बैतूल में 150 हेक्टेयर में लगेंगे काजू के बाग, किसानों का चयन जारी

काजू के बगीचे लगाने के कृषक चयन प्रारंभ... जल्द ही बैतूल जिले में 150 हेक्टेयर में लगेंगे काजू के बगीचे

बैतूल में 150 हेक्टेयर में लगेंगे काजू के बाग, किसानों का चयन जारी

लखनऊ। मध्य प्रदेश में काजू की खेती होनी शुरु हो गई है। जल्द ही बैतूल जिले में 150 हेक्टेयर में बाग लगाए जाएंगे। इसके लिए किसानों का चयन जारी है।

जिले में परम्परागत खेती के तहत कृषकों के यहाँ प्राय: आम, संतरा, आंवला, अमरूद, कटहल आदि फलों के बग़ीचे लगाये जाते रहे हैं लेकिन अब जल्द ही यहाँ काजू की फसल भी दिखेगी। जिले की जलवायु, भूमि एवं अपार संभावनायें को दृष्टिगत रखते हुये जिले में कृषकों के यहाँ वर्ष 2018-19 में काजू फलों के बग़ीचे लगाये जाने हेतु ''काजू फल क्षेत्र विस्तार'' योजना के लिए 150 हेक्टयर के लक्ष्य की मांग उद्यानिकी विभाग के संचालनालय को भेजी गयी थी, जिसे जिले में काजू की खेती के लिये उपयुक्त वातावरण को देखते हुये स्वीकृत कर लिया गया है एवं प्रदेश में सिर्फ बैतूल जिले हेतु ही भौतिक लक्ष्य जारी किया जा रहा है।

तकनीकी रूप से काजू के पौधों का रोपण उच्च घनत्व तकनीकी से 5&5 मीटर की दूरी पर किया जाता है, जिसके अंतर्गत एक हेक्टर में 400 पौधे तथा एक एकड़ में 160 पौधों का रोपण किया जाता है। रोपित बागानों का उचित प्रबंधन करने पर तीसरे साल से उत्पादन चालू हो जाता है, जो कि प्रति पेड़ तीन किलोग्राम प्रति वर्ष होता है। रोपण के छटवें साल से व्यवसायिक उत्पादन प्रारंभ हो जाता है जो कि औसतन 15 से 16 किलो ग्राम प्रति पौधा होता है, इसके पश्चात उत्पादन साल दर साल बढ़ता जाता है। काजू पौध उत्पादन के समस्त तकनीकी मापदण्डों का पालन करने एवं समुचित प्रबंधन करने पर काजू पौध उत्पादन करने वाले अन्य प्रमुख प्रदेशों के किसानॉन द्वारा छटवें वर्ष में 33 किलो ग्राम प्रति पेड़ उत्पादन भी लिया जा रहा है। इसी प्रकार पौधों/ बागानो की उम्र बढ़ते जाने पर उत्पादन भी बढ़ता जाता है।

उप संचालक उद्यान डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार ने बताया कि काजू पौध रोपण हेतु उद्यानिकी विभाग में अनुदान का प्रावधान भी है। विभाग की योजनान्तर्गत एक हेक्टेयर पर रोपण की लागत एक लाख रूपये निर्धारित की गयी है, जिसका 40 प्रतिशत् यानि 40 हजार रूपये का अनुदान मापदण्ड पूर्ण करने पर तीन वर्ष में किसानों को दिया जाता है। अनुदान के रूप में पौध रोपण करने के वर्ष में 24000 प्रति हेक्टयर तथा द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में क्रमशः 75 प्रतिशत् एवं 90 प्रतिशत् पौध जीवित होने पर 8000-8000 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान देय होता है। चयनित कृषकों को वर्तमान में प्रचलित ग्राफ्टेड किस्म के काजू फल पौध विभाग से उपलब्ध कराये जायेंगे, जिसकी राशि प्रथम वर्ष की अनुदान राशि से समायोजित की जायेगी।

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लाभान्वित होने वाले सभी कृषकों को उद्यानिकी विभाग की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अंतर्गत काजू फल पौध रोपण में ड्रिप लगाना अनिवार्य होगा। ड्रिप संयंत्र स्थापित करने से सिंचाई जल की 60 से 70 प्रतिशत् बचत होगी, वहीं बगीचे की उत्पादन और उत्पादकता में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि होगी। विभागीय योजनान्तर्गत ड्रिप हेतु सामान्य वर्ग के लघु/सीमांत कृषकों को शासन द्वारा निर्धारित लागत का 60 प्रतिशत, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के लघु/सीमांत कृषकों को शासन द्वारा निर्धारित लागत का 65 प्रतिशत तथा सभी वर्गों के बड़ेे कृषकों को शासन द्वारा निर्धारित लागत का (5 एकड़ से अधिक) 55 प्रतिशत् अनुदान का लाभ विभाग द्वारा दिया जायेगा।

पूर्व में जिले के बैतूल, शाहपुर, चिचोली एवं घोडाडोंगरी विकासखण्ड में लगभग 6000 से 7000 काजू के पौधे लगाये गये हैं, जिनका उत्पादन चालू हो गया है, जिनमें 4 वर्ष के पौधों में औसतन 5 किलो प्रति पौध उत्पादन प्राप्त हो रहा है। कच्चे काजू से काजू निकालने हेतु जिले के घोड़ाडोंगरी विकासखण्ड में काजू प्रसंस्करण इकाई भी स्थापित है जिसके द्वारा कच्चा काजू फल 80 से 100 रूपये प्रति किलो की दर पर खरीदी की जा रही है। प्रदेश के बाहर अन्य प्रांतों में कच्चा काजू औसतन 150-160 रूपये प्रति किलो की दर से आसानी से बिक जाता है।

अत: जिले के किसानों को लाभ देने एवं एक सुनिश्चित आय देने के उद्देश्य से इस साल काजू का रोपण किया जा रहा है जिस हेतु इच्छुक कृषक संबंधित विकासखण्ड के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी/ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी से सम्पर्क करें अथवा अधिक जानकारी के लिए कार्यालय उप संचालक उद्यान, कंपनी गार्डन परिसर बैतूल में कार्य अवधि दिवसों में प्रात: 10:30 बजे से सायं 5:30 बजे के बीच सम्पर्क स्थापित कर सकते हैं। जिले हेतु भौतिक लक्ष्य सीमित है अत: ''प्रथम आओ-प्रथम पाओ'' के आधार पर कृषकों को लाभान्वित किया जावेगा।

जय जवान-जय किसान-जय उद्यान

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साभार- उद्यानिकी सन्देश-खेती में स्वच्छता अभियान Kheti Me Svachchhata Abhiyan

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