17 साल का ये छात्र यू ट्यूब पर सिखा रहा है जैविक खेती के गुर

17 साल का ये छात्र यू ट्यूब पर सिखा रहा है जैविक खेती के गुरआर्य पुडोटा (17 वर्ष) यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से हजारों लोगों को जैविक खेती के बारे में बताते हैं।

लखनऊ। जिस उम्र में बच्चे खेलते हैं, पढ़ाई करते हैं, उस उम्र में बंगलुरु के आर्य पुडोटा (17 वर्ष) यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से हजारों लोगों को जैविक खेती के बारे में बताते हैं। उनमें खेती के प्रति रुचि 6 साल पहले ही आ गई थी। गाँव कनेक्शन से बात चीत में आर्य ने बताया कि 2011 में हमारे घर के पास जमीन खरीदी गई थी और ये विचार था कि उस जमीन को जैविक खेती के लिये तैयार करें।

इस काम को दादी और मम्मी ने शुरू किया जब मैने उनको खेती करते हुए देखा तो मैं भी उनकी हेल्प करने लगा। फिर धीरे-धीरे इस काम में दिलचस्पी भी लेने लगा। कुछ समय बाद पूरी खेती मैं ही संभालने लगा। जब मेरे आस-पास के लोग इस जैविक खेती को देखते थे तो वो आश्चर्यचकित हो जाते थे और वो भी चाहते थे कि वे जैविक खेती करें।

गाँव कनेक्शन से बात करते हुए आर्य ने बताया कि उनके पास जैविक खेती करने के लिये तरीका नहीं पता था। तब उन्होंने "माय ऑरगानिक फार्म" नाम से अक्टूबर 2014 में एक यू-ट्यूब चैनल लांच किया और जैविक खेती के बारे में कई चरणों में वीडियो डालना शुरू किया। उसका नतीजा ये हुआ लोगों के अच्छे कमेंट आना शुरू हुए आर्य लोगों को उनके सवालों का जवाब भी देते थे और खेती से जुड़ी सारी जानकारी वीडियो के जरिये लोगों को देते थे।

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आर्य ने बताया कि 6 जून 2015 को विश्व पर्यावरण के अवसर पर आर्य ने खेती के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये कंबोन पार्क में सुबह टहलने आने वालों को करीब 1000 हाईब्रिड टमाटर के पौधे नि:शुल्क दिये। इन पौधों को देने का मकसद था कि जैविक खेती की तरफ लोगों की दिलचस्पी बढ़े। आर्य बताते है कि जब मेरे दिये हुए पौधे बड़े हो गये तो लोगों ने उसकी फोटो मुझे व्हाट्सऐप की।

आर्य के मुताबिक मैनें कुछ स्कूलों में जाकर जैविक खेती के बारे में वहां के प्रबंधन तंत्र को इसकी जानकारी दी ताकि वो अपने छात्रों को इसके बारे में बता सकें। आर्य की इस पहल को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण से उन्हें मान्यता दी गई।

तीन कार्यक्रमों का किया आयोजन

आर्य ने बताया मैंने साल 2016 में तीन कार्यक्रमों का आयोजन किया। इसमें हमने ग्लोबल वार्मिंग के बारे में बताते हुए पहला आयोजन हैदराबाद के केबीआर पार्क में किया जहां उन्होंने लोगों को विभिन्न किस्मों के लगभग 700 पेड़ नि:शुल्क दिए। ये आयोजन तेलंगाना वन विभाग द्वारा प्रायोजित किया गया था। दूसरा अभियान स्वयं उनके क्षेत्र में था और इस कार्यक्रम में उनका उद्देश्य समाज के लोगों को पेड़ों के प्रति जागरूक करना था। आर्य ने बैंगलोर के निवासियों को लगभग 400 पेड़ दिये। तेलंगाना और कर्नाटक वन विभाग द्वारा इन सभी पेड़ो को सब्सिडी दी गई थी। जिसकी वजह से इनकी कीमत 4 से 5 रुपये के आस-पास होती थी।

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धीरे -धीरे जब लोगों के मन मेें जैविक खेती के प्रति जागरूकता पैदा हुई तो उनके सामने सबसे बड़ी समस्या थी उनको खेती के लिये कच्चा माल मिलना। गांव कनेक्शन से अपनी बात साझा करते हुए आर्य ने बताया फिर मैने एक किट बनाई जिसमें कोको पीट ब्लॉक(नारियल का पाउडर), नीम की खाद और कुछ सब्जियों के बीज होते है।

आर्य बताते है कि जुलाई के पहले सप्ताह में ये किट अमेज़न में उपलब्ध हो जायेगी जिसकी कीमत 149 रु. होगी। वैसे अभी हम अपने व्हाट्सऐप नंबर 8884642488 या फिर मेल आई डी www.myorganicfarm.net पर ऑर्डर ले रहे है। उन्होने बताया कि यू-ट्यूब पर लगातार वीडियो अपलोड हो रहे है अगर किसी को कोई भी जानकारी चाहिये वो वीडियो देखकर जानकारी ले सकता है।

गाँव कनेक्शन के पूछे गए सवाल पर कि यू-ट्यूब और इवेन्ट के लिये आय का श्रोत कहां से आता है के जवाब में आर्य ने बताया कि अभी वो अपने पास से ही पैसा लगा रहे है आगे जैसे -जैसे इसके माध्यम से लाभ कमायेंगे उन पैसों से और भी इवेंट कराये जायेंगे जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग जैविक खेती से जुड़ सके। पर्यावरण के प्रति उनके योगदान के लिये यूनाइटेड स्टेट्स ग्रीन बिल्डिंग काउंसलिंग द्वारा ग्रीन ऐप्पल डे ऑफ सर्विस— इंडिया अवार्ड 2015 के लिये बंगलुरु में उन्हें प्रथम स्थान मिला।

दिव्यांग बच्चों को भी सिखाते हैं जैविक खेती के बारे में

आर्य बताते है कि वो "प्रफुल्ल ऊर्जा" नाम की एक ऑर्गनाइजेशन के साथ काम करते हैं। ये ऑर्गनाइजेशन दिव्यांग बच्चों को योगा सिखाती है ।पिछले साल हमने ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर एक अभियान चलाया था जिसमें दिव्यांग बच्चों को एक-एक पौधा देकर उसको कैसे पानी देना है, कैसे खाद देनी है ये सारी जानकारी दी। ये काम कोई मुश्किल नहीं था और ये दिव्यांग बच्चों के लिये आय का जरिया भी बन सकता है।

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आर्य एक शौकीन पाठक होने के साथ-साथ वीडियो गेम और डिवेट(बहस) में भाग लेने का भी शौक रखते हैं। आर्य सुबह 5.30 पर उठ जाते हैं और अपनी पढाई व अन्य गतिविधियों के बीच संतुलन बनाये रहते हैं। इन सब के बावजूद हर रोज आर्य अपने खेतों को डेढ घंटे का समय जरूर देते हैं।

ये है आर्य का यू-ट्यूब चैनल

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