विश्व संतरा उत्सव विशेष : बीज रहित संतरे की खेती करके अधिक उत्पादन ले सकते हैं किसान

विश्व संतरा उत्सव विशेष : बीज रहित संतरे की खेती करके अधिक उत्पादन ले सकते हैं किसानबिना बीज के संतरे।

लखनऊ। दुनियाभर में भारत में पैदा होने वाले नीबू वर्गीय फलों खासकर संतरे की मांग बढ़ रही है लेकिन संतरे में बीज अधिक होने के कारण खाद्य प्रसंस्करण में परेशानी होती है। ऐसे में केन्द्रीय नीबूवर्गीय फल अनुसंधान संस्थान नागपुर के वैज्ञानिकों ने नीबू वर्गीय फलों की नई किस्मों को विकसित किया है। जिसमे बीज रहित नागपुरी संतरे की किस्म सबसे महत्वपूर्ण है।

संतरा उत्पादक किसानों को बढ़ावा देने के लिए रविवार को महाराष्ट्र के नागपुर शहर में पहली बार विश्व संतरा उत्सव का आयोजन किया गया। इस समारोह में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। इस आयोजन में केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने शिरकत की।

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इस बारे में जानकारी देते हुए यहां के निदेशक डॉ. एम.एम. लांडे ने बताया, ''फसल सुधार योजन के तहत संस्थान के वैज्ञानिकों ने संतरे और नींबू दो-दो किस्मों का विकसित किया है। जिसमें बीज रहित नागुपरी संतरा की किस्म किसानों के लिए बहुत उपयोगी होगी।''

उन्होंने बताया कि बीज रहित नागपुरी संतरा की खासियत यह है कि इसमें या तो बीज ही नहीं होता है या मात्र तीन बीज होते हैं। संतरे की इस नई किस्म में एक हेक्टेयर में 25 टन की उत्पादन होता है। इसका वजन 145.9 ग्राम होता है। संतरे की जो दूसरी किस्म है वह एलिमो नागपुरी संतरा है। इसका वजन 137 ग्राम होने के साथ ही इसमें रस 40 प्रतिशत मिलता है। एक हेक्टेयर में 21 टन उत्पादन होता है।

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पूरी दुनिया में 114 देशों में नीबू वर्गीय फसलों की खेती होती है, जिसमें से 53 देशों में यह बड़े व्यवसायिक तरीके से की जाती है। चीनी संतरा की पैदावार करने में नंबर वन देश है। नीबू का सबसे ज्यादा उत्पादन भारत में होता है। इसके अलावा नारंगी, माल्टा, मौसमी, किन्नू और संतरा जैस रसदार खट्टेमीठे फलों का भी खूब उत्पादन होता है। भारत के 9 लाख, 89 हजार हेक्टेयर रकबे में हर साल लगभग 96 लाख 39 हजार टन नीबू वर्गीय फलों की पैदावार होती है।

देश में संतरा बागानों की खस्ताहाल स्थित और घाटे में चल रहे संतरा उत्पादक किसानों की स्थिति को देखते हुए भारतीय आयात-निर्यात बैंक (एक्जिम) ने सरकार से लगभग 20 साल पुराने संतरों के बगीचों के कायाकल्‍प के लिए पुराने वृक्षों की क्रमिक रोपाई, वृक्षों के आसपास मृदा सुधार और प्रमाणित नर्सरियों के पौधों से नए बगीचे लगाने की सिफारिश की थी। जिकसे बाद सरकार ने इसपर ध्यान दिया।

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देश में फलों की खेती लगातर बढ़ रही है। भारतीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार देश में वर्ष 2015-16 की अवधि में कुल 63 लाख हेक्टेयर भूमि से 9 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक फलों का उत्पादन हुआ था। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2016-17 की अवधि में देश में लगभग 2.5 करोड़ हेक्टेयर भूमि से बागवानी फसलों का उत्पादन लगभग 30 करोड़ मीट्रिक टन होने की संभावना है जिसमें नीबू वर्गीय पसल खासकर संतरे की फलों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होगा।

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देश में बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिएबगीचों के महत्व को ध्यान में रखकर भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत बागवानी मिशन परियोजना चलायी जा रही है। इस योजना में किसानों को हर तरह से सुविधा देकर अधिक से अधिक फलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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