तीखी मिर्च किसानों के जीवन में ला रही मिठास

तीखी मिर्च किसानों के जीवन में ला रही मिठासकिसानों के अर्थिक जीवन में मिठास का काम करती है हरी मिर्च की खेती।

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश का बाराबंकी जिला अफीम, मेंथा, आलू के साथ-साथ हरी मिर्च व लहसुन की सहफसली खेती के लिए मशहूर है। स्वाद में तीखी पर यहां के किसानों के अर्थिक जीवन में मिठास का काम करती है हरी मिर्च की खेती।

जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर उत्तर फतेहपुर ब्लाक के बेलहरा-भटुवामऊ सौरंगा व पास पड़ोस के गाँवों में लगभग 100 एकड़ क्षेत्रफल में रबी की फसल में लहसुन की बुवाई की जाती है और इसी में मिर्च की बुवाई व रोपाई भी हो रही है।

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बाराबंकी के अलग-अलग ब्लाकों में 1500 एकड़ से भी ज्यादा रकबे में हरी मिर्च की खेती की जाती है और एक लाख अस्सी हजार कुन्टल के लगभग हरी मिर्च का उत्पादन करते हैं।
जय करन सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, बाराबंकी

बड़े स्तर पर मिर्च की खेती कर रहे सौरंगा गाँव के किसान अजमत अली (35 वर्ष) कहते हैं, “हमने आधा एकड़ में लहसुन व मिर्च की खेती की है जिसमें लगभग 35 हजार रुपए की लागत लगी है और इसमें हमें लागत हटाकर अब तक 30 हजार रुपए की कमाई हुई है।” अजमत आगे बताते हैं, “अगर कोई बीमारी (उकठा) का प्रकोप न हुआ तो मिर्च से लगभग 40 हजार रुपए की आमदनी और मिलने का अनुमान है। सोल्जर, गोमती, यूएस-917 जैसी किस्में इस क्षेत्र ज्यादा रोपाई की जाती है।”

वहीं बेलहरा निवासी संतराम मौर्या कहते हैं, “हमने इस वर्ष एक एकड़ में मिर्च व लहसुन बोई है जिसमें हमारी लागत लगभग 75000 रुपए लगी है। अभी तक हुई आमदनी की बात करें तो लहसुन व मिर्च की सहफसली खेती से अभी तक दो से ढाई लाख रुपए की आमदनी कर चुके हैं।” भटुवामऊ निवासी बीरेन्द्र मौर्या (40 वर्ष) कहते हैं, “बाराबंकी के बेलहरा व भटुवामऊ जैसे ग्रामीण अंचलों में अब परंपरागत खेती के मुकाबले न केवल उनकी आय में इजाफा हो रहा है बल्कि आस-पास के गाँवों के किसानों का भी मन औद्योगिक खेती करने पर केंद्रित हो रहा है।”

मिर्च की खेती से किसान कमा रहे हैं हजारों रुपये।

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