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कछौना के PHC में सात सालों से नहीं पहुंचे डॉक्टर

कछौना के PHC में सात सालों से नहीं पहुंचे डॉक्टरgaonconnection

कछौना (हरदोई)। सात वर्ष पहले गाँव में स्वास्थ्य केन्द्र बनना शुरू हुआ तो ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब इलाज के लिए कई किमी. दूर अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन सात वर्ष बीत जाने के बाद आज तक उसमें कोई डॉक्टर ही नहीं आया।

हरदोई जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी. दूर कछौना ब्लॉक के पुरवा गाँव में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से बनने से ग्रामीणों को इलाज की सुविधा नजदीक मिलने वाली थी। स्वास्थ्य केन्द्र बनकर तैयार भी हो गया। लाइट, पंखे, बेड और इलाज के काम आने वाले सभी उपकरण भी आ गए। लेकिन कोई डॉक्टर आज नहीं आया।

पुरवा गाँव के जगरूप कनौजिया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के बारे में बताते हैं, “अस्पताल बनने से आस-पास के दर्जनों गाँवों के लोगों को दूर इलाज जाने के लिए नहीं पड़ता। तत्कालीन ग्राम प्रधान छविनाथ मौर्य ने ये अस्पताल बनवाया था। इलाज की सारे सामान भी आ गए थे।

स्वास्थ्य विभाग हर वर्ष ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार के लिए के लिए करोड़ों रुपए खर्च करता है। कागज पर तो कई स्वास्थ्य केन्द्र चल रहे हैं, लेकिन असल में कभी खुले ही नहीं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की वेबसाइट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 5,000 डॉक्टरों की कमी है। गाँवों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए करीब 16,000 डॉक्टरों की आवश्यकता है, जबकि विभाग के पास सिर्फ 11,000 ही हैं।

अभी प्रदेश मौजूदा स्वास्थ्य केंद्रों में ही डॉक्टरों की कमी नहीं पूरी कर पा रहा है जबकि प्रदेश में 1500 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के अनुसार उत्तर प्रदेश में 5,172 पीएचसी की ज़रूरत है, जबकि सिर्फ 3692 ही मौजूद हैं। वो आगे बताते हैं, “कुछ महीने के बाद जिन लोगों ने लाइट, पंखे लगाए थे, वही लोग सब निकाल भी ले गए। बाकी जो सामान बचा चोर उठा ले गए।”

ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने इसे शुरू कराने के लिए प्रयास नहीं किया। यहां के लोगों ने कई बार ब्लॉक और मुख्यालय पर प्रार्थनापत्र भी दिया। पुरवा की वर्तमान ग्राम प्रधान सुमन वर्मा बताती हैं, “हमसे पहले के ग्राम प्रधान ने बनवाया था, इसमें हम क्या कर सकते हैं। हमारी कोशिश रहेगी है की ये चलने लगे।” पूरे क्षेत्र को स्वास्थ्य लाभ दिलाने के उद्देश्य से बना एक मात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मात्र शोपीस बनकर रह गया है। खिड़की दरवाजे भी लोग उखाड़ ले गए हैं। स्वास्थ्य केन्द्र में बड़ी-बड़ी झाड़ियां और घास उग आयी है, उसमें जानवर चरते रहते हैं।

जगरूप कनौजिया कहते हैं, “गाँव में किसी को भी कुछ होता है, तो कछौना के सामूदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जाना पड़ता है। अभी कुछ दिन पहले इसकी फिर से रंगायी पोताई हुई, लेकिन सिर्फ बाहर-बाहर करके चले गए।”

स्वयं वालेंटियर: अमन सिंह

स्कूल: श्री जानकी प्रसाद इंटर कॉलेज

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क 

 

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