किसान पर एक और आफत : कीटनाशक दे रहे जानलेवा कैंसर

किसान पर एक और आफत : कीटनाशक दे रहे जानलेवा कैंसरजानलेवा होता जा रहा कीटनाशकों का छिड़काव।

लखनऊ। कृषि विभाग के अनुसार देशभर में फसल बुवाई से लेकर कटाई तक फसलों में औसतन 3 से लेकर 4 बार कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे अनाज और सब्जियों में कीटनाशकों का अवशेष बड़ी मात्रा में पाया जा रहा और यह लोगों को कैंसर जैसी बीमारियां दे रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (इंडियन काउंसिल मेडिकल रिसर्च) ने अपने अध्ययन में बताया है कि वर्ष 2020 में देश में कैंसर मरीजों की संख्या में 17 लाख 20 हजार इजाफा हो जाएगा, जिसका कारण देश में तंबाकू के सेवन के साथ ही कीटनाशकों को बढ़ता प्रयोग है। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के कैंसर विभाग के प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार ने बताया '' कैंसर के जो मरीज आ रहे हैं उसमें से कीटनाशकों के कारण लोगों में पेट, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर हो रहा है। ''

उन्होंने बताया कि कीटनाशक शरीर के जिस हिस्से से गुजरता है उसको नुकसान पहुंचाता है। खासकर फेफड़े, किडनी, लिवर और गला को। धीरे-धीरे मात्रा ज्यादा बढ़ने पर यह ब्लड में भी घुल जाता है और ब्लड कैंसर का खतरा बन जाता है। कीटनाशक नर्व सिस्टम पर भी बुरा असर डालता है।

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कीटनाशकों का उपयोग धड़ल्ले से कितना बढ़ रहा है इसकी बानगी आंकड़े भी दे रहे हैं। 1950 में देश में जहां 2000 टन कीटनाशक की खपत थी जो आज बढ़कर 90 हजार टन है। 60 के दशक में जहां देश में 6.4 लाख हेक्टेयर में कीटनाशकों का छिड़काव होता था वहीं अब डेढ़ करोड़ हेक्टेयर में कीटनाशकों का छिड़काव हो रहा है, जिसके कारण भारत के पैदा होने वाले अनाज, फल, सब्जियां और दूसरे कृषि उत्पाद में कीटनाशकों की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई जा रही है।

केयर रेटिंग ने इसको लेकर अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारतीय खाद्ध् पदार्थो में कीटनाशकों को अववेश 20 प्रतिशत तक है जबकि वैश्विक स्तर पर यह मात्र 2 प्रतिशत तक होता है। भारत में केवल ऐसे 49 प्रतिशत ही खाद्य उत्पाद हैं जिनमें कीटनाशकों का अवशेष नहीं मिलते हैं जबकि वैश्विक स्तर पर 80 प्रतिशत खाद्ध् पदार्थो में कीटनाशकों के अवशेष नहीं है।

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अधिक उपज लेने चक्कर में अधिक कीटनाशकों के प्रयोग के कारण देश के तीन राज्य पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कैंसर मरीजों संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले दिनों हरियाण सरकार ने अपने प्रदेश में कीटनाशकों के प्रयोग को लेकर एक अध्ययन कराया था जिसमें पता चला थ कि इस राज्य में कीटनाशकों के कारण किसानों में कैंसर का रोग बढ़ रहा है। इस बारे में जानकारी देते हुए हरियाणा कृषि विभाग के पूर्व महानिदेशक अशोक यादव ने बताया '' सेंट्रल इंसेक्टीसाइड बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी की गाइडलाइंस का बिना पालन किए देश में कीटनाशक बिक रहे हैं। इन कीटनाशकों की चपेट में सबसे ज्यादा किसान हैं।''

राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान यानि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च, नोएडा के अनुसार प्रदेश में खाद्ध पदार्थो के माध्यम से शरीरी में रोजाना 0.5 मिलीग्राम कीटनाशक जा रहा है। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर, दिल्ली की यूनिट चीफ डॉ. स्वरूपा मित्रा के अनुसार तंबाकू के बाद देश में कीटनाशक कैंसर का दूसरा बड़ा कारण बन रहा है। कैंसर के लगभग 30 प्रतिशत मामले इसी वजह से हो रहे हैं।

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देश में सबसे ज्यादा किस कीटनाशक को हो रहा इस्तेमाल

  • एंडोसल्फ़ान- कपास, कॉफी, मक्का सहित कई फसलों की खेती में कीटनाशक के रूप में इस्तेमाल होने वाला एंडोसल्फान जीव-जंतुओं और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। एंडोसल्फ़ान को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है।
  • कोराजन-किसान गन्ने वा अन्य फसलों को अच्छा बनाने के लिए कोराजन का भरपूर इस्तेमाल कर रहे
  • इथाइल मर्करी क्लोराइड--एगिसान, बैगलाल-6
  • मेथोमिल--रनेट, लैनेट, क्रिनेट
  • कार्बोफयूरॉन--प्यूराडान, अनुक्यूरान, डायफ्यूरॉन, सूमो, प्यूरी

क्या कहते हैं किसान

बठिंडा के किसान कीरत सिंह ने खेतों में हो रहे कीटनाशकों के इस्तेमाल का कैंसर का कारण मानते हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब में कपास की खेती में बड़ी मात्रा में कीटनाशकों के इस्तेमाल के कारण कैसर के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। उनके भाई को कैंसर है जिसका वह इलाज करा रहे हैं।

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ग्रेटर नोएडा के दुजाना गांव में भी बड़ी संख्या में कैंसर मरीज हैं। इस गांव की 35 साल की सुमन को कैंसर है। सुमन ने बताया कि दो साल पहले सब कुछ ठीक था लेकिन अचानक एक दिन उल्टियां होने लगीं, उसकी तबीयत खराब होने लगी। फिर कुछ दिनों में सुमन के शरीर में कई जगह गाठें पड़ गईं, फिर शुरू हुआ डॉक्टर को दिखाने का, अस्पताल के चक्कर लगाने का और टेस्ट कराने का सिलसिला। करीब सालभर की जांच के बाद पता चला कि सुमन को ब्लड कैंसर है।

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