इस युवा किसान ने अपनी उपज को बनाया ब्रांड और जीत लिया ‘फल रत्न’ पुरस्कार

Kushal MishraKushal Mishra   29 March 2018 2:45 PM GMT

इस युवा किसान ने अपनी उपज को बनाया ब्रांड और जीत लिया ‘फल रत्न’ पुरस्कारयुवा प्रगतिशील किसान आनंद वीर सिंह।

हरियाणा के इस युवा किसान ने न सिर्फ जैविक खेती में नई तकनीकों को अपनाकर खेती को मुनाफे का जरिया बनाया, बल्कि अपनी उपज को बाजार में एक ब्रांड भी बनाया। इस युवा किसान की लगन को देखते हुए हरियाणा सरकार ने हाल में इन्हें ‘फल रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया है।

हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गिलांखेड़ा गांव के यह युवा किसान हैं आनंदवीर सिंह। मुंबई में एमकॉम की पढ़ाई करने के बाद आनंदवीर अपने गांव वापस लौट आए और फिर 10 एकड़ में अमरूद की बागवानी शुरू की। शुरुआत के तीन-चार सालों तक आनंदवीर बागवानी में रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते रहे, मगर उन्हें कोई खास उत्पादन मिला और न ही बाजार में सही कीमत।

फतेहाबाद के कुछ हिस्सों में जलस्तर भी कम होने की वजह से आनंद वीर ने इसका ध्यान रखते हुए अपने बागों में जैविक खेती को अपनाना शुरू किया। इतना ही नहीं, खेती की नई तकनीकों को भी अपनाना शुरू किया। पिछले 8 सालों से बागवानी कर रहे आनंदवीर के पास आज अपना पैकिंग हाउस है और वर्मी कंपोस्ट की यूनिट है।

‘गाँव कनेक्शन’ से फोन पर बातचीत आनंद वीर में बताते हैं, “जब शुरू में कुछ ज्यादा फायदा नहीं हुआ तो मैंने जैविक खेती को धीरे-धीरे अपनाना शुरू किया। इसके साथ ही सिंचाई को लेकर भी मैंने ड्रिप इरीगेशन पद्धति को अपनाना।“

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अपने पॉलीहाउस में किसानों को जानकारी देते युवा किसान आनंद वीर।

आगे बताते हैं, “इसके बाद मैंने अमरूद की ऐसी किस्म की बुआई की, जिसका फल आने पर उसके अंदर के बीज न सिर्फ आसानी से चबाने योग्य होते हैं, बल्कि काफी मीठा भी होता है। और अब मैंने न सिर्फ जैविक तरह से बागवानी की, बल्कि बूंद-बूंद सिंचाई (ड्रिप इरीगेशन) से खेती की। जल्द ही मुझे पारंपरिक खेती के मुकाबले अच्छी पैदावार मिलने लगी।“

आनंद वीर ने बताया, “इसके बाद वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल के लिए मैंने अलग से यूनिट तैयार की और बाजार में हमें अमरूद की अच्छी कीमत मिल सके, इसके लिए जैविक तरह से उगाए गए अमरूदों की पैकिंग के लिए अलग से पैकिंग हाउस भी बनाया और खुद बेचने की कोशिश की। धीरे-धीरे बाजार में हमारा अमरूद हिसार सफेदा के नाम से ब्रांड बनने लगा और उसकी कीमत भी अच्छी मिलने लगी।“

वह आगे बताते हैं, “आज की तारीख में ठेकेदार हमारे बाग आते हैं और वे 3 लाख रुपए प्रति एकड़ देने के लिए भी तैयार हैं, मगर हम उन्हें नहीं देते हैं।“

अमरूद के साथ आज आनंद वीर करीब 22 एकड़ में किन्नू (एक तरह का संतरा) की बागवानी भी कर रहे हैं। इसके अलावा पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती भी कर रहे हैं। आनंद वीर अपने कुल 32 एकड़ में आज न सिर्फ पूरी तरह से जैविक तरह से खेती को अपना रहे हैं, साथ ही बूंद-बूंद सिंचाई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वर्मी कंपोस्ट यूनिट के बारे में पूछने पर आनंद वीर आगे बताते हैं, “जैविक खेती को अपनाने के लिए हमने वर्मी कंपोस्ट की अलग से यूनिट लगाई और गोबर गैस प्लांट भी लगवाया। इसके अलावा हम जीवामृत का भी उपयोग कर रहे हैं, साथ नीम और धतूरे के प्रयोग से दवाई बनाकर स्प्रे भी करते हैं।“ आगे कहते हैं, “हमने अपने बागों के आस-पास सोलर सिस्टम भी लगवाया, जिससे सिंचाई आसानी से कर पा रहे हैं।“

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किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में बताते किसान आनंद वीर।

बागवानी में एक नई पहचान बनाने के लिए आनंद वीर सिंह को हाल में रोहतक में हुए तृतीय कृषि नेतृत्व सम्मेलन-2018 में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने ‘फल रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया।

युवाओं का खेती की ओर कम रुझान के सवाल पर प्रगतिशील किसान आनंद वीर कहते हैं, “मुझे मेरे पिता प्रहलाद सिंह से खेती के लिए प्रेरणा मिली। इसलिए मैं पढ़ाई पूरी कर वापस गांव आया। आज के युवाओं को भी गांव वापस आने की जरुरत है और खेती की नई तकनीक अपनाने की जरुरत है ताकि खेती को एक मुनाफे का सौदा बनाए। कई ऐसे युवा किसान हैं, जो खेती में विविधता लाकर आज अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।“

वह आगे कहते हैं, “आज हम पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं, जो आने वाले समय में विदेश के लिए भी निर्यात की जाएगी। आज जरूरत है कि किसान खेती में अपनी लागत को कम करे, रासायनिक कीटनाशकों से बचे और अच्छी उपज पाने के लिए जैविक खेती करे ताकि उसे अच्छा मुनाफा मिले। “

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