किसानों की आय बढ़ाने में मददगार बन रहा ‘फार्मर फर्स्ट’

Diti BajpaiDiti Bajpai   12 Sep 2017 8:45 PM GMT

किसानों की आय बढ़ाने में मददगार बन रहा ‘फार्मर फर्स्ट’आईवीआरआई के वैज्ञानिक गाँवों को गोद लेकर किसानों को आधुनिक तरीके से खेती।

लखनऊ। बरेली जिले के अतरछेड़ी गाँव के किसान अजीत चतुर्वेदी ( 48 वर्ष ) ने इस बार अपने खेत में उन्नत किस्म के धान की बुवाई की है। धान का बीज उन्हें गाँव में शुरू की गई फार्मर फर्स्ट परियोजना के अंतर्गत मिला है। इस परियोजना में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए आईवीआरआई के वैज्ञानिक गाँवों को गोद लेकर किसानों को आधुनिक तरीके से खेती और पशुपालन कराना सिखा रहे हैं।

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बरेली जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर मछगवां ब्लॉक के अतरछेड़ी गाँव में रहने वाले किसान अजीत चतुर्वेदी (48 वर्ष) के पास लगभग 10 बीघा धान के खेत हैं। राजेश को फार्मर फर्स्ट परियोजना के तहत इस बार उन्नत किस्म के धान के बीज दिए गए हैं। राजेश बताते हैं,“ गाँव में टीम ने हमें सुगंधा और सहभागी किस्म के धान के बीज दिए गए हैं, जिसको हमने इस बार लगाया है।धान की खेती कैसे हो रही है, इसके बारे में अधिकारी समय-समय पर गाँव आकर जानकारी देते रहते हैं।”

परियोजना में जिले के 850 किसानों को उन्नत खेती के बारें में किया गया जागरूक ।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की फार्मर फर्स्ट (फार्मर फील्ड इनोवेसंश रिसर्च साइंस एंड टेक्नोलॉजी) योजना के तहत तीन गाँवों में (निसोई, अतरछेड़ी और इस्माइलपुर) को गोद लिया गया है। इस परियोजना में जिले के 850 किसानों को उन्नत खेती के बारें में जागरूक किया जा रहा है।

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फार्मर फर्स्ट परियोजना आईवीआरआई, सीएआरआई, केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय, केंद्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान सहित 103 संस्थान और कृषि वैज्ञानिक शामिल है। योजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. रणवीर सिंह बताते हैं,“इस परियोजना मे सीमांत, मध्यम व लघु श्रेणी के किसानों को जोड़ा गया है। किसानों को उन्नत बीज दिए गए हैं और पशुपालकों को आईवीआरआई में विकसित लैंडरेज प्रजाति के सुअर व केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान से मंगाई गई बकरियां दी गई हैं। इससे उन्हें अच्छा लाभ मिलेगा और उनकी आय दोगुनी हो सकेगी।”

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बरेली जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर मछगवां ब्लॉक के निसोई गाँव के अमर सिंह (30 वर्ष) सुअर पालन कर रहे है। अमर बताते हैं कि संस्थान द्वारा अच्छी प्रजाति के सुअर मिले हैं। इन सुअरों का कैसा आहार हो व इनके टीकाकरण का प्रशिक्षण भी दिया गया है। इस परियोजना में पुरूषों के साथ साथ महिला किसान भी शामिल की गई हैं।

क्या कहते हैं आईवीआरआई के निदेशक

इस परियोजना के बारे में आईवीआरआई के निदेशक डॉ. राजकुमार सिंह ने बताया, “िकसानों को उनकी फसल का अधिक लाभ दिलाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत तीन गाँव चुने गए हैं, जिनमें वैज्ञानिक जाकर काम कर रहे है। इस योजना से किसान आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनेंगे साथ ही गाँवों में पलायन भी रोका जाएगा।”

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किसानों को पसंद आ रही है परियोजना

योजना की मौजूदा स्थिति के बारे में डॉ. रणवीर सिंह ने आगे बताया कि मई में शुरू हुई इस परियोजना में किसानों बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है। आधुनिक कृषि व पशुपालन में आने वाले वर्षों में हम जिले के दूसरे गाँवों को भी इस परियोजना में जोड़ेंगे।

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