किसान आंदोलन से प्रभावित होगी खरीफ की बुवाई, पैदावार पर भी पड़ेगा असर

किसान आंदोलन से प्रभावित होगी खरीफ की बुवाई, पैदावार पर भी पड़ेगा असरखेत में काम करतीं महिलाएं। (फोटो-विनय)

लखनऊ। बेहतर मानसून को देखते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने इस साल खरीफ सीजन 2017-18 में रिकार्ड 27.3 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है, लेकिन देशभर में चल रहे किसान आंदोलन से सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं। खरीफ के इस सीजन में जिस समय किसानों को खेत में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तिल, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, तिल और सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई तैयारी करनी चाहिए उस समय किसान सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय को खरीफ मौसम में फसल बुवाई के विभिन्न राज्यों से जो प्रारंभिक रिपोर्ट मिली है उसके अनुसार 9 जून तक देश में 81.33 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी लेकिन इसके बाद बुवाई की रफ्तार धीमी हो गई है।

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कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार धान की बुवाई 5.51 लाख हेक्टेयर में अभी तक हुई है लेकन अनुकूल मौसम को देखते हुए यह आंकड़ा 6.00 लाख हेक्टेयर होना चाहिए। दलहनी फसलों की बुवाई 1.64 लाख हेक्टेयर में की गई है जबकि यह अभी तक 2.1 लाख हेक्टेयर में हो जानी चाहिए। मोटे अनाजों की बुवाई 3.89 लाख हेक्टेयर में हुई जो 4 लाख हेक्टेयर में हो जानी चाहिए थी। इसके अलावा कपास, मूंगफली, तिलहन की बुवाई भी शुरूआत में तेजी से हो रही थी जिसकी रफ्तार अभी धीमी हो गई है।

खेत में किसान। (फोटो-शुभम शर्मा)

एग्रो इकोनामिक्स और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के डिपार्टमेंट आफ एग्रीक्ल्चर इकोनामिक्स के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. रामप्रवेश सिंह ने बताया '' इस साल अच्छे मानसून के पूर्वानुमान से यह उम्मीद थी कि इस साल बुवाई का रबका बढ़ने के साथ ही पैदावार भी रिकॉर्ड होने का आकलन किया गया था लेकिन किसान खेती का काम छोड़कर सड‍़क पर है। जिसका कृषि पैदावार पर व्यापक असर पड़ेगा। ''

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उन्होंने कहा कि अगर फसल बुवाई में देरी हेा गई तो उसकी भरपाई जल्दी नहीं होगी, इसलिए सरकार का चाहिए कि वह इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करें। शुक्रवार को हजारों की संख्या में किसान खेती का कामकाज छोड़कर राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने निकले थे, इकसे एक दिन पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों किसानों ने धरना-पद्रर्शन करके सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा '' सरकार किसानों की मांगों पर अगर विचार नहीं करती है तो किसान इस साल खरीफ में सरकार को सबक सिखाने का तैयार बैठा है। फसलों की लागत ही नहीं निकलेगी तो फिर बुवाई करने से क्या फायदा। ''

किसानों के आंदोलन का केन्द्र बने मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के ग्राम कुचड़ौद के किसान बद्रीलाल कुमावत ने बताया '' खरीफ फसलों में प्रति बीघा बुवाई का खर्च 6 हजार रुपए आता है, इसके बाद फसल तैयार होने के बाद किसानों को अपनी लागत भी निकालना मुश्किल होता है। ऐसे में जबतक सरकार हमारी मांगों पर विचार नहीं करती है, तब तक बुवाई करके क्या फायदा। ''

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के रिठवाड़ गांव के किसान बैजनाथ पटेल ने बताया ''सरकार जब तक किसानों के हित में फैसला नहीं लेती है तबतक हम बुवाई नहीं करेंगे। '' उन्होंने कहा कि सरकार गेहूं का 2100 रुपए, उड़द, मूंग, अरहर और चना का 6000 से लेकर 7000 और सोयाबीन का 4500 से लेकर 5000 रुपए प्रति कुंतल समर्थन मूल्य घोषित करे। तभी खेती लाभ का धंध बनेगी। किसानों को सब्सिडी का लाभ तुरंत मिले अभी इसको खाते में आने में बहुत देरी होती है।

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने खरीफ सीजन में पिछले साल के मुकाबले फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल और खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले साल इस सीजन में 91.44 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुवाई हुई थी इस बार 91.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है। लेकिन उत्तर प्रदेश में भी अभी तक मात्र 10 प्रतिशत ही बुवाई हुई है।

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