जीएसटी से दहशत में किसान, एक जुलाई से महंगी होगी खेती, लेकिन किस-किस पर पड़ेगा असर, पता नहीं

Ashwani NigamAshwani Nigam   23 Jun 2017 6:41 PM GMT

जीएसटी से दहशत में किसान, एक जुलाई से महंगी होगी खेती, लेकिन किस-किस पर पड़ेगा असर, पता नहींजीएसटी को लेकर किसानों में जागरुकता नहीं है

लखनऊ। एक जुलाई से भारत में खेती और महंगी होने वाली है। कारण 30 जून को आधी रात से देश में जीएसटी लागू हो जाएगी। एक जुलाई से पूरे देश में वस्तु एवं सेवाकर यानि जीएसटी कानून लागू होने जा रहा है। एक तरफ जहां इसको लेकर आम लोगों में तरह-तरह की आशंकाएं हैं, वहीं किसान इसको लेकर दहशत में हैं।

बेहतर मानसून और अच्छी बारिश में खरीफ की अधिक बुवाई और अधिक पैदावार की आस लगाए किसानों में जीएसटी को लेकर दहशत है। इस कानून से खेती किसानी में काम आने वाली सभी चीजें महंगी हो जाएंगी जिससे खेती की लागत बढ़ेगी। ललितपुर जिले के बिरधा ब्लॉक के ग्राम टिकरा तिवारी के रमेश तिवारी ने बताया, ‘जीएसटी के बारे में हम लोगों का पता चल रहा है कि खाद और कीटनाशक महंगे हो जाएंगे। इसको लेकर हम लोगों को कोई सही जानकारी नहीं दी जा रही है।’

ये भी पढ़ें: जीएसटी से किसानों को क्या मिलेगा सरकार ?

जीएसटी को लेकर खेती-किसानी पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसको लेकर किसानों को जागरूक करने का आदेश आया है, जल्द ही इसका अभियान शुरू किया जाएगा।
ज्ञान सिंह, कृषि निदेशक

एक तरफ जहां सरकार जीएसटी को आम लोगों के लिए सरल और आसान बनाने को लेकर प्रचार-प्रसार कर रही है वहीं उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की तरफ से जीएसटी को लेकर किसानों के मन में जो आशंका है उसको दूर करने के लिए कोई काम नहीं किया गया है।

इस बारे में उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक ज्ञान सिंह ने बताया, ‘जीएसटी को लेकर खेती-किसानी पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसको लेकर किसानों को जागरूक करने का आदेश आया है, जल्द ही इसका अभियान शुरू किया जाएगा।’ केन्द्र सरकार की तरफ से जीएसटी के प्रचार-प्रसार के लिए विभागों को बजट दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी कृषि विभाग ने अभी कोई काम नहीं किया है। यह हाल तब है जब कुछ दिन पहले ही केन्द्रीय राजस्व सचिव हंसमुख अधिया ने कुछ दिन पहले ही यूपी के दौरे पर आकर जीएसटी के प्रचार-प्रसार को लेकर मुख्यमंत्री और अधिकारियों के साथ बैठक की थी।

ये भी पढ़ें: जीएसटी सराहनीय, लेकिन लागू करने का तरीका कैसा होगा

गोरखपुर जिल के भटहट ब्लॉक के ग्राम टिकरिया के निवासी किसान रमेश यादव ने बताया, ‘जीएसटी को लेकर अखबार और टीवी के जरिए ही थोड़ी बहुत जानकारी मिली है लेकिन जीएसटी को लेकर वास्तविक जानकारी नहीं दी गई है। इतना लोग बता रहे हैं कि खाद और बीज जीएसटी से महंगे हो जाएंगे।’


जीएसटी के लागू होने से फसलों को बीमारियों से बचाने वाले कीटनाशकों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगेगा वहीं उर्वरक और ट्रैक्टर पर 12 प्रतिशत का टैक्स लगने का प्रावधान है। टैक्स के इस बोझ से किसानों को खेती में अधिक खर्च करना पड़ेगा। किसानों की चिंता को देश के जाने-माने अर्थशास्त्री भी वाजिब ठहरा रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के अध्यापक और स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. अश्विनी महाजन ने बताया, ‘भारत सरकार वस्तु एवं सेवा कर यानि जीएसटी एक जुलाई से लागू करने जा रही है। जीएसटी से देश के लघु उद्योग के लिए खतरनाक है। इससे लागू होने से लघु उद्यमियों को मिलने वाली छूट समाप्त हो जाएगी, जिसका असर किसानों पर पड़ेगा।’

ये भी पढ़ें: जीएसटी: जेबें और ढीली होंगी या मिलेगी राहत?

जीएसटी लागू होने से किसानों को अतिरिक्त टैक्स देना पड़ेगा। खाद और बीज पर टैक्स का दायरा बढ़ जाएगा। खाद और बीज पर जो छूट मिल रही है वह समाप्त हो जाएगी।
अतुल कुमार अनजान, राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारतीय किसान महासभा

उन्होंने बताया कि किसानों का लघु उद्यमियों से सीधा संबंध है। किसानों के उत्पाद को बहुत बड़ी मात्रा में यह लोग ही खरीदते हैं। ऐसे में किसानों के सामने संकट आ सकता है। जीएसटी के बारे में सरकार का दावा कि यह एक बहुत बड़ा कर सुधार है, जिससे कर प्रणाली में सुधार होगा लेकिन फिलहाल यह दिखता नहीं है। जीएसटी से मुद्रास्फीति घटेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में महंगाई बढ़ेगी तो इससे सबसे ज्यादा किसानों पर प्रभाव पड़ेगा। अश्विनी महाजन ने कहा कि सरकार को चाहिए जीएसटी को लेकर किसानों को जागरूक करे, इस कानून को लेकर जो भी आशंकाएं हैं उसका दूर करना चाहिए।

जीएसटी के विरोध में आवाज बुलंद कर रहे अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव अतुल कुमार अनजान ने कहा, ‘जीएसटी लागू होने से किसानों को अतिरिक्त टैक्स देना पड़ेगा। खाद और बीज पर टैक्स का दायरा बढ़ जाएगा। खाद और बीज पर जो छूट मिल रही है वह समाप्त हो जाएगी।’ उन्होंने कहा कि जीएसटी किसी भी कीमत पर किसानों के लिए हितैषी नहीं है।

भारतीय किसान यूनियन के मुख्य प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने बताया कि सरकार जो भी योजनाएं या नियम बनाती है उसको लागू करने से पहले न तो किसानों की राय लेती हैं और न ही उसको लेकर जागरूक करती है। जीएसटी को लेकर भी सरकार को रवैया हठधर्मी का है। इसको लेकर किसानों की जो आशंकाए हैं उसको दूर करने के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है।

देखिए- किसानों के लिए एमएस स्वामीनाथन के क्या थे सुझाव

ये भी पढ़ें- क्या किसान आक्रोश की गूंज 2019 लोकसभा चुनाव में सुनाई देगी ?

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top