15 साल में न्यूनतम स्तर पर पहुंचा लहसुन का भाव, तीन रुपए प्रति किलो मिल रहा दाम

बंपर उत्पादन के कारण लहसुन के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं। एक किलो लहसुन तीन रुपए से लेकर 15 रुपए तक बिक रहा है। ऐसे में फसल की लागत नहीं निकलने के कारण लहसुन किसान परेशान हैं।

बाराबंकी। इस बार लहसुन की बंपर फसल होने के कारण लहसुन के दाम औंधे मुंह गिरकर गए है। लहसुन का भाव 15 सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे लहसुन की खेती करने वाले किसानों को लागत भी निकालना मुश्किल हो रहा है। एक किलो लहसुन तीन रुपए से लेकर 15 रुपए तक बिक रहा है। फसल की लागत नहीं निकलने के कारण लहसुन किसान परेशान हैं।
देश में सबसे ज्यादा लहसुन की पैदावार मध्य प्रदेश में होती है। इसके साथ ही बाराबंकी जिले में लहसुन और हरी मिर्च की सहफसली खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर उत्तर दिशा में रामनगर में लहसुन की मंडी लगती है। यहां पर लहसुन बेचने आए किसान त्रिवेणी मौर्या बताते हैं," इस साल लहसुन पिछले 15 वर्षों में सबसे कम भाव में बिक रहा है। इस साल यहां की मंडी में तीन रुपए से लेकर 15 रुपए तक बिक रहा है, जिससे हम किसानों का लहसुन की लागत भी निकल रही है।"

वहीं फतेहपुर ब्लाक के बेलहरा निवासी युवा किसान गुलाम नबी (22वर्ष) कहते हैं," इस वर्ष हमने 2 एकड़ क्षेत्रफल में लहसुन की खेती की थी। जब हमने लहसुन का बीज लिया था तो 35 सौ से लेकर 4000 रुपए प्रति कुंटल के हिसाब से मिला था। खाद-पानी और नीराई मिलाकर एक एकड़ क्षेत्रफल में चालिस हजार से पच्चास हजार तक की लागत आई थी। लेकिन लहसुन का भाव इतना कम मिल रहा है कि अब एक एकड़ में बीस हजार से पच्चीस हजार रुपए मिल जाए तो यही बड़ी बात है।"
लहसुन की खेती से लाखों की कमाई कैसे करनी है फतेहपुर के रामबाबू से सीखिए बंपर उत्पादन के कारण लहसुन के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं। एक किलो लहसुन तीन रुपए से लेकर 15 रुपए तक बिक रहा है। ऐसे में फसल की लागत नहीं निकलने के कारण लहसुन किसान परेशान हैं।

किसान रामसुमिरन मौर्य (45वर्ष) बताते हैं," लहसुन की खेती में लागत अधिक लगती है और बहुत मेहनत होती है। इसके बोने से लेकर और इसको घर में भंडारण करने तक मेहनत ही मेहनत रहती है। मेहनत के हिसाब से कम से कम 8000 रुपए प्रति कुंतल का भाव हो तो शायद कुछ मुनाफा मिल जाता है। लेकिन इस वर्ष 1500 रुपये प्रति कुंटल का भी भाव मिलना मुश्किल हो रहा है।" वही रामनगर मंडी मे लहसुन का व्यापार करने वाले विनोद मोर्य बताते हैं, इस वर्ष लहसुन की मंदी के कारण बाहर से व्यापारी भी मंडी में नहीं आ रहे हैं। बाहर की मंडियों में भी लहसुन की खपत अच्छी नहीं है, जिससे रेट नीचे गिरते जा रहे हैं।
रामनगर की मंडी में ही अपना लहसुन बेचने आए अवधेश राजपूत बताते हैं कि लहसुन का भंडारण करने के लिए हमारे जिले में कोई भंडारण ग्रह नहीं है जिसमें हम लोग अपना लहसुन भंडारण करके ज्यादा समय तक रोक सके घरों में भंडारण किया गया लहसुन ज्यादा समय तक नहीं रुक पाता है जिससे हम किसानों को अपना माल ओने पौने दामों पर बेचना मजबूरी होती है

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