कैराना पलायन मामले में अपने बयान से पलटे भाजपा सांसद

कैराना पलायन मामले में अपने बयान से पलटे भाजपा सांसदgaonconnection

मुजफ्फरनगर। भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने आज कैराना मामले में यू-टर्न लेते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना से हिंदुओं का पलायन सांप्रदायिक मुद्दा नहीं है बल्कि इसका कानून व्यवस्था की स्थिति से अधिक लेना देना है और जिन परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े उनकी संख्या 400 से 500 तक हो सकती है।

कैराना सांसद ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह सांप्रदायिक घटनाओं का मामला नहीं है, यह हिंदुओं या मुस्लिमों की बात नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि इसका कानून व्यवस्था की स्थिति से ज्यादा लेना-देना है।

सिंह ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि जो लोग घर छोड़ गए उनकी सूची और बढ़ सकती है, यह 400 से 500 तक पहुंच सकती है। आरोपी एक नहीं है (जिसने लोगों को पलायन पर मजबूर किया), उनकी संख्या दर्जनों में है।’’ उन्होंने पहले कहा था कि आरोपियों के नाम देखकर समझा जा सकता है कि ये लोग कौन हैं, इस तरह से उन्होंने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की कथित संलिप्तता की ओर इशारा किया था।

सिंह ने पहले 346 परिवारों की सूची जारी कर कहा था कि इन्हें इस कस्बे को छोड़ने पर मजबूर किया गया जहां 85 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है। 2013 में सांप्रदायिक दंगे देखने वाले शामली जिले में कैराना कस्बा पड़ता है। हुकुम सिंह ने आज 63 हिंदू परिवारों की एक और सूची जारी की और दावा किया कि उन्हें शामली जिले के कांधला कस्बे को छोड़कर जाना पड़ा। उन्होंने दावा किया, ‘‘इन हिंदू परिवारों को दबाव में घर छोड़ने पड़े।’’ जब पूछा गया कि कुछ मुस्लिम परिवार भी इलाका छोड़कर गए तो उन्होंने कहा, ‘‘अन्य लोग दूसरी वजहों से गए।’’  हालांकि शामली के जिला मजिस्ट्रेट सुजीत कुमार ने इलाके से कुछ लोगों के घर छोड़ने के पीछे किसी तरह के सांप्रदायिक और कानून व्यवस्था के कारण की संभावना को खारिज कर दिया।

कुमार ने कहा, ‘‘अभी तक हम 119 परिवारों की सूची की जांच कर चुके हैं। सूची में लिखे करीब 10 से 15 परिवार अब भी कैराना में रहते हैं और तकरीबन 68 परिवार 10-15 साल पहले इलाका छोड़ गए थे। वे आर्थिक वजहों से गए। अभी तक हमें कोई मामला नहीं मिला जहां कानून व्यवस्था की समस्या रही हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कोई सांप्रदायिक गतिविधि नहीं रही। कैराना कस्बा हमेशा से शांतिपूर्ण रहा है। 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय इलाका शांतिपूर्ण रहा और 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान भी यहां के लोगों ने भाईचारे का मजबूत संदेश दिया।’’ 

इलाहाबाद में भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा के शीर्ष नेताओं ने कैराना से हिंदुओं के कथित पलायन का मुद्दा उठाया था और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सपा सरकार पर हमला किया था।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अपने भाषण में कहा था, ‘‘कैराना में हिंसा की वजह से हो रहा पलायन गंभीर चिंता का विषय है। हिंसा का माहौल है, भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विकास और शासन की कमी गंभीर चिंता का मामला बन रही है।’’ पार्टी ने एक समिति का भी गठन किया जो कैराना जाएगी और हालात का अध्ययन करेगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा नेताओं पर इस मुद्दे पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह चाहते हैं कि भाजपा बेहतर काम करे। उन्होंने कल संवाददाताओं से कहा था, ‘‘भाजपा आरोप लगा रही है कि सपा सरकार ने लोगों को कैराना छोडने पर मजबूर किया। भाजपा इस हद तक बेईमान हो सकती है।’’ जिला मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘‘हमें मीडिया की खबरें मिली हैं कि भाजपा यहां एक तथ्यान्वेषी समिति भेज रही है लेकिन हमें अभी तक लिखित में कोई सूचना नहीं मिली है. एक दल आ सकता है और अपनी जांच कर सकता है, हमें उसमें कोई आपत्ति नहीं है।’’ 

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