआईवी संगठन नाको की ओर से चलाए गए अभियान में सामने आया था जिला जेल में एक महिला समेत 14 कैदी नए एचआईवी पॉजीटिव मिले थे। वर्तमान में कुल 25 कैदी एचआईवी पॉजीटिव जेल में हैं। एआरटी सेंटर के डेटा मैनेजर अनूप शुक्ला बताते हैं कि हर माह करीब साठ से सत्तर मरीज एचआईवी पॉजीटिव के सामने आते हैं।

परीक्षण के लिए बनाया गया डॉक्टरों का पैनल

एचआईवी के चिन्हित मरीजों के परीक्षण को विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल बनाया गया है। इसमें टीबी एवं चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार, बालरोग के विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव, मेडिसिन विभाग के डॉ. आरके वर्मा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉ. सीमा द्विवेदी एवं एआरटी सेंटर के परामर्शदाता डॉ. चमन कुमार हैं वहीं यूपी सेक के एक प्रतिनिधि लखनऊ से आएंगे।

पहले चरण में बुलाए तीन मरीज

एआरटी प्लस सेंटर में गंभीर एचआईवी संक्रमित तीन-तीन मरीजों को बुलाकर चेकअप करेंगे। पहले दिन सोमवार को तीन मरीज बुलाए गए हैं, उसमें कानपुर, फतेहपुर एवं उन्नाव जिले के हैं। 

हर साल देश में सवा लाख लोग हो रहे संक्रमित

भारत सरकार के 2011-2012 के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल तकरीबन 1.16 लाख लोग एचआईवी के संक्रमण के चपेट में आ रहे हैं जिनमें 1,09,74 लोग वयस्क हैं जबकि 19346 लोगों की उम्र 15 वर्ष से अधिक है। हालांकि यह संख्या पिछले वर्ष की अपेक्षा कम है लेकिन फिर भी जिस तरह से संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं वह चिंता का विषय है। 

एआरटी प्लस सेंटर से जुड़े हैं सात जिले

कानपुर नगर, देहात, उन्नाव, फतेहपुर, हमीरपुर, कन्नौज, फर्रुखाबाद। वहीं गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब उत्तराखंड़ में हर साल 3000 से 7000 एचआईवी संक्रमण के मरीज सामने आते हैं। बाकी अन्य राज्यों में तीन हजार से कम संक्रमण के मामले हर साल सामने आते हैं।

एड्स से मौतें

एड्स से मरने वालों की संख्या पर नजर डालें तो वर्ष 2011 में एड्स से संबंधित बीमीरी से 1.48 लाख लोगों की मृत्यु हो गई जिनमें सात फीसदी बच्चे थे। वहीं अगर 2007 से 2011 के आंकड़ों पर नजर डाले इस एचआईवी संक्रमण से हर साल मरने वाले लोगों में 42 फीसदी की कमी आई है।

रिपोर्टर - राजीव शुक्ला

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