14 करोड़ किसानों में से सिर्फ ढाई लाख किसानों के खेत का किया जा सका परीक्षण, 2017 तक कैसे पूरा होगा मोदी का सपना

14 करोड़ किसानों में से सिर्फ ढाई लाख किसानों के खेत का किया जा सका परीक्षण, 2017 तक कैसे पूरा होगा मोदी का सपनापांच महीने का बचा समय, किसान के हाथ में मृदा स्वास्थ्य कार्ड का मोदी का सपना कैसे होगा पूरा

लखनऊ। देशभर में मिट्टी में रासायनिक तत्वों की असमानता को कम करने और किसानों की लागत घटाने के लिए चलाई गई मोदी सरकार की महात्वाकांक्षी 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना' की रफ्तार बहुत सुस्त हो गई है जिसका मुख्य कारण है राज्यों का इस योजना में कम रुझान।

कृषि मंत्रालयन ने हाल ही में इस योजना के देश भर के आंकड़ों का एक संकलन तैयार किया है। ऐसा करने का उद्देश्य था ये पता करना कि योजना कितनी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। लेकिन जो नतीजे सामने आए वो अत्यंत निराशाजनक थे।

आंकड़ों के अनुसार रबी की बुआई शुरू होने से पहले तक देशभर में लक्ष्य के पांचवे भाग से भी कम कार्ड बांटे जा सके हैं। किसान की ज़मीन से मिट्टी नमूने उठाने का काम अब रबी के बाद ही शुरू हो पाएगा। केंद्र द्वारा निर्धारित लक्ष्य पाने के लिए अब तक 90 प्रतिशत से ज्यादा कार्ड बांट दिए जाने चाहिए थे।

केंद्र सरकार ने लक्ष्य रखा था कि देशभर के 14 करोड़ किसानों को मार्च 2017 तक मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांट दिए जाएंगे। हालांकि अभी तक केवल दो करोड़ पचास लाख किसानों के खेत के नमूने लेकर परीक्षण किया जा सका है।

कहां पर अटकती रही है योजना

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार कुल लक्ष्य के लगभग 80 प्रतिशत नमूने इकट्ठा कर लिए गए हैं लेकिन उनमें से अभी महज़ 40 प्रतिशत का ही परीक्षण किया जा सका है। जहां तक बात किसानों के हाथ में कार्ड पहुंचाने की है तो केवल 19 प्रतिशत किसानों की ही कार्ड मिल सके हैं।

कौन से राज्य हैं अड़ंगा

कृषि मंत्रालय के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पंजाब, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरला जैसे राज्य किसानों के खेत से नमूने बटोरने में सबसे ज्यादा आलस दिखा रहे हैं।

मंत्रालय ने आंकलन में बताया कि पंद्रह राज्य ऐसे हैं जिन्होंने अपने कुल लक्ष्य का अभी तक मात्र 20-50 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा किया है। इनमें मध्य प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य भी शामिल हैं। तेईस राज्य ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने लक्ष्य के 30 प्रतिशत से भी कम कार्ड बांटे हैं।

कब हुई थी योजना की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने फरवरी 2015 में इस योजना की शुरुआत राजस्थान के गंगानगर से की थी। उन्होंने कहा था, "उर्वकर, अच्छी किस्म के बीज और ज्यादा पानी डालते रहना काफी नहीं है किसानों को अपनी मिट्टी की सेहत का ध्यान रखना चाहिए और ये पता रखना चाहिए कि क्या डालना है और कितनी मात्रा में डालना है"।

सरकार कितने रुपए कर चुकी खर्च

इस योजना पर सरकार अब तक 216.4 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। साथ ही देश भर में 449 नई मृदा टेस्टिंग लैब के निर्माण का पैसा भी जारी कर चुकी है।

हालांकि कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार केवल हिमांचल प्रदेश और नागालैण्ड ही ऐसे राज्य हैं जिन्होंने नई लैब बनाने के पैसों का इस्तेमाल किया है।

Share it
Top