सहफसली खेती बन रही किसानों के लिए मुनाफे का ज़रिया

सहफसली खेती बन रही किसानों के लिए मुनाफे का ज़रियाफोटो: गाँव कनेक्शन

रिपोर्टर- सुधा पाल

लखनऊ। किसान मौसम और समय को महत्व देते हुए पारंपरिक खेती से बाहर निकलकर आधुनिक खेती के तहत मिडो सिस्टम से फलों की खेती कर रहे हैं। इसके जरिए किसान फलों के बीच में अन्य फसल उगाकर अतिरिक्त आय से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

मिडो सिस्टम एक ऐसी प्रणाली है जिसमें एक फसल के पौधों को खेतों में पेड़ी की तरह उचित दूरी पर लगाया जाता है। पौधों की इस सीमित दूरी के बीच में अन्य ऐसी फसल लगाई जाती हैं जो लगाई गई प्रमुख फसल से पहले ही तैयार हो जाए। इस तरह की प्रणाली अधिकतर फलों की खेती में उपयोग की जाती है। इसके साथ ही एक ही जमीन पर कई तरह की फसलों के लगने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है।

दो एकड़ की जमीन पर आम के लगभग 200 पेड़ लगे हैं। इनके साथ ही बैंगन भी लगे हैं। एक आम के पेड़ से लगभग 30 किलो आम निकल आता है। इसके साथ ही बैंगन से भी अलग कमाई होती है इसलिए इसमें मुनाफा है। ऐसा पिछले साल से कर रहा हूं और इससे पहले फलों की जगह चना उगाता था।
राजेश, किसान

यह प्रणाली किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन रही है। ऐसे छोटे किसान जिनके पास जमीन की कमी है, इस प्रणाली से कम जगह में ज्यादा पैदावार कर रहे हैं।

सीतापुर के किसान सतनोहर ने बताया कि उनके पास लगभग एक एकड़ में अमरूद के पेड़ हैं। शुरुआती दिनों में उन्होंने पौधों के बीच में टमाटर के पौधे भी लगा दिए थे। इससे कुछ ही महीनों में टमाटर की फसल पूरी हो गई और जिससे उन्हें अच्छे उत्पादन के साथ उसकी अच्छी कीमत मिली। ऐसे ही अमेठी के लालबाबू बताते हैं कि आंवले के साथ उन्होंने इस प्रणाली को अपनाते हुए सब्जियों की बुवाई की जिससे उनकी जमीन की खाली जगह से भी खेती की जा रही है। वे हर साल लागत से दो गुना उत्पादन लेते हैं।

उद्यान की खेती के प्रति भी किसान जागरूक हो रहें हैं। इस प्रणाली से न केवल अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं बल्कि उनका समय भी बच रहा है।
प्रभाकर त्रिपाठी, उद्यान विशेषज्ञ

यह प्रणाली क्यों है विशेष

फल की खेती करने वाले किसान इससे पहले पारंपरिक खेती करते थे जिसमें वे एक ही मैदान में फल के पौधे लगाते थे और उत्पादन के लिए उसी पर निर्भर रहते थे। इस तरह उन्हें लगभग तीन-चार साल पौधों में फल आने तक का इंतजार करना पड़ता था। इसमें किसानों का कीमती समय भी खपता था। वहीं मिडो सिस्टम से किसान अब एक साथ कई फसल की खेती कर रहें हैं। आम, अमरूद, बेर, नींबू, आंवले और अन्य फलों के साथ तरोई, मिर्चा, लहसुन, प्याज आदि सब्जियां किसान लगा रहें हैं। जबतक प्रमुख फसल तैयार होने में वर्षों का समय लगेगा तब तक कुछ ही महीनों में लगी फसलों के बीच अन्य फसल तैयार हो जाएगी।

कितनी दूरी पर लगाएं पौधे

उद्यान विशेषज्ञ प्रभाकर त्रिपाठी बताते हैं कि इस प्रणाली से खेती करने के लिए पौधों की उचित दूरी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। फल के पेड़ों पर पौधों की दूरी सुनिश्चित की जाती है। जिस फल का जितना बड़ा पेड़ होगा उतनी ही बड़ी उनके पौधों की दूरी होगी। जिस प्रकार अमरूद में पौधों के बीच की दूरी 4.5 मीटर और आम की 10 मीटर की दूरी पर पौधे लगाने चाहिए। लगभग सभी खट्टे फलों के पौधों के बीच की दूरी 6.3 मीटर होनी चाहिए।

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