कैसे होगी बिटिया की शादी?

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बहराइच। गन्ना किसानों का करोड़ों रूपये चीनी मिलों पर बकाया है, जिससे मिलों का चक्का थम गया है। जिले की चार चीनी मिलों में से तीन ने अपने पेराई सत्र के बाकायदा समापन की घोषणा कर दी है।

सहकारी क्षेत्र की नानपारा चीनी मिल ही किसानों का गन्ना खरीद रही है। गन्ने की फसल बेचकर घर में शादी ब्याह निपटाने की उम्मीद हो या बच्चों का अच्छे स्कूल में एडमीशन दिलाने का सपना, चीनी मिलों का गन्ना मूल्य भुगतान का रवैया किसानों के इन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सूखे की मार से प्रभावित खेती किसानी को गन्ने के बल पर सुधारने की तरकीब भी बिखरती नजर आ रही है। गन्ना किसानों का लगभग 186 करोड़ रुपया चीनी मिलों का बकाया है। चीनी मिलों के बंद हो जाने से बकाया भुगतान को लेकर किसानों मे उहापोह की स्थिति बनी हुई है। जिले में गन्ना पेराई सत्र दिसंबर महीने से शुरू हो जाती है।

किसानों से गन्ना खरीदने के लिए जिले में 110 क्रय केंद्र बनाए गए थे। चिलवरिया चीनी मिल ने 52, परसेंडी में 30, जरवल बोर्ड ने आठ व नानपारा चीनी मिल ने 30 क्रय केंद्रों के माध्यम से गन्ना खरीदा। इनमें से चिलवरिया 28 फरवरी को, जरवलरोड चीनी मिल छह मार्च को व परसेंडी चीनी मिल 29 मार्च को पेराई समाप्ति की घोषणा कर चुकी हैं। 

शासन ने चीनी मिलों की मांग पर 230 रुपये प्रति क्विटल की दर से मूल्य का भुगतान चालू सीजन में व 50 रुपये प्रति क्विटल का भुगतान मिल बंद होने के बाद भुगतान करने की अनुमति दे दी। बावजूद इसके पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक चारों चीनी मिलों पर एसएपी की दर से 186.20 करोड़ रूपये बकाया चल रहा है। नकदी समझी जाने वाली गन्ना फसल के लंबित मूल्य भुगतान के चलते किसानों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल होती जा रह है।

शादी-विवाह के कार्यक्रमों को निपटाना हो या खेती की दूसरी जरूरतें गन्ने की फसल के बल पर संजोए गए किसानों के अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। विकासखंड चित्तौरा के इटकौरी गाँव के गन्ना किसान कमल कहते हैं, “गन्ना को नगदी फसल मानकर सालों से इसकी खेती करते आ रहे हैं, लेकिन अब जरूरत के समय चीनी मिल गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं कर रही है। इससे घर का बजट गड़बड़ा गया है। दूसरी फसलों की बोआई भी ठीक ढंग से नहीं कर पा रहे हैं।” सगीर अहमद बताते हैं, “मिल को गन्ना बेंचकर जरूरत के वक्त पैसा मिलना संभव नहीं दिख रहा है। ऐसे में तमाम दिक्कते आ रहीं हैं।” नानपारा के गन्ना किसान राजू कहते हैं, “मिलों की लापरवाही से अब किसान गन्ने की खेती से भाग रहे हैं। पैसे न मिलने के कारण हम अपने बच्चों का नए स्कूल में दाखिला नहीं करा पा रहा हूं।”

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