पत्थरों वाली घाटी में महिला किसानों को मिली कमाई की गारंटी

पत्थरों वाली घाटी में महिला किसानों को मिली कमाई की गारंटीमहिलाओं की आय 5000 से 6000 रुपए तक बढ़ी।

लखनऊ। जम्मू-कश्मीर का ज्यादातर हिस्सा इस समय हिंसा की चपेट में हैं। रोज कहीं न कहीं से आतंकी हमले की खबर आती है। युवा हाथों में पत्थर लिए दिख रहे हैं। बावजूद इसके हिंसाग्रस्त जम्मू-कश्मीर में कहीं कुछ अच्छा भी हो रहा है।

जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में दुग्ध उत्पादन के काम से महिलाएं स्वावलंबी बन रही हैं। उनको रोजगार तो मिल ही रहा साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार भी आ रहा है। श्रीनगर से 40 किलोमीटर दूर पुलवामा के स्वयंसेवी संगठन में सुपरवाइजर इरफाना गुल का कहती हैं कि राज्य दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के साथ जुड़ने के बाद न केवल परिवारों की आय बढ़ी है लेकिन इसने सैकड़ों महिलाओं को नई पहचान भी दी है। यह संघ गुजरात की तर्ज पर दूध के संग्रह का काम कर रहा है।

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इरफाना का कहना है कि लोगों को दूध की अच्छी कीमत मिल रही है। उनकी आय बढ़ रही है। उनके घर के हालात बदल रहे हैं। आय के एक स्थायी साधन से उनका जीवन बदल रहा है। अब यहां की महिलाएं पर्यटन और बागवानी पर ही निर्भर हुआ करती थीं। इरफाना और उनके राज्य की कई दूसरी महिला दुग्ध किसानों ने हाल ही में आणंद में गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) का दौरा किया। यह फेडरेशन अमूल ब्रांड का संचालन करता है। इरफाना ने कहा, 'इस दौरे ने हमें और प्रोत्साहित किया है। हमने देखा कि कैसे दुग्ध आंदोलन से जुड़कर किसानों को फायदा हुआ है। इस मॉडल में हम सभी मालिक और बराबर के हिस्सेदार हैं।'

इरफाना और शाइस्ता यूसुफ जैसी महिलाओं को डेयरी से हर महीने कम से कम 5,000 से 6,000 रुपए की अतिरिक्त आय हो रही है और यह उनकी आजीविका का स्थायी स्रोत है। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार जम्मू-कश्मीर में इसकी शुरुआत वर्ष 2004 के आसपास हुई जब जीसीएमएमएफ को वहां की संस्थाओं के साथ काम करने के लिए कहा गया।

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दो बीमार संस्थाओं कश्मीर वैली मिल्क फेडरेशन और जम्मू मिल्क फेडरेशन को मिलाकर जम्मू-कश्मीर दुग्ध उत्पादक सहकारी लि. (जेकेएमपीएल) बनाई गई। जीसीएमएमएफ इसके बोर्ड में शामिल है लेकिन उसकी इसमें कोई वित्तीय हिस्सेदारी नहीं है। वह जेकेएमपीएल को तकनीकी, वित्तीय और विपणन संबंधी सुझाव देता है। 2004 में जम्मू-कश्मीर में केवल 3,000 किसान दुग्ध कारोबार से सक्रियता से जुड़े थे। यह संख्या अब 15,000 पहुंच चुकी है।

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जेकेएमपीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मयंक तिवारी ने बताया कि इस समय राज्य में करीब 350 स्वचालित संग्रह केंद्र हैं और रोजाना लगभग 30,000 लीटर दूध का संग्रह हो रहा है। यह 30 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रहा है। जम्मू में गाय के दूध का फैट 615 रुपए और भैंस के दूध का फैट 600 रुपए प्रति किलो है।

कश्मीर में गाय के दूध के फैट की कीमत करीब 600 रुपए प्रति किलो है। इरफाना ने कहा कि पहले उन्हें प्रति लीटर दूध की कीमत 18 रुपए से अधिक नहीं मिलती थी लेकिन अब यह 29-30 रुपए पहुंच गई है। राज्य में टोंड दूध की कीमत 36 रुपए है जबकि दिल्ली में यह 42 रुपए है। जेकेएमपीएल का कारोबार 43 फीसदी की सालाना बढ़त के साथ 30.2 करोड़ रुपए पहुंच चुका है, हालांकि जम्मू-कश्मीर में अमूल नाम से नहीं बल्कि स्नोकैप ब्रांड से दुग्ध उत्पाद बेचे जा रहे हैं।

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