भारत के इस गाँव में बसता है ‘मिनी लंदन’

भारत के इस गाँव में बसता है ‘मिनी लंदन’मैकलुस्कीगंज की एक दृश्य।

लखनऊ। भारत में एक गाँव ऐसा भी है, जिसे ग्रामीण 'मिनी लंदन' बुलाते हैं। जानते हैं यह गाँव कहां है? यह कस्बा गाँव है झारखंड की राजधानी रांची से उत्तर-पश्चिम में 65 किलोमीटर की दूरी पर और इसका नाम है मैकलुस्कीगंज। यहां के लोग आज भी इस क्षेत्र को 'मिनी लंदन' कहकर पुकारते हैं। आईये आपको बताते हैं कि यह गाँव आखिर कैसे मिनी लंदन नाम से मशहूर हो गया।

मैकलुस्की ने रखी थी इस गाँव की नींव

मैकलुस्कीगंज का रेलवे स्टेशन।

बात वर्ष 1930 की है, जब एक एंग्लो इंडियन व्यवसायी ने इसकी गाँव की नींव रखी थी। इस व्यवसायी का नाम था अर्नेस्ट टिमोथी मैकलुस्की। मैकलुस्की ने वर्ष 1930 के दशक में रातू महाराज से 10 हजार एकड़ जमीन लीज पर ली। घने जंगलों और आदिवासियों गाँवों के बीच इस जगह को मैकलुस्की ने कोलोनाइजेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के सहयोग से बसाया और तब इसका नाम मैकलुस्कीगंज पड़ा।

इस क्षेत्र में हैं 365 बंगले

एंग्लो इंडियन समुदाय की ओर से तैयार किया गया एक बंग्ला।

मैकलुस्कीगंज और आस-पास के गाँवों में 365 बंगले बने हुए हैं, जहां एंग्लो इंडियन समुदाय के लोग रहते थे। असल में, एक समय ऐसा आया जब अंग्रेज सरकार ने एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रति अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। इस स्थिति में एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रति बड़ा संकट खड़ा हो गया। तब मैकलुस्की ने अपने समुदाय को इसी गाँव में बसाया। धीरे-धीरे एंग्लो समुदाय के लोग आस-पास से ही नहीं, बल्कि दूर-दूर से यहां आना शुरू हो गए। इस समुदाय के लोगों ने यहां कई आकर्षक बंगले बनाए और वहीं रहने लगे। देखते ही देखते पश्चिमी संस्कृति के रंग-ढंग और एंग्लो समुदाय के लोगों की मौजूदगी ने इस क्षेत्र को लंदन का रूप दिया और तभी से यह कस्बा गाँव मिनी लंदन के नाम से मशहूर हो गया।

तब एक बुरा दौर भी आया

एक एंग्लो इंडियन परिवार की पुरानी फोटो।

यहां पर एंग्लो इंडियन समुदाय के लोगों के लिए एक ऐसा दौर आया, जब वह इस क्षेत्र को छोड़कर जाने लगे। ऐसे में धीरे-धीरे यह जगह एंग्लो इंडियन समुदाय के लोगों से अलग होने लगा। मगर आज भी यहां पर बने बंग्लों और इतिहास की वजह से इस क्षेत्र को मिनी लंदन कहा जाता है।

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