श्री विधि से लगाए धान में डेढ़ से दो गुनी ज्यादा पैदावार

श्री विधि से लगाए धान में डेढ़ से दो गुनी ज्यादा पैदावारश्री विधि से धान की रोपाई।

देवेंद्र सिंह- कम्युनिटी रिपोर्टर (40 वर्ष)

शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)। लगातार कम होती बारिश के चलते पिछले कुछ वर्षों में देश के कई इलाकों में धान की पैदावार प्रभावित हुई है। ज्यादा सिंचाई खर्च के चलते किसानों का घाटा बढ़ता जा रहा था ऐसे किसानों के लिए श्रीविधि मुफीद साबित हुई है।

नेपाल की तराई में बसे पूर्वांचल के सिद्धार्थनगर जिले में खरीफ में धान मुख्य फसल है। लेकिन यहां भी कम बारिश के चलते पैदावार कम और घाटा बढ़ता जा रहा था। शोहरतगढ़ तहसील से लगभग सात किमी. दूर मेहनौली गाँव की उर्मिला (40 वर्ष) भी इससे परेशान थीं, लेकिन पिछले वर्ष उन्होंने श्रीविधि से धान लगाए। इससे उनके दस बिस्वा खेती में ही पहले जहां दो कुंटल धान होता था पिछले बार 5 कुंटल धान हुए और इस बार फिर उसी खेत में फसल लहलहा रही है।

छोटी जोत वाले किसानों के लिए मुफीद

उर्मिला बताती हैं, "मेरे पास कम जमीन है, जिसमें गेहूं और धान की फसल ही ले पाती हूं, लेकिन इतना पैदावार नहीं हो पाती है, जिससे खाने भर का भी निकल पाए। इसलिए दूसरों के खेत में मजदूरी भी करती थी।" वो आगे बताती हैं, "एक दिन की बात है कि मैं गाँव के ही एक किसान के खेत पर धान की रोपाई करने गई तो वहां देखा कि यह धान की रोपाई का तरीका कुछ अलग था। छोटे धान के पौधे एक निश्चित दूरी पर रोपा जा रहा था।"

ये देखकर उर्मिला ने किसान हरगोविंद उपाध्याय से इस बारे में पता किया। अगले दिन उन्होंने किसान विद्यालय में आने को कहा। सोहरतगढ़ एनवायरमेंटल सोसाइटी गाँव में किसान स्कूल चलाता है, जिसमें किसानों को कृषि संबंधित नयी-नयी जानकारियां दी जाती हैं।

उर्मिला बताती हैं, "अगले दिन किसान विद्यालय की वैठक में श्री विधि से धान की खेती करने के बारे में बताया गया। मैंने ध्यान से पूरी पद्धति को समझा और पिछले साल अपने खेत में श्री विधि से धान की रोपाई की।"

कम पानी और लागत में इस विधि से होती है बेहतर पैदावार

फसल तैयार होने पर उर्मिला ने पाया कि जिस खेत से मात्र दो कुन्तल धान पैदा होता था। उसी खेत में पांच कुन्तल धान पाकर उन्हें बहुत खुशी हुई। अब उन्हें साल भर का चावल मिल जाता है। अब गाँव में अन्य महिलाएं भी काफी प्रभावित है। महिला किसान समिति के वैठक में यह तय किया गया कि जिन सदस्यों के पास कम मात्रा में खेती है उन महिलाओं का अलग समिति का गठन किया गया है।

अब गाँव की सभी महिलाएं श्री विधि से खेती करती हैं। सभी महिलाओं ने खरीफ 2015 में श्री विधि से धान की खेती की और बेहतर उत्पादन प्राप्त किया। समिति में सभी महिलाएं एक दूसरे के खेत के कार्यों में सहयोग करती हैं जिससे उन्हे मजदूर की जरूरत नहीं रहती है। इस बार भी गाँव के 65 किसानों ने श्री विधि से धान लगाया है।

श्री विधि से से किसानों को कई लाभ मिलते हैं, जैसे की बीज की संख्या कम लगती है (एक एकड़ में दो किलो) और पानी भी कम लगता है। इस विधि में मजदूर भी कम ही लगते हैं। परंपरागत तरीके की अपेक्षा खाद एवं दवा कम लगता है, प्रति पौधे कल्ले की संख्या ज्यादा होती है, बालिगों में दानों की संख्या ज्यादा होती है, दानों का वजन ज्यादा होता है और दो गुना उपज होती है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

Share it
Top