कैराना से पलायन की वजह धर्म या अपराध?

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गाँव कनेक्शन नेटवर्ककैराना (शामली)। कैराना के सरावधान मोहल्ले में रहने वाले सूर्य कुमार ने अन्य कई घरों की तरह ही अपने घर की दीवार पर लिख रखा है, “यह मकान बिकाऊ है”। वे अपना मकान बेचकर कैराना से बाहर जाना चाहते हैं।

सूर्य कुमार बताते हैं, “मैं तो घर अपने आपसी विवाद के चलते बेंच रहा हूं, लेकिन उसमें भी नेता नगरी आ गए हैं। दूसरा, यहां का माहौल बहुत खराब है। दिनदहाड़े गोली चलती हैं, पुलिस अधिकारी ध्यान नहीं देते।” कैराना, दिल्ली के उत्तर में लगभग 100 किमी दूर यूपी के शामली में स्थित है।

सूर्य कुमार अकेले नहीं कैराना के बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने दावा किया कि कैराना में रहने वाले “346 हिंदू परिवार मुस्लिमों के खौफ” की वजह से पलायन कर चुके हैं। हुकुम सिंह ने तथाकथित धार्मिक आधार पर पलायन करने वाले इन परिवारों की एक लिस्ट भी जारी की है। सांसद द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी सरकार से चार हफ्ते में इस मामले में रिपोर्ट भी मांग दी है। आयोग ने स्वयं अपने डीजीपी को भी मौके पर जाकर जांच करने का आदेश दिया है।

लेकिन कैराना के कई लोगों के बयानों के अनुसार कैराना को छोड़कर जाने के ‘धार्मिक कारण’ नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था मुख्य वजह है। “कुछ समय पहले असामाजिक तत्वों द्वारा शहर का माहौल खराब किया गया था, लेकिन यह जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन की है। जिस भी परिवार ने कैराना से पलायन किया है, वह बढ़ते अपराध की वजह से किया है”  कैराना में रहने वाले वकील मो. इंतजार ने कहा। मो. इंतजार ने आगे कहा कि लेकिन नेताओं को यहां हिंदू-मुस्लिमों के दिल में अपने फायदे के लिए जहर नहीं घोलना चाहिए। 

कैराना से पलायन कर चुके एक कारोबारी ने बताया, “तीन साल पहले रंगदारी के लिये फोन आना शुरू हुये। रंगदारी नहीं देने पर धमकियां मिलनी शुरू हो गईं। परिवार की सुरक्षा के लिये कैराना छोड़ दिया।” उन्होंने आगे कहा, “घर दुकान कैराना में ही हैं, वहां जमीन खरीदने तक के लिये कोई तैयार नहीं है।”

पालायन की बात से सहारनपुर रेंज के डीआईजी एके राघव ने इंकार करते हुए जांच करने की बात कही। कैराना में अपराध और व्यापारियों की सुरक्षा के मुद्दे पर डीआईजी कुमार ने कहा, “कैराना में मुकीम गैंग का खौफ बताया जाता है लेकिन मुकीम गैंग के चार बदमाश मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं जबकि 25 जेल में बंद हैं। उनको जनपद की दूसरी जेलों में स्थानांतरित कराया गया है, जितनी कार्रवाई मुकीम गैंग पर हुई, उतनी किसी गैंग पर नहीं हुई है। इसके अलावा जनपद में 17 लोगों को पुलिस सुरक्षा भी प्रदान की गई है।” 

यहां वरिष्ठ शिक्षक संजीव गोयल बताते हैं, “ढाई साल पहले दिनदहाड़े की गई हत्याओं से नगर में दहशत का माहौल व्याप्त हुआ है, जिस कारण सभ्य लोग शहर से निकलने का मन बनाकर योजनापूर्ण पलायन कर रहे हैं। प्रशासन को कैराना से गये लोगों को वापस लाने की पहल करनी चाहिये।” 

वहीं जिलाधिकारी सुजीत कुमार तथा एसपी विजय भूषण ने मामले में जांच बिठा दी है। पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारी कैराना में घर-घर जाकर मामले की छानबीन कर रहे हैं। कैराना के मुद्दे पर से भाजपा भी अपना राजनैतिक प्रतिनिधित्व नहीं खोना चाहती। प्रदेश भाजपा ने एक जांच दल का गठन किया है जो 15 जून को कैराना पहुंचेगा।

सत्ताधारी समाजवादी पार्टी का कहना है कि बीजेपी यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले माहौल खराब करने में जुटी है। कांग्रेस ने भी कैराना मामले को “हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण” की भाजपा की कोशिश करार देते हुए जांच की मांग की।

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