किसानों को बोरिंग के लिए अब नहीं होगी पैसों की कमी, पढ़िए पूरी ख़बर

किसानों को बोरिंग के लिए अब नहीं होगी पैसों की कमी, पढ़िए पूरी ख़बरसिंचाई का सबसे प्रचलित साधन ट्यूबवेल है।

लखनऊ। उन किसानों के लिए अच्छी ख़बर है जो पैसे की कमी के चलते बोरिंग नहीं करवा पा रहे थे। उत्तर प्रदेश शासन ने लघु एवं सीमान्त कृषकों को कृषि उत्पादन के लिए सहायता (निःशुल्क बोरिंग योजना) के तहत सामान्य किसानों के लिए 22 करोड़ 65 लाख 35 हजार रुपए की धनराशि स्वीकृत की है।

इस पैसे का उपयोग योजनान्तर्गत पात्र कृषकों को अनुदान की सुविधा उपलब्ध कराकर व तकनीकी मार्गदर्शन देकर निजी लघु सिंचाई संसाधन उपलब्ध कराने में किया जाएगा। इस योजना के लिए 38.83 करोड़ रुपये की धनराशि का प्राविधान किया गया है। इस सम्बंध में लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल विभाग द्वारा जारी शासनादेश में अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई सम्बंधित प्रखण्ड को निर्देशित किया गया है कि जनपदों की वास्तविक आवश्यकता को आंकलन करते हुए निर्धारित भौतिक लक्ष्यों के सापेक्ष नियमानुसार बजट प्राविधान की सीमा के अधीन वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जाएं।

यूपी के बड़े पैमाने में भूमिगत जल से होती है सिंचाई। फोटो- विनय

जल संरक्षण से बीहड़ में बढ़ेगा उत्पादन

लखनऊ। बीहड़ भूमि में जल संरक्षण तकनीक अपना कर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यह बात उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम के प्रबन्ध निदेशक अजय यादव ने उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम मुख्यालय पर बीहड़ उपचार के लिए परियोजना प्रबन्धकों एवं अवर अभियन्ताओं के लिए आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कही।

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उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम सोडिक तृतीय परियोजना के अन्तर्गत प्रदेश के 12 जिलों में बीहड़ उपचार का कार्यक्रम चला रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्बन्धित जिलों के परियोजना प्रबन्धकों एवं अवर अभियन्ताओं के समक्ष बीहड़ उपचार के समय आने वाली कठिनाइयों का समाधान भी किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रारम्भ करते हुए उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम के संयुक्त प्रबन्ध निदेशक डा. सत्येन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि जल, जंगल, जमीन और जन के संरक्षण के लिए बीहड़ उपचार की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्पादन बढ़ाने के लिए तीन बातों की आवश्यकता होती है, 1. क्षेत्र का विस्तार किया जाये, 2. फसल सघनता बढ़ायी जाये 3. प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ायी जाये। डॉ. सिंह ने कृषकों की आमदनी दुगना करने के उपाय भी बताये। उनका कहना था कि कृषकों की आमदनी दुगनी करने के लिए उनकी कृषि की लागत कम कर दी जाये तथा उनके उत्पादन का मूल्य सम्वर्धन करा दिया जाये। इन्हीं दोनों उपायों से ही कृषकों की आमदनी दुगनी की जा सकती है। उन्होंनें कृषि में जल की जरुरत पर जोर देते हुए कहा कि जल की प्रत्येक बूँद का उत्पादन में उपयोग किया जाये।

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प्रशिक्षण कार्यक्रम में आये हुए प्रतिभागियों को बीहड़ उपचार की तकनीक के बारे में डॉ. केबी. सिंह, पूर्व कृषि निदेशक, उ.प्र. ने विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में निगम मुख्यालय पर सलाहकार बीहड़ राजबली यादव ने बीहड़ उपचार के लिए बनायी जाने वाली संरचनाओं को कैसे बनाया जायेगा, सर्वेक्षण कैसे किया जायेगा, के बारे में प्रायोगिक प्रस्तुति दी। यूपी भूमि सुधार निगम विश्व बैंक के सहयोग से चलायी जा रही सोडिक तृतीय परियोजना के अन्तर्गत हुई बचत से प्रदेश के 12 जिलों में 16 हजार हेक्टेयर बीहड़ भूमि के उपचार का कार्यक्रम चला रहा है।

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