क्यों ज़रूरी है किसानों के लिए मृदा सेहत कार्ड, कृषि मंत्री ने की है योजना का लाभ उठाने की अपील

क्यों ज़रूरी है किसानों के लिए मृदा सेहत कार्ड, कृषि मंत्री ने की है योजना का लाभ उठाने की अपीलप्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ। रविवार की सुबह केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने देश के किसानों से अपील की है कि वे स्वाइल हेल्थ कार्ड यानि मृदा सेहत कार्ड योजना का लाभ लें और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहयोग दें।

भारत सरकार ने फरवरी 2015 में किसानों के लिए इस योजना की शुरुआत की थी। सरकार का उद्देश्य है कि तीन साल में देश के लगभग 14 करोड़ किसानों को इस योजना का लाभ मिले। इस कार्ड में एक रिपोर्ट छपेगी, जो किसानों को अपने खेत या ज़मीन के लिए तीन साल में एक बार दी जाएगी। हम आपको बता रहे हैं मृदा सेहत कार्ड योजना क्या है और इसका लाभ देश के किसान किस तरह ले सकते हैं।

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क्या है योजना

इस योजना के अंतर्गत किसानों को एक मृदा सेहत कार्ड दिया जाएगा, जिसमें किसानों को उनकी मिट्टी के बारे में जानकारी दी जाएगी। मिट्टी की गुणवत्ता का अध्ययन करके एक अच्छी फसल मिलने में सहायता की जाएगी। इसके बाद उन्हें एक सूची भी दी जाएगी जिसमें किसानों को बताया जाएगा उनकी मिट्टी में वे कौन सी फसल लगाएं जिससे उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा लाभ हो। उन्हें उनकी मिट्टी में किस पोषक तत्वों की ज़रूरत, आवश्यक खाद, फसल के उचित तापमान और वर्षा के हालात आदि के बारे में भी बताया जाएगा। इसमें मिट्टी का पीएच मान, सल्फर, नाइट्रोजन, फास्फोरस, जिंक, आयरन, मैंगनीज और पोटाश की मात्रा का पता लगाया जाएगा। इसके बाद फसल की ज़रूरत के मुताबिक मिट्टी में संतुलित मात्रा में खाद डाली जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य मिट्टी के संतुलन और उसकी उर्वरकता को बढ़ावा देना है जिससे किसानों को कम कीमत में अधिक पैदावार मिल सके।

इस तरह मिलेगा लाभ

राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अन्तर्गत, अगले तीन सालों में 1345 रासायनिक प्रयोगशालाओं की मदद से, 14.5 करोड़ किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच की जाएगी। योजना पर होने वाले खर्च की 75 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार वहन करेगी।

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क्या हैं इसके फायदे

इस योजना का लाभ लेने वाले किसानों के खेत की मिट्टी की लवणीयता, क्षारीयता और अम्लीयता की पूरी जांच होगी जिससे अगर मिट्टी में बदलाव होते हैं तो किसानों को उसके बारे में जानकारी दी जाएगी ताकि वे इसके लिए समय रहते काम कर सकें। गुणवत्ता की जांच होते रहने से किसान यह तय कर पाएंगे कि उन्हें कब, कौन सी फसल करनी है और किसमें उन्हें मुनाफा होगा। इस योजना में किसानों को उनकी मिट्टी की कमी के बारे में भी बताएंगे जिससे वे यह समझ सकेंगे कि किस फसल में निवेश करना चाहिए और किसमें नहीं।

किस तरह होगा काम

इस योजना के तहत सबसे पहले प्राधिकरण मिट्टी के सैंपल इकट्ठे करेगा और फिर उनका परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण के बाद आए परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा और फिर मिट्टी की खासियत व कमी के बारे में सूची बनाई जाएगी। मिट्टी में जो कमी होगी किसानों को उसके बारे में बताया जाएगा और इसके बाद मृदा सेहत कार्ड में पूरी जानकारी इस तरह लिखी जाएगी जिससे किसान इसे आसानी से समझ सकें।

मृदा सेहत की सरकारी वेबसाइट सॉइल हेल्थ के मुताबिक, 23 मई 2017 तक 28,332,178 सैंपल इकट्ठे किए जा चुके हैं और इनमें से 23,447,739 सैंपलों की जांच हो चुकी है। 76,443,764 सॉइल हेल्थ कार्ड प्रिंट हो चुके हैं और 74,557,160 मृदा सेहत कार्ड डिसपैच हो चुके हैं।

क्यों थी इस योजना की ज़रूरत

यहां किसान बस अपने खेत में फसल उगाते रहते हैं। वे उसमें खाद डालते हैं, सिंचाई करते हैं लेकिन मिट्टी की गुणवत्ता की जांच में लापरवाही बरतते हैं। जबकि किसी भी फसल की पैदावार में मिट्टी की गुणवत्ता सबसे अहम भूमिका निभाती है। देश के वैज्ञानिक मिट्टी में मूल्‍यवान पोषक तत्‍वों की कमी के कारण पहले से चिंतित थे। कुछ वैज्ञानिकों ने तो यहां तक चेतावनी दी थी कि यदि आवश्‍यक सुधारात्‍मक कदम नहीं उठाए गए तो अगले 10 वर्षों के समय भोजन की कमी हो सकती है। और इसके लिए यह ज़रूरी था कि कृषि को ज़मीनी स्तर पर सुधारने का प्रयास किया जाए।

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यहां मिलेगी पूरी जानकारी

सरकार ने मृदा सेहत कार्ड की पूरी जानकारी के लिए एक पोर्टल बनाया है, www.soilhealth.dac.gov.in। इस पोर्टल पर मृदा नमूनों के पंजीकरण, मृदा नमूनों के परीक्षण परिणामों को दर्ज करने और उर्वरक सिफारिशों के साथ मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड (एसएचसी) को बना सकते हैं। इसके अलावा सरकार ने इसके लिए एक मोबाइल ऐप भी बनवाई है जिसमें इस योजना के बारे में सारी जानकारी आसानी से मिल सकती है।

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