इन बातों को ध्यान में रख एक साल में भैंस से ले सकते हैं बच्चा 

इन बातों को ध्यान में रख एक साल में भैंस से ले सकते हैं बच्चा गाभिन भैंसों को पशुपालक दें पोषक आहार।

लखनऊ। ज्यादातर पशुपालक यही चाहते हैं कि उनकी भैंस हर साल बच्चा दे, जिससे लगातार दूध उत्पादन होता रहे। लेकिन आजकल पशुपालकों की यह समस्या रहती है कि भैंस ढ़ेड से दो साल में एक ही बच्चा देती है। ऐसे में पशुपालक अगर कुछ बातों को ध्यान में रखें तो दूध उत्पादन तो बढ़ेगा साथ ही खर्चा भी कम होगा।

"वहीं भैंस हर साल बच्चा दे सकती है जो ब्याने के बाद 60 दिन में अंदर गाभिन हो जाए। अगर ब्याने के 100 दिन बाद भैंस गाभिन होती है तो 300 दिन गर्भकाल को जोड़कर अगला बच्चा 400 दिन के अंतर पर होता है। अगर 200 दिन बाद गाभिन होती है तो बच्चा 500 दिन के अंतर पर होता है और अगर 300 दिन के बाद गाभिन होती है तो बच्चा 600 दिन के अंतर पर होता है।" ऐसा बताते हैं, हिसार स्थित केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॅा. आर के शर्मा।

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वर्तमान समय में भैंस पालन का डेयरी उद्योग में काफी महत्व है। भारत में 55 प्रतिशत दूध यानि 20 मिलियन टन दूध भैंस पालन से मिलता है।

पिछले 45 वर्षों में पशुधन के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञ डॅा मोहन जे सक्सेना बताते हैं, "भारत में आज भी पशुपालक पशुओं के प्रति काफी उदासीन है। गाय-भैंस के बच्चे का औसतन वजन 23 किलो होना चाहिए जबकि ऐसा नहीं होता, ऐसे में वो कुपोषण का शिकार होते है। गाय-भैंस को तीन साल में बच्चा हो जाना चाहिए लेकिन बहुत कम ही ऐसा हो पाता है।"

अपनी बात को जारी रखते हैं, अगर पशुओं को पोषक तत्व और संतुलित आहार दिया जाए तो इससे पशुपालकों को काफी लाभ होगा और आमदनी भी बढ़ेगी।

भैंसों में ब्यांत का अंतर होने के कारणों के बारे में डॅा. शर्मा बताते हैं, "इसके तीन कारण है पहला ब्याने के बाद भैंस का गर्म में नहीं आना या गर्मी के लक्षणों का इंतना हल्का होना कि पशुपालकों को इसका पता ही नहीं लगता है कि भैंस गर्मी में है इसे चुप गाभिन होना भी कहते है। दूसरा गाभिन कराने पर भैंस का गर्भपात हो जाना और तीसरा बच्चा फसने या रुकने के कारण बच्चेदानी में इंफकेशन से होता है।"

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दो ब्यांतो के बीच का समय जिसको ब्यांत अंतराल (365 दिन) कहते है दो ब्यांत को मिलकर बना होता है। पहला ब्याने से गाभिन होने का समय और दूसरा गाभिन होने से बच्चा देने का समय इसको गर्भकाल भी बोला जाता है। यह लगभग 310 दिनों का होता है। यहीं दोनों समय बहुत जरुरी होता है। इसी समय को सही करके हर साल बच्चा ले सकते हैं।

अपनी बात को रखते हुए डॅा. आर के शर्मा बताते हैं, "वही भैंस ठीक होती है जो 12-14 महीने में बच्चे को जन्म दे दे। ऐसा होने पर भैंस से दूध भी ज्यादा मिलता है और बच्चे भी। जो ढ़ेड से दो साल में बच्चा देती है वो अपने जीवनकाल में दूध भी कम और बच्चे भी कम देती है। क्योंकि ज्यादातर भैंसे ऐसे में सूख जाती हैं और कम मुनाफा होने पर किसानों को भैंसों को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ता है।"

दुधारु भैंस की पहले तीन महीने में अच्छी चारी की जाए।

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भैंसों में 33 से 40 दिन के अंदर बच्चेदानी सिकुड़ कर अपनी ठीक जगह पर आ जाती है। द्रिव ग्रंथियां भी अपना काम फिर से शुरु कर देती है, जिससे भैंस हर 21 दिन पर गर्म में आने लगती है। ब्याने के 45 से 50 दिन बाद जब भी लगे भैंस गर्भ में है उसके अंदर बीज रखवा देना चाहिए। तभी हर साल बच्चा लिया जा सकता है।

"अगर दुधारू भैंस की पहले तीन महीने में अच्छी चारी की जाए। दूध उत्पादन के हिसाब से संतुलित दाना दिया जाए उदाहरण के तौर पर दो किलो दूध तो एक किलो दाना। खनिज लवण नियमित रूप से कम से कम 70 किलो ग्राम खिलाया जाए। भैंस को आरामदायक जगह पर बांधा जाए। तो ज्यादा तर भैंसे 60 दिन के अंदर गर्मी में आकर गाभिन हो जाती है।" डॅा शर्मा ने बताया।

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अगर कोई भैंस ब्याने के 90 दिन बाद भी गर्भ में नहीं आती है तो डॅाक्टर से जांच जरूर करा ले। क्योंकि एक दिन भी ब्यांत का अंतर बढ़ने पर एक दिन में पशु का खर्चा लगभग 100 रुपए आता है।

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