‘जैतून शहर’ के रूप में बीकानेर को किया जाएगा विकसित 

‘जैतून शहर’ के रूप में बीकानेर को किया जाएगा विकसित राजस्थान के बीकानेर शहर को जैतून शहर (ऑलिव सिटी) के रूप में विकसित किया जाएगा।

बीकानेर (भाषा)। राजस्थान के बीकानेर शहर को जैतून शहर (ऑलिव सिटी) के रूप में विकसित किया जाएगा।

राजस्थान के कृषि, पशुपालन मंत्री प्रभुलाल सैनी ने यहां विभागों की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि बीकानेर में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी जैतून के पौधे लगाए जाएं। जैतून वृक्षों को सड़क के किनारे व संभव हो तो रोड डिवाइडरों पर भी लगाया जाए, जिससे शहर के सौन्दर्य में वृद्धि हो सके। इसका यहां आने वाले पर्यटकों पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कृषि अधिकारियों को बीकानेर में पिस्ता खेती करने के भी प्रयास करने के निर्देश देते हुए कहा कि पिस्ते का पौधा तेज गर्मी व सर्दी सहन कर लेता है, इसलिए इसकी बीकानेर में भी पैदावार की जा सकती हैं। उन्होंने बीकानेर में डेट पाम के पौधों के विषय में जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि कृषकों को इन्हें अधिक से अधिक लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

निकट भविष्य में स्थान चयनित कर डेट पाम उत्पादों संबंधी 125 करोड़ रुपए लागत की प्रोसेसिंग यूनिट लगाए जाने का एमओयू किया जाएगा।

कृषि मंत्री सैनी ने कहा कि ओलावृष्टि, अनावृष्टि व अतिवृष्टि के कारण कृषकों की फसल नष्ट हो जाती है तथा विभिन्न संक्रमण तथा रोगों के कारण भी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंच रहा हैं। कृषि वैज्ञानिकों के समक्ष यह चुनौती है कि प्रदेश की जलवायु के अनुसार पौधों की अनुकूल किस्में विकसित करें। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सतत शोध कार्य करते रहें। साथ ही नवीनतम शोध कार्यों व कृषि क्षेत्र में नवाचारों के बारे में कृषकों को समय-समय पर बताया जाए, जिससे वे लाभान्वित हो सकें।

प्रभुलाल सैनी कृषि, पशुपालन मंत्री राजस्थान

‘सॉयल हेल्थ टेस्टिंग’ का कार्य पूर्ण गंभीरता से किया जाए, इस कार्य में लापरवाही करने वाले कार्मिकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रभुलाल सैनी कृषि, पशुपालन मंत्री राजस्थान

बैठक में बताया गया कि बीकानेर के कृषकों में अनार की खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा हैं। अगस्त माह तक बाजरे की एक लाख 9 हजार 719 हेक्टेयर में, मूंग की 25 हजार 126 हेक्टेयर, मोठ की 3 लाख 58 हजार हेक्टेयर, मूंगफली की एक लाख 95 हजार 626 हेक्टेयर में बिजाई सहित कुल 13 लाख 53 हजार 460 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बिजाई की गई हैं।


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