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केजीएमयू ट्रामा सेन्टर में कागज़ मुक्त इलाज की उड़ी धज्जियां

केजीएमयू ट्रामा सेन्टर में कागज़ मुक्त इलाज की उड़ी धज्जियांgaon connection

लखनऊ। केजीएमयू ट्रामा सेन्टर में कागज मुक्त इलाज की धज्जियां उड़ रही है, न तो मरीजों का रजिस्ट्रेशन आनलाइन हुआ और न ही डाक्टरों को पेन और कागज से मुक्ति मिली। केजीएमयू ट्रामा सेंटर के डिजिटल होने की खबर एक अफवाह बन कर ही रह गयी। 

आप को बताते चले बीते शुक्रवार को ट्रामा सेंटर में सेंट्रल पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया था जिसके अर्न्तगत मरीज का हर डाटा ऑनलाइन उपलब्ध होना था, लेकिन अब तक किसी भी डॉक्टर ने न तो मरीजों का रिकार्ड फीड किया और न ही नए कंप्यूटरों पर इन रिकॉडों को जांचने की जहमत उठाई गयी।

सीपीएमएस सिस्टम लागू करने के लिए आए नए कम्प्यूटर शोपीस बन कर रह गए। ट्रामा सेन्टर में सीपीएम सिस्टम लागू करने के लिए करोड़ों की लागत लगाकर लाए कम्प्यूटर मात्र शोपिस बनकर रह गए। दर्जनों कम्प्यूटरों को तो ट्रामा सेंटर में स्थापित भी कर दिया गया था। लेकिन इनमें मरीजों रिर्काड फीड हुआ न ही कंप्यूटरों पर इन रिकॉडों को जांचा गया।

करोड़ो रुपयें खर्च करने के बाद भी ट्रामा सेन्टर का काम अब भी मैनुअल पर ही चल रहा है। ट्रामा को डिजिटल करने का शायद केजीएमयू प्रशासन को भी आसान नहीं लग रहा। तभी तो कंप्यूटर की फीडिंग को छोड़ अभी भी मरीजों की समस्त जांचें मैनुअल ही हो रहीं हैं। अभी भी मरीज जांच फार्म भरवाकर ला रहे हैं, जिससे शुल्क जमा होता है और जांच होती है।

यदि यह सिस्टम लागू हो जाता तो मरीजों को बार-बार दवा पर्चा लेकर दौड़ना भागना नहीं पड़ता और सीपीएमएस सिस्टम लगाने का उद्देश्य था कि मरीजों के पंजीकरण से लेकर जांच और डॉक्टर द्वारा उपलब्ध इलाज के साथ दवाएं भी ऑनलाइन दर्ज की जा सकें।

इस सिस्टम से फायदा ये था कि मरीजों को जांच के लिए फार्म ले जाने की जरूरत नहीं थी। बल्कि पंजीकरण नंबर से ही जांच का शुल्क जमा हो जाएगा और उसी क्रम में सीटी, एक्स-रे या अन्य जांच भी जाएंगी। साथ ही रिपोर्ट के लिए भी नहीं भटकना पड़ता और इलाज करने वाले डॉक्टर को रिपोर्ट और इलाज सब ऑनलाइन ही उपलब्ध हो जाती है।

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