कृषि विशेषज्ञों की सलाह : इस महीने किसान निपटा लें खेती-किसानी के ये काम

इस समय किसान को मक्का, धान, अरहर जैसी फसलों की खेती के साथ ही पशुपालन, मछलीपालन पर खास ध्यान देना चाहिए।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह : इस महीने किसान निपटा लें खेती-किसानी के ये काम

ये महीना खरीफ की फसलों की तैयारी का सही समय होता है। प्रदेश के कई कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बैठक में मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह की पहली बैठक में बताया कि किसान इस हफ्ते कौन कौन से काम कर सकते हैं।
मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह की वर्ष 2018 की द्वितीय बैठक हुई। बैठक में कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर के मौसम एवं कीट वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय, इलाहाबाद के पादप प्रजनन व मौसम वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय, फैजाबाद के मौसम व पादप रोग वैज्ञानिक, केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिक, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग, वन विभाग, रेशम विभाग, उद्यान विभाग, इफ्को किसान संचार लिमिटेड के कन्टेन्ट इन्चार्ज व परिषद के अधिकारियों/वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

धान की खेती

  • लम्बी अवधि की धान की प्रजातियों की नर्सरी 30 मई तक अवश्य डाल दें।
  • उन क्षेत्रों में जहां खेत में पानी 50 से 100 सेमी. तक कम से कम 30 दिन भरा रहता है रोपाई के लिए जल लहरी व जलप्रिया की नर्सरी 10 जून तक अवश्य डाल दें।
  • सामयिक बाढ़ वाले क्षेत्रों के लिए बाढ़ अवरोधी, स्वर्णा सब-1 और कम जल भराव वाले क्षेत्रों के लिए जल लहरी और एन.डी.आर.-8002 प्रजातियों के बीज की व्यवस्था करें ताकि जून के प्रथम सप्ताह में नर्सरी डाली जा सके।
  • धान की मध्यम अवधि वाली प्रजातियां जैसे नरेन्द्र धान-359, मालवीया धान-36, नरेन्द्र धान-2064, नरेन्द्र 3112-1, नरेन्द्र धान-2065, शियाट्स धान-1 आदि के बीज की व्यवस्था करें। संकर प्रजातियों यथा एराइज-6444, 6201, पी.एच.बी.-71, नरेन्द्र संकर धान-2, 3, के.आर.एच.-2, पी.आर.एच.-10, जे.के.आर.एच.-401, वी.एस.आर. 202, यू.एस. 312, आर.एच. 1531, सहयाद्री 4, सवाना 127 आदि के बीज की व्यवस्था करें ताकि जून के प्रथम सप्ताह में नर्सरी डाली जा सके।

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मक्का की खेती

  • देर से पकने वाले मक्के की संकर प्रजातियों गंगा-11, सरताज, एच.क्यू.पी.एम.-5, एच.क्यू.पी.एम.-8, प्रो.316 (4640), बायो-9681 व वाई-1402 के. और संकुल प्रजाति प्रभात की बुवाई करें।

अरहर की खेती

  • सिंचित क्षेत्रों में पश्चिमी उ.प्र. के लिए अरहर की अगेती संस्तुत प्रजाति पारस और पूरे उत्तर प्रदेश के लिए जारी संस्तुत प्रजातियों यूपीएएस-120, टा-21 तथा पूसा-992 की बुवाई जून के प्रथम सप्ताह में करने के लिये बीज की व्यवस्था कर लें।
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गन्ना की खेती

  • पायरीला का प्रकोप होने पर और परजीवी (इपीरिकेनिया मेलानोल्यूका) न पाये जाने की स्थिति में मेटाराइजियम एनआईसोप्ली का संस्तुति अनुसार पर्णीय छिड़काव करें।
  • सभी बेधक कीटों की निगरानी के लिए लाइट फेरोमोन ट्रैप (चार प्रति हेक्टेयर) की दर से लगाएं।
  • चोटी बेधक के नियंत्रण हेतु कार्बोफ्यूरान (3जी) 33 किग्रा प्रति हेक्टेयर या फोरेट (10जी) 30 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।

बागवानी

  • फलों के नये बाग लगाने के लिये उपयुक्त खेत का चयन और रेखांकन कर गड्ढों की खुदाई कर गड्ढे में खाद-उर्वरक की उपयुक्त मात्रा और नीम की खली व मिट्टी की समान मात्रा मिलाकर जमीन से लगभग एक फीट ऊंचा भराई करें। केले की फलों/डंठलों पर काले भूरे धब्बे दिखाई देने पर कापर आक्सीक्लोराइड 0.3 प्रतिशत के घोल का छिड़काव करें।

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सब्जियों की खेती

  • सब्जियों में आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें। खरीफ सब्जियों यथा भिण्डी, लोबिया, बैंगन, मिर्च और प्याज की अगेती किस्मों की बुवाई के लिये उपयुक्त प्रक्षेत्र का चयन करते हुए उन्नतशील प्रजातियों की व्यवस्था कर लें। सब्जियों में यथासम्भव जैव नाशिजीवियों का ही प्रयोग करें। धनिया, हल्दी एवं अदरक की बुआई 15 जून तक पूर्ण कर लें।

पशुपालन

  • बड़े पशुओं में गला घोटू बीमारी की रोकथाम के लिए एच.एस. वैक्सीन से और बकरियों में ई.टी. रोग की रोकथाम हेतु टीकाकरण बरसात से पहले करवाना सुनिश्चित करें। यह सुविधा सभी पशु चिकित्सालयों पर उपलब्ध है।
  • पशुओं को मुरझाया हुआ हरा चारा (विशेष रूप से ज्वार) ना खिलाए क्योंकि इसमें एचसीएन तत्व (जहरीला तत्व) की अधिकता से पशु बीमार हो सकते हैं।
  • वर्तमान मौसम में तापमान अधिक होने के कारण पशुओं में डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती हैं। इससे बचाव के लिए पशुओं को खनिज-लवण मिक्चर खिलाएं।


मत्स्य पालन

  • तालाब निर्माण का उपयुक्त समय है जो किसान नये तालाब बनाना चाहते हों या अपने तालाब का सुधार कार्य कराना चाहते हैं वे 20 जून तक निर्माण कार्य पूरा करा लें और आगामी मौसम में मत्स्य पालन की तैयारी करें।
  • जिन मत्स्य पालकों के तालाबों में अवांछनीय मत्स्य प्रजातियां पाई जा रही हैं उनमें बार-बार जाल चलाकर मछलियों को निकाल लें एवं तालाब को गर्मी में सुखाने के पश्चात् जुताई कर 10 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद एवं 2-2.5 कुन्तल चूना प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग कर आगामी मौसम में मत्स्य पालन करें।
  • जिन मत्स्य पालकों को अंगुलिका सुलभ हो वे तालाब में जल भण्डारण अनुसार संचय करें।

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रेशम पालन

  • शहतूत नर्सरी उत्पादों को सलाह दी जाती है कि गर्मी को देखते हुए नर्सरी की सिंचाई एक सप्ताह के अन्तराल में नियमित रूप से करते रहे। अर्जुन नर्सरी उत्पादन के लिए 30 मई, 2018 तक स्वस्थ्य अर्जुन बीजों का एकत्रीकरण कर लें। अर्जुन नर्सरी का रोपण पालीथिन बैग में किया जाता है, इसलिए बालू मिट्टी व गोबर की खाद का 3:2:1 अनुपात में मिश्रण तैयार कर पालीथिन बैग में भराई का कार्य प्रारम्भ कर दें।

वानिकी

  • गड्ढा भरान 15 जून तक पूर्ण कर लें। वृक्षारोपण हेतु आवश्यक पौधे प्राप्त कर लें। पौधों के रोपण अथवा बिक्री हेतु ले जाने से पूर्व तक खुले क्षेत्र में सिंचाई करें। नर्सरी में संरक्षित वानिकी पौध को तेज धूप से बचाव के लिए छाया में रखें। वर्तमान मौसम में आग से बचाव करें।

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