मुर्गी पालन के जरिये बदल गई दलजीत की जिंदगी 

मुर्गी पालन के जरिये बदल गई दलजीत की जिंदगी मुर्गी पालन से आज कमा रहे हैं मोटा मुनाफा।

स्वयं डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पशुपालन के क्षेत्र में कुक्कुट योजना के जरिये लोग मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। कुक्कुट योजना में न सिर्फ ग्रामीण वर्ग के लोगों का खासा रुझान है, बल्कि छोटे-बड़े शहरों के लोग भी जुड़ चुके हैं और आज इसमें सफलता के नये-नये आयाम बना रहे हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं हरदोई के दलजीत सिंह, जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर इस योजना के जरिये आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया।

कुइया गाँव से शुरू किया मुर्गी पालन

हरदोई के रहने वाले दलजीत सिंह सांगवान ने प्रदेश सरकार की कुक्कुट योजना का लाभ उठाया। इससे पहले दलजीत कई शहरों में नौकरी कर चुके थे। कुक्कुट योजना के बारे में जानकर दलजीत ने इस योजना से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया। तब दलजीत अपने शहर वापस आ गए और सीतापुर रोड स्थित कुइया गाँव से मुर्गी पालन शुरू किया। उन्होंने एक यूनिट में 30,000 मुर्गी पालन का कार्य शुरू किया। इसके बाद एक-एक करके उन्होंने चार यूनिट खोलीं और हर यूनिट में 30,000 हजार मुर्गी पालन किया।

प्रतिदिन 74,000 अंडों का उत्पादन

दलजीत की तीन यूनिट के जरिये प्रतिदिन 74,000 अंडों का उत्पादन शुरू हुआ। वहीं, इसमें बची हुई 30,000 मुर्गियां अगले तीन से चार महीनों में अंडे देने के लिए तैयार हो जाती हैं। लगभग 74,000 अंडों का प्रतिदिन उत्पादन कर दलजीत सिंह सांगवान आज न सिर्फ इस योजना के जरिये सफलता के नये आयाम बना रहे हैं, बल्कि मोटा मुनाफा भी कमा रहे हैं।

प्रदेश सरकार ने मुर्गी पालकों को दिया बढ़ावा

हाल में उत्तर प्रदेश सरकार ने कुक्कुट योजना को बढ़ावा दिया ताकि छोटे किसान भी इस योजना का लाभ उठा सकें। सरकार कुक्कुट विकास नीति 2013 के तहत दस हजार कामर्शियल लेयर फार्मिंग की यूनिट स्थापित करने जा रही है। इससे पहले 30 हजार पक्षियों की कामर्शियल यूनिट संचालित की जाती थी, जिसमें मुर्गी पालकों को एक करोड़ 80 लाख रुपए की लागत आती थी, लेकिन अब किसान दस हजार पक्षियों की कामर्शियल यूनिट भी स्थापित कर सकेंगे, जिसमें 70 लाख रुपए का खर्चा आएगा। इस योजना से एक लाभार्थी अधिकतम दो यूनिट स्थापित कर सकता है।

योजना से 26 लाख अंडे प्रतिदिन उत्पादन

उत्तर प्रदेश में कुक्कुट विकास नीति 2013 के तहत 92 कार्मशियल लेयर फार्मिंग की यूनिट के जरिए रोज़ाना 26 लाख अंडे उत्पादित किए जाते हैं। पहले रोज़ाना एक करोड़ अंडे अन्य राज्यों से मंगाए जाते थे, लेकिन योजना के शुरुआत के बाद 75 लाख अंडे ही मंगाए जा रहे हैं। एक बड़ी बात यह भी है कि कुक्कुट योजना के जरिये अब तक 14,000 लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सका है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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