कभी तालाब था, अब सिर्फ तलैया बची है

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टिकरी (कानपुर देहात)। कई गाँवों में जल स्तर बहुत नीचे चला गया है, जिसकी वजह से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समय से फसल की सिंचाई नहीं हो पाती क्योंकि ट्यूबेल पानी बीच में ही छोड़ जाते हैं। नहरों में समय से पानी आता नहीं है और जो गाँव के तालाब हैं उसमे लोगों ने मकान बना लिया हैं।

मैथा ब्लॉक से पूरब दिशा में 3 किलोमीटर दूर टिकरी गाँव है यहां पर रहने वाली विजय लक्ष्मी (65 वर्ष) बताती है कि हमारे समय ये तालाब रकबा संख्या 382/1.044,384/0.883 लगभग 8 बीघा में था। सन 1990 से गाँव के लोगों ने इस तालाब पर एक मकान से कब्ज़ा करने की शुरुवात हुई। आज इस तालाब की जगह में पूरी बस्ती बन गयी है, अब मुश्किल से 2 बीघा ही तालाब शेष होगा।

इसी गाँव में रहने वाले राकेश सिंह (60 वर्ष) बताते है कि पहले तालाब में पानी भरा रहता था तो आस-पास के खेतों की सिचाई बहुत आसानी से कर लेते थे, हमारी फसल सूख नहीं पाती थी, जबसे मकान बन गये हैं तब से ट्यूबेल भी सिचाई के दौरान पानी छोड़ देते है। फसलों को समय से पानी न मिल पाने की वजह से पैदावार नहीं होती, वैसे भी सूखा पड़ा है, जो संसाधन हैं भी उनका भी इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।

“अगर गाँव में कहीं आग लग जाये तो अब हमारे गाँव में कोई भी ऐसा तालाब नहीं बचा है जिससे उस आग को बुझाया जा सके। नल से पानी चलाकर जब तक बुझाएंगे तब तक पूरा गाँव जल जायेगा। गाँव के कुएं भी सूखे पड़े हैं, ये बताते हैं दिनेश सिंह ( 45 वर्ष)|

धन्नो सिंह(40 वर्ष) बताती हैं कि घंटो नलों पर खड़े रहना पड़ता है क्योंकि पानी चला जाता है, लोग कहते हैं बुन्देलखण्ड में सूखा पड़ा है हम तो कहते हैं कि हमारे गाँव में भी सूखा पड़ा है।

ग्राम प्रधान कृपाशंकर (40 वर्ष) का कहना है कि अब तालाब की जगह मकान बन ही गये है तो अब क्या हो सकता हैं, अगर गरीब लोगों के मकान गिराए जायेंगे तो फिर ये रहेंगे कहां|अभी जो तालाब बचा है उसी को और गहरा करायेंगे, गाँव में दो तालाब और हैं उसमे जल्द ही काम शुरू करवाएंगे।

जहां सरकार पूरी कोशिश में है कि ये तालाब बचाए जाएं, वहीं दूसरी तरफ इन तालाबों में सरेआम मकान बन रहे हैं और इन पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है और न ही अभी तक इन गाँवों में तालाब के नवीनीकरण का कार्य शरू नहीं हुआ है।

रिपोर्टर - शिखा सिंह

गाँव कनेक्शन डेस्क

सरस्वती विद्या महा विद्यालय

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