खेती किसानी

सीएआरआई ने की विकसित की मुर्गी की नई प्रजाति, एक साल में देगी 220-230 अंडे

लखनऊ। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान(सीएआरआई) के वैज्ञानिकों ने देसी मुर्गी की एक ऐसी प्रजाति विकसित की है जो साल मे 220-230 अंडे देगी।

"इस मुर्गी का नाम कैरी ग्रेसी रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे मुर्गी पालकों के लिए यह मुर्गी मुनाफा दोगुना करने के लिए सहायक होगी। अभी इसको संस्थान की लैब में ही परखा गया है अब इसको फील्ड पर देखना है तब इस मुर्गी को किसानों को दिया जाएगा। ताकि उनकी आय को बढ़ाया जाए।" ऐसा बताते हैं, केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॅा. चंद्रहास।

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आमतौर पर सामान्य मुर्गी 36 सप्ताह में अंडे देना शुरू करती है लेकिन यह कैरी ग्रेसी 24 हफ्ते में ही अंडे देने के लिए तैयार हो जाती है। इस मुर्गी का रंग काला और भूरा है। इस मुर्गी की खासियत यह भी है कि यह देसी मुर्गी से 30-40 अंडे ज्यादा देती है। इस प्रजाति को तैयार करने में एशियन जेनेटिक्स एंड बिल्डिंग डिवीजन के वैज्ञानिकों को तीन साल का समय लगा। यह मुर्गी 20 हफ्तों में ही डेढ़ किलो की हो जाती है।

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विकसित की गई इस प्रजाति के बारे में डॅा चंद्रहास बताते हैं, "इस मुर्गी में बीमारी न के बारे होती है और इसका मांस भी अच्छा है। साथ ही अंडा उत्पादन भी अच्छा है। किसानों की आय को बढ़ाने के लिए ऐसी प्रजातियों को विकसित किया जा रहा है, जिनसे दोहरा लाभ मिले।

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गर्मियों में भी नहीं घटेगा अंडा उत्पादन

गर्मियों में अंडा उत्पादन कम होने से मुर्गी पालकों को आर्थिक नुकसान होता है। लेकिन इस मुर्गी की खासियत यह है कि गर्मियों में भी इस मुर्गी के अंडे उत्पादन में कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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