कौशाम्बी बन रहा केले का सबसे बड़ा उत्पादक

कौशाम्बी बन रहा केले का सबसे बड़ा उत्पादकgaoconnection

मंझनपुर (कौशाम्बी)। अमरुद के लिए मशहूर, इलाहाबाद और फतेहपुर से अलग हुए नए जिले कौशाम्बी के किसान अब केले की खेती से लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। महाराष्ट्र के भुसावल के बाद अब यहीं पर सबसे ज्यादा केले की खेती हो रही है।

कौशाम्बी जिला मुख्यालय से लगभग 19 किमी पश्चिम दिशा में चायल विकास खण्ड के सिहोरी कचर गाँव जिसके बगल से गंगा होकर के गुजरती हैं वहीं से केले के खेत शुरू हो जाते हैं। दूर-दूर तक अमरुद की बाग के साथ ही केले की खेती दिखाई देती है। किसान गेहूं, धान की साथ ही केले की खेती कर रहे हैं और धान, गेहूं से दो तीन गुना ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

सिहोरी कचर गाँव के मोहम्म्द मुकर्रम ने पिछले कई वर्षों से केले की खेती कर रहे हैं और साल में लाखों रुपए की आमदनी कर लेते हैं। मोहम्मद मुकर्रम बताते हैं, “हमारे यहां कई वर्षों से केले की खेती हो रही है, मेरे अब्बा ने 2002 में सबसे पहले केले की खेती की शुरुआत की थी। हम लोग केले के पौधे महाराष्ट्र के भुसावल से लाते हैं।” वो आगे बताते हैं, “गाँव के ही कई लोग मिलकर एक साथ केले के पौधें लाते हैं, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं होता है।”

मोहम्मद मुकर्रम ने इस बार 28 बीघा में केला लगाया है। उनके गाँव के लगभग 30 किसानों ने केला लगाया है। मोहम्मद मुकर्रम बताते हैं, “एक बीघे में लगभग 60-70 हजार की लागत आती है अगर मौसम ने साथ दिया तो एक बीघे में 30-40 हजार का मुनाफा हो जाता है।” वो आगे बताते हैं, “पहले 17-18 महीने में फसल तैयार होती थी, लेकिन टिश्यू कल्चर की 12-13 महीने में तैयार हो जाती है।”

यहां के किसान श्रीवंती, टिश्यू कल्चर, जी9 जैसी प्रजातियों के पौधे लगाते हैं जो कम समय में तैयार होती है और ज्यादा मुनाफा देती है।केले में मुनाफा तो है, लेकिन मेहनत भी बहुत होती है। समय समय पर उसकी छटाई होती है, अगर छटाई न हो तो बगल से निकले पौधे पुराने पौधे को दबा देते हैं।कौशाम्बी के जिला उद्यान अधिकारी पंकज शुक्ला बताते हैं, “इस समय कौशाम्बी जिले में लगभग ढाई हजार हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है और ये हर साल बढ़ती ही जा रही है। सबसे पहले 1997 में जिले में केले की खेती की शुरुआत हुई थी। यहां से फतेहपुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, दिल्ली, चित्रकूट तक केले जाते हैं।”

हर वर्ष उद्यान विभाग की तरफ से किसानों को केले के टिश्यू कल्चर पौधे मुफ्त में दिए जाते हैं, जिला उद्यान अधिकारी पौधे मिलने के बारे में कहते हैं, “हमारी तो पूरी कोशिश रहती है कि पौधों के आने में देरी न हो, हैदराबाद और गुजरात के सप्लार्यस को समय से भुगतान कर दिया जाता है, वहीं से पौधे आते हैं।” मंझनपुर विकास खंड के फरीदपुर गाँव के मिथिलेश मौर्या भी केले की खेती कर रहे हैं इस बार उन्होंने लगभग 25 बीघा खेत में केला लगाया है। मिथिलेश मौर्या बताते हैं, “इससे हमें काफी मुनाफा हो रहा हैं।”  

जिला मुख्यालय से लगभग 27 किमी उत्तर दिशा में सिराथू विकास खंड के पहाड़पुर में भी छोटे स्तर पर खेती शुरू हो गई है। पहाड़पुर के किसान रामचन्द्र सिंह बताते हैं, “अब हमारे यहां भी लोगों ने केला लगाना शुरू कर दिया है लेकिन अभी कुछ ही किसानों ने, धीरे-धीरे और भी केला किसान बढ़ जाएंगे।”किसानों को फसल बेचने में कोई दिक्कत नहीं होती है व्यापारी खुद से आकर खेतों से केले खरीद ले जाते हैं। इसमें न तो मण्डी जाने की परेशानी होती है और न ही माल ढ़ुलाई का खर्च। माल की कीमत घर बैठे ही मिल जाती है।

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