किसान सावधान! खेतों में लगाई आग तो नहीं मिलेगा कृषि योजनाओं का लाभ

किसान सावधान! खेतों में लगाई आग तो नहीं मिलेगा कृषि योजनाओं का लाभअगर कोई किसान अपने खेत में अपशिष्ट जलाता है तो उस पर प्रत्येक दो एकड़ पर 10 हजार रुपए का जुर्माना किया जाना है (फोटो: गाँव कनेक्शन)

लखनऊ। मशीन के जरिये गेहूं की कटाई और उसके बाद कृषि अपशिष्ट को खेत में ही जलाने वाले किसान सावधान हो जाएं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर कृषि विभाग पुलिस के सहयोग से किसानों से जुर्माना वसूलेगा।

दो बार जिस किसान पर जुर्माना लग गया उसको कृषि संबंधित सरकारी योजनाओं के लाभ मिलने पर प्रतिबंध लग जाएगा। खेतों में आग लगाए जाने से मिट्टी की गुणवत्ता पर लगातार असर पड़ रहा है। इसके साथ ही पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है। जबकि अपशिष्ट को पानी और यूरिया डाल कर खेत में सड़ाया जाए तो मिट्टी की उर्वरता 15 फीसदी तक बढ़ सकती है। कृष विभाग इसको लेकर अपने कर्मचारियों को मुस्तैद कर दिया है जो ऐसे किसानों को चेतावनी दे रहे हैं जो कटाई के बाद खेतों में आग लगा रहे हैं।

खेतों में डंठल को बारिश का पानी भरने के बाद अगर एक बार हल के जरिये पलट दिया जाए और उसके बाद में पानी भरा छोड़ा जाए तो कुछ समय में अपशिष्ट सड़ जाएगा। इसमें यूरिया डाल कर छोड़ दिया जाए तो मिट्टी की उर्वरा क्षमता 15 फीसदी तक बढ़ेगी। जमीन को जैविक खाद की आवश्यकता होती है। मगर किसान इसको खो रहे हैं।
डीके सिंह, जिला कृषि अधिकारी

पिछले साल अक्टूबर नवंबर में दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत में छाई धुंध का एक कारण खेतों में जलाया जाने वाला धान का अपशिष्ट था जिसके बाद में एनजीटी ने पूरे देश के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। इसमें अगर कोई किसान अपने खेत में अपशिष्ट जलाता है तो उस पर प्रत्येक दो एकड़ पर 10 हजार रुपए का जुर्माना किया जाना है। एक से अधिक बार जुर्माना लगने के बाद किसानों को कृषि योजनाओं के लाभ से वंचित किया जाएगा।

मशीनी कटाई है खेतों में आग लगाने वजह

पहले जब किसान हाथ से कटाई किया करते थे, तब ये स्थिति नहीं थी। खेत में बहुत कम ही डंठल (ठूठ) जमीन में बाकी रह जाती थी मगर जबसे कंबाइन हार्वेस्ट के जरिए कटाई शुरू करवाई गई है, तब से दिक्कत काफी बढ़ गई है। जल्द कटाई कराने की चाह में किसान मशीन का इस्तेमाल करता है। जमीन पर डंठल एक फुट तक रह जाता है जिसको अगली फसल लगाने के लिए साफ करना जरूरी होता है इसलिए आसान रास्ता किसान अपनाते हैं। वे खेतों में आग लगा देते हैं। कंबाइन हार्वेस्ट के साथ अगर भूसे की मशीन को लाकर डंठल से भूसा बना दिया जाए तो आग लगाने की नौबत भी नहीं आएगी।

मृदा संरक्षण अधिनियम तहत होगी कार्रवाई

एनजीटी के मानकों का पालन कराने के लिए कृषि विभाग मृदा संरक्षण अधिनियम 1936 के तहत एक्शन लिया है जिसमें जो भी किसान ऐसा करेगा उसको जुर्माना देना पड़ेगा। फिलहाल इस संबंध में कर्मचारियों को दिशा निर्देश दे दिए गए हैं। फिलहाल किसानों को जागरूक करने की कोशिश की जा रही है। अगर इसके बावजूद खेतों में आग लगाई गई तो कार्रवाई भी होगी।

खेत में डंठल सड़ाने से लहलहाएगी फसल

जिला कृषि अधिकारी डीके सिंह बताते हैं कि खेतों में डंठल को बारिश का पानी भरने के बाद अगर एक बार हल के जरिये पलट दिया जाये और उसके बाद में पानी भरा छोड़ा जाए तो कुछ समय में अपशिष्ट सड़ जाएगा। इसमें यूरिया डाल कर छोड़ दिया जाए तो मिट्टी की उर्वरा क्षमता 15 फीसदी तक बढ़ेगी। जमीन को जैविक खाद की आवश्यकता होती है मगर किसान इसको खो रहे हैं।

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