कच्ची शराब बनाने के धंधे में लिप्त सैकड़ों परिवार

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लखनऊ। कच्ची शराब बनाने वाले एक दिन पकड़े जाते हैं, दूसरे दिन छूटकर फिर से शराब बनाना और बेचना शुरु कर देते हैं। यहां के पुलिस को भी सब पता है, लेकिन कुछ नहीं करती है।

हरदोई जिला मुख्यालय से लगभग 39 किमी दूर संडीला तहसील के कछौना पतसेनी के ठाकुरगंज, नटपुरवा जैसे कई गाँवों के लोगों के दिन की शुरुआत कच्ची शराब से ही होती है। यहां पर आसानी से दस-पंद्रह रुपए में शराब मिल जाती है।

एक दिन पहले कच्ची शराब बेचने के जुर्म में पकड़े राज कपूर को के चेहरे से कहीं भी नहीं लगता की उन्हें पुलिस पकड़कर ले गयी थी। पीठ पर मार के निशान छिपाते हुए राज कपूर कहते हैं, “ये तो रोज का काम हो गया है, कोई कुछ नहीं कहता।

यहां की प्रमुख समस्या अवैध कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री ही है। युवा, बच्चे और बुजुर्ग सभी शराब के आदी हो रहे हैं। नटपुरवा के हर दूसरे घर में आपको आसानी से कच्ची शराब मिल जाती है। राज कपूर बताते है, “दस साल हो गए हमें शराब बनाते हुए, कितनी बार ही पुलिस ने पकड़ा होगा, लेकिन होता कुछ नहीं। 

राजकपूर अकेले नहीं है जो कच्ची शराब बनाते हैं, इन्हीं की तरह के सैकड़ों और भी महिलाएं और पुरुष शराब बनाकर अपने घर में ही बेचते हैं। बालामऊ के रहने वाले राम खेलावन (47 वर्ष) शराब के धंधे से परेशान हो गए हैं, राम खेलावन बताते हैं, "पहले ऐसा नहीं था, लेकिन पिछले कुछ साल में ये धंधा खूब चलने लगा है, सुबह-सुबह ही लोग शराब पी लेते हैं।“

वो आगे कहते हैं, "इसमें स्थानीय पुलिस की लापरवाही भी है, कच्ची दारू बेचने के कई अड्डे खुलेआम चल रहे हैं। जिन पर हर रोज हजारों रुपयों का कारोबार होता है।"

कछौना थाने के थानाध्यक्ष फोन पर ये पूछने पर कि वहां पर खुले आम कच्ची शराब बनती और बिकती आप लोग उस पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं करते हैं ? थानाध्यक्ष कहते हैं, "हां यहां पर मिलती है, तो आपको बतायी जाए कि क्या कार्यवाही होती है, वो बारह महीने बेचते हैं और बारह महीने पकड़े जाते हैं। शराब बेचने पर जो कार्रवाही होती है वही होती है।" इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया।

कच्ची शराब के कुटीर उद्योग के रूप में पनपने के कई कारण हैं। पहला कारण है कम लागत में भारी मुनाफे का होना। दूसरा, इस धंधे में प्रयोग की जाने वाली कच्ची सामग्री क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध है। कच्ची शराब बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी यहीं पर आसानी से मिल जाता है।

बालामऊ से लगभग 10 किमी दूर संडीला में एसएएफ यीस्ट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी हैं, जहां से शराब बनाने के लिए यीस्ट आसानी से मिल जाता है। डेढ़ सौ रुपये के आधा किलो के पैकेट से कई लीटर कच्ची शराब बन जाती है।

इस बारे में जिला आबकारी अधिकारी राजीव कुमार अग्रवाल कहते हैं, "कच्ची शराब बनाने और बेचने वाले लोगों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई होती है, पिछले डेढ़ महीने में तो विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। लेकिन इसमें कोई सजा नहीं होती है, जमानत लेकर दूसरे दिन ही छूट जाते हैं। महिलाएं पकड़ी जाती हैं और पुरुष भाग जाते हैं। इसमें कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव गया है, जिसमें ये कम से कम एक-डेढ़ महीने अंदर रहे फिर छूटे। वो आगे कहते हैं, "ये थाने कारण ही और बढ़ रहा है, हम जब जाते हैं, तो थाने से उन्हें पहले ही पता चल जाता है, वो बचकर भाग जाते हैं।"

शराबियों की वजह से यहां की लड़कियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। बालामऊ के ठाकुरगंज के जीतू सिंह कहते हैं, “यहां शराब इतनी सस्ती मिलती है कि लोग सुबह शाम पीकर घूमते रहते हैं, ये लोग पीकर गाली गलोच करते रहते हैं, जिससे हमारी लड़कियों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार हम लोगों ने इस बारे में शिकायत भी लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। वो आगे बताते हैं, “तीन चार महीने में आबकारी विभाग का छापा पड़ता है पुलिस भी आती है, लेकिन दूसरे दिन ही फिर से बनना शुरु हो जाता है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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