पढ़िए कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के 7 सूत्र, जिनसे 2022 तक किसानों की आमदनी हो सकती है दोगुनी

पढ़िए कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के 7 सूत्र, जिनसे 2022 तक किसानों की आमदनी हो सकती है दोगुनीराधा मोहन सिंह

गाँव कनेक्शन डेस्क

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सात सूत्री कार्यक्रम निर्धारित किए हैं। इन सूत्रों में उन्होंने ने सिंचाई व्यवस्था, उपज बढ़ाने, फसल गुणवत्ता वृद्धि, मंडियों में सुधार और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान पर पूरी तरह से निगरानी रखने जैसी अहम बातों पर ज़ोर दिया है।

पहला सूत्र - पर्याप्त संसाधन के साथ सिंचाई पर ध्यान केंद्रित करना

भारत के पास 142 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें से केवल 48 प्रतिशत संस्थागत सिंचाई के तहत है। हर खेत को पानी के उद्देश्य के साथ एक जुलाई 2015 से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत की गयी ताकि सिंचाई आपूर्ति श्रृंखला, जल संसाधनों, नेटवर्क वितरण और फार्म लेवल अनुप्रयोगों में सर्वागीण समाधान किया जा सके। हम इसमें समग्र दृष्टिकोण अपना रहे हैं जो सिंचाई और जल संरक्षण को मिलाता है। हमारा उद्देश्य प्रति बूंद अधिक फसल पाना है।

दूसरा सूत्र - योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादन में तेज़ी लाना

दूसरे सूत्र में हम श्रेष्ठ बीजों एवं पोषकता पर ज़ोर दे रहे हैं। इनपुट का प्रभावी उपयोग, जिसका अर्थ है गुणवत्तापूर्ण बीज, रोपण सामग्री, जैविक खेती एवं प्रत्येक खेत को मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं अन्य योजनाओं के माध्यम से उत्पादन में वृद्धि। जैविक खेती के लिए भी पहली बार नयी योजना प्रारंभ की गयी है। इसी प्रकार नीम कोटेड यूरिया के माध्यम से यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता तथा यूरिया का अवैध रुप से रसायनिक उद्योग में दुरुपयोग भी समाप्त हो गया है। साथ ही, सॉयल हेल्थ कार्ड्स के प्रावधान से संतुलित उर्वरकों के उपयोग के कारण किसानों की लागत कम हो रही है एवं उत्पादन में बढ़ोतरी भी हो रही है।

तीसरा सूत्र - उपज के बाद नुकसान कम करना

फसलों की उपज के बाद उसका भंडारण करना किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। भंडारण की सुविधा के अभाव में मज़बूरी में कम कीमत पर उपज की बिक्री करनी पड़ती है। इसलिए सरकार का मुख्य ध्यान किसानों को प्रोत्साहित करना है ताकि वे वेयर हाउस का उपयोग कर अपनी फसल को मजबूरी में ना बेचें। प्राप्त जमा रशीद के आधार पर किसानों को बैकों से ऋण मुहैया कराया जा रहा है, एवं ब्याज में छूट भी दी जा रही है। किसानों को नुक्सान से बचाने के लिए सरकार का पूरा फोकस ग्रामीण भंडारण एवं एकीकृत शीत श्रृंखला पर है।

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चौथा सूत्र - फसलों व कृषि गुणवत्ता में वृद्धि करना

सरकार खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से कृषि में गुणवत्ता को बढ़ावा दे रही है। छह हज़ार करोड़ रुपए के आवंटन से प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की शुरूआत की गई है। इसके तहत एग्रो प्रोसैसिंग क्लस्टरों के फार्वर्ड एवं बैकवर्ड लिंकेज पर कार्य करके फूड प्रौसेसिंग क्षमताओं का विकास किया जाएगा,जिससे 20 लाख किसानों को लाभ मिलेगा और करीब साढ़े पांच लाख लोगों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।

पांचवां सूत्र - विपणन (कृषि बाजार) में सुधार करना

हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि मूल्य का बड़ा हिस्सा किसान तक पहुंचे और बिचौलियों की भूमिका न्यूनतम हो। इसके लिए केंद्र सरकार केंद्र सरकार कृषि बाजार में सुधार पर ज़ोर दे रही है। तीन सुधारों के साथ ई-राष्ट्रीय कृषि बाज़ार योजना की शुरूआत की गई है जिसमें अभी तक 455 मंडियों को जोड़ा जा चुका हैं। कई मंडियों में ऑनलाइन कृषि बाज़ार ट्रेंडिग भी शुरू हो चुकी है। इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में बाज़ार सुधार की दिशा में एक मॉडल एपीएमसी एक्ट राज्यों को जारी किया गया है, जिसमें निजी क्षेत्र में मंडी स्थादपना, प्रत्य क्ष विपणन मंडी यार्ड के बाहर बनाने का प्रावधान है। किसानों को फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन के रूप में संगठित भी किया जा रहा है जिससे उन्हे सिर्फ इकोनोमी ऑफ स्केल मिले बल्कि व्यापारियों के समक्ष उनकी सौदेबाजी शक्ति भी बढ़े।

छठा सूत्र - प्राकृतिक आपदाओं में नुकसान के लिए बने राहत नियमों में बदलाव

जोखिम, सुरक्षा एवं सहायता, जिसके लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है। यह किसानों की आय का सुरक्षा कवच है। खरीफ़ व रबी फसल में अब तक की सबसे न्यूनतम दर तय की गई है, जो क्रमशः अधिकतम दो प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत है । इसमें खड़ी फसल के साथ-साथ बुवाई से पहले और कटाई के बाद के जोखिमों को भी शामिल किया गया है। इतना ही नहीं, नुकसान के दावों का 25 प्रतिशत भुगतान भी तत्काल ऑनलाइन भुगतान किया जा रहा है। इस योजना में किसानों को फसल नुकसान के त्वशरित भुगतान हेतु उपज के अनुमान के लिए ड्रोन तकनीक तथा फसल कटाई के लिए स्मार्ट फोन जैसी नई तकनीकों का उपयोग भी कई राज्यों में प्रारम्भ किया जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के राहत नियमों में भी सरकार ने बदलाव किए हैं। अब केवल 33 प्रतिशत फसल नुकसान होने पर भी सरकार अनुदान दे रही है। साथ ही अनुदान की राशि को 1.5 गुना बढ़ा दिया गया है।

सातवां सूत्र - सहायक गतिविधियों के ज़रिए किसानों की आमदनी बढ़ाना

कृषि में (मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, डेयरी विकास व मत्स्यपालन) जैसी सहायक गतिविधियों के ज़रिए किसानों की आमदनी बढ़ाएंगे। हम सहायक गतिविधियों से किसानों की आय में बढ़ोतरी करेंगे। यह मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, डेयरी विकास व मत्स्यपालन के माध्यम से किया जाएगा। हम किसानों को उनकी भूमि के उस हिस्से का उपयोग करने का प्रोत्साहन दे रहे हैं,जो जोता हुआ नहीं है, खासकर खेतों के बीच की सीमा वाला हिस्सा जिसका प्रयोग लकड़ी वाले वृक्ष उगाने एवं सौर सेल बनाने में किया जा सकता है। इसे अलावा बागवानी, कृषि वानिकी एवं समेकित कृषि पर भी विशेष बल दिया जा रहा है।

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