भारतीय मसालों की खुशबू से गुलजार हो रही विदेशी रसोई, रिकॉर्ड निर्यात

भारतीय मसालों की खुशबू से गुलजार हो रही विदेशी रसोई, रिकॉर्ड निर्यातफोटो: इंटरनेट

पूरी दुनिया में मसाला बाजार में जबर्दस्त घुसपैठ करके भारत को टक्कर देने की लगातार कोशिश की जा रही है, लेकिन भारतीय कृषि वैज्ञानिकों और किसानों की मेहनत की बदौलत भारत दुनिया के मसाला बाजार का सिरमौर बना हुआ है।

अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

भारतीय मसाला बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. ए. जयतिलक बताते हैं, “कड़े खाद्य सुरक्षा मानकों के बावजूद 2016-2017 के दौरान बेहतर मूल्य और मात्रा के साथ भारत के मसाला निर्यात में अब तक की सबसे अधिक रिकॉर्ड 12 प्रतिशत की वृद्धि है।''

17 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा मसालों का निर्यात हुआ

डॉ. जयतिलक बताते हैं, “इस दौरान भारत ने 17664.61 करोड़ रुपए की कीमत के 9,47,790 टन मसालों का निर्यात किया गया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मसालों की मांग बनी हुई है। 2015-2016 के दौरान 16238.23 करोड़ की 8,43,255 टन का कुल निर्यात किया गया था। यह वृद्धि दर रुपए के संदर्भ में 9 फीसदी और डॉलर के संदर्भ में 9 फीसदी है।“

मिर्च के निर्यात में 15 प्रतिशत की वृद्धि

वहीं, वित्त वर्ष 2016-2017 के दौरान भारत ने कुल 5,070.75 करोड़ रुपए की कीमत के 4,00,250 टन मिर्च का निर्यात किया। मिर्च के निर्यात में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मूल्य के मामले में 27 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।

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मिर्च से ज्यादा जीरा का निर्यात

भारतीय मसाला बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मसालों में जीरा, मिर्च के बाद सबसे अधिक निर्यात किए जाने वाला मसाला रहा। जीरा के निर्यात में मात्रा के लिहाज से 22 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मूल्य के हिसाब से इसमें 28 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई। भारत से 2016-2017 में 1963.00 करोड़ रुपए की कीमत का 1,19,000 टन जीरा निर्यात किया गया।

सौंफ और इलायची के निर्यात में भी कमी नहीं

पिछले वर्ष की तुलना में जिस मसाले में सर्वाधिक वृद्धि देखी गई, वह सौंफ हैं। इसकी निर्यात मात्रा में इस वर्ष 129 फीसदी वृद्धि, जबकि कुल मूल्य में 89 फीसदी की वृद्धि हुई। लहसुन, जायफल, जावित्री, और अजवाइन जैसे मसालों के निर्यात में भी वृद्धि हुई है। डॉ. जयतिलक ने बताया कि मसाला बोर्ड के प्रयासों के चलते देश के प्राकृतिक रूप से ऑर्गेनिक क्षेत्र उत्तर पूर्व में बड़ी इलायची के उत्पादन में वृद्धि हुई हैं और इसके निर्यात में 30 फीसदी की वृद्धि हुई है।

केरल में मसालों पर शोध की शुरुआत

विश्व मसाला उत्पादन में भारत का महत्वपूर्ण स्थान है। विभिन्न प्रकार की जलवायु के कारण देश में लगभग सभी तरह के मसालों का बढ़िया उत्पादन हो रहा है। देश में मसालों की नई किस्मों पर शोध और विकास के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने 1971 के दौरान अखिल भारतीय समन्वित मसालों और काजू सुधार परियोजना (AICSCIP) के तहत केरल में मसालों पर शोध की शुरुआत की।

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मसालों की विविध किस्मों का पौधरोपण

वर्ष 1975 के दौरान कोझीकोड, केरल में भारतीय मसाला अनसुंधान संस्थान की स्थापना की गई। यह संस्थान कालीकट शहर से 11 किलोमीटर दूर चेवालूर में 14.3 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित किया गया है। यहां के अनुसंधान फार्म पट्टे पर 94.8 हेक्टेयर जमीन है, जिसमें मसालों की विविध किस्मों के पौध रोपण और संरक्षण का कार्य होता है। आईआईएसआर देश में मसालों पर सबसे बड़े मसाला अनुसंधान नेटवर्क, अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं का मुख्यालय भी है। इस संस्थान में काली मिर्च, इलायजी, अदरक, हल्दी, लौंग, दालचीनी, जमैका की गोल मिर्च, बनिला और शिमला मिर्च की फसलें उगाई जाती हैं।

मसालों का सबसे बड़ा सुरक्षित भंडार

भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान में मसालों का सबसे बड़ा सुरक्षित भंडार है, जिसमें 2575 किस्म की काली मिर्च, 435 किस्म की इलायची, 685 अदरक और 1040 हल्दी की किस्में हैं। इसके अलावा संस्थान में बनिला, शिमला मिर्च और अऩ्य पौध प्रजातियां जैसे दालचीनी, लौंग, जायफल और दारू-सिला के जीन का भंडारण है।

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