गाजर घास की रोकथाम के लिए किसान ये तरीके अपनाएं

गाजर घास की रोकथाम के लिए किसान ये तरीके अपनाएंगाजर घास।

गाजर घास किसानों के लिए सिर दर्द बन गई है। इससे फसलों के साथ पशुओं और खुद किसानों को नुकसान पहुंचता है। इससे बचने के नीचे कुछ तरीके दिए गए हैं..

खेतों के आस-पास उगी गाजर घास न केवल इंसानों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि दूसरी फसलों को भी। यह खरपतवारों में सबसे विनाशकारी खरपतवार है क्योंकि यह कई तरह की समस्याएं पैदा करता है। इसकी वजह से फसलों की पैदावार 30-40 प्रतिशत कम हो जाती है इसलिए इसका नियंत्रण बहुत जरूरी है।

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इस खरपतवार में ऐस्क्युटरपिन लेक्टोन नामक विषाक्त पदार्थ पाया जाता हैं, जो फसलों की अंकुरण क्षमता और विकास पर विपरीत असर डालता है। इसके परागकण, पर-परागित फसलों के मादा जनन अंगों में एकत्रित हो जाते हैं जिससे उनकी संवेदनशीलता खत्म हो जाती है और बीज नहीं बन पाते हैं। यह दलहनी फसलों में नाईट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणुओं की क्रीयाशीलता को भी कम करता है।

गाजर घास फसलों के अलावा मनुष्यों और पशुओं के लिए भी गम्भीर समस्या है। इस खरपतवार के सम्पर्क में आने से एग्जिमा, एलर्जी, बुखार, दमा व नजला जैसी घातक बीमारियां हो जाती हैं। इसे खाने से पशुओं में कई रोग हो जाते हैं। अगर गाय या भैंस इसे खा लेती हैं तो उनके थनों में सूजन आ जाती हैऔर वे मर भी सकतीं हैं।

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रोकथाम के तरीके

  • इस खरपतवार को फूल आने से पहले उखाड़ कर जला देना चाहिए ताकि इसके बीज न बन पाएं और न फैल पाएं।
  • खरपतवार को उखाड़ते समय दस्तानों और सुरक्षात्मक कपड़े पहनने चाहिए। गाजर घास के ऊपर 20 प्रतिशत साधारण नमक का घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • हर्बीसाइड जैसे शाकनाशी रसायनों में ग्लाईफोसेट, 2, 4-डी, मेट्रीब्युजिन, एट्राजीन, सिमेजिन, एलाक्लोर और डाइयूरान आदि प्रमुख हैं।
  • अगर घास कुल की वनस्पतियों को बचाते हुए केवल गाजर घास को ही नष्ट करना है तो मेट्रीब्युजिन का उपयोग करना चाहिए|
  • मैक्सिकन बीटल (जाइगोग्रामा बाईकोलोराटा) जो इस खरपतवार को बहुत मजे से खाता है, इसके ऊपर छोड़ देना चाहिए। इस कीट के लार्वा और वयस्क पत्तियों को चटकर गाजर घास को सुखाकर मार देते हैं।

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